PM किसान योजना का पूरा बजट नहीं हुआ खर्च, RTI ने खोली 7 साल के खर्च की तस्वीर

PM Kisan Yojana के सात साल के बजट और खर्च को लेकर RTI से अहम जानकारी सामने आई है. कई वर्षों में सरकार ने जितना पैसा आवंटित किया, उतना खर्च नहीं हुआ. अब योजना को अगले पांच साल जारी रखने के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.

नोएडा | Updated On: 13 Sep, 2026 | 06:20 PM

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Yojana) को लेकर RTI से मिली जानकारी में पिछले सात वर्षों के दौरान योजना के लिए किए गए बजट आवंटन और वास्तविक खर्च की तस्वीर सामने आई है. आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार ने हर साल योजना के लिए बड़ा बजट रखा, लेकिन कई वित्त वर्षों में पूरा पैसा खर्च नहीं हो सका. योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है.

2019 में शुरू हुई थी PM-KISAN योजना

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना  की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े छोटे-बड़े खर्चों में आर्थिक मदद देना है. योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते हैं. यह रकम एक साथ नहीं, बल्कि 2,000-2,000 रुपये की तीन बराबर किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए लागू किया गया है. यानी सहायता राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचती है, जिससे बीच में किसी अन्य स्तर की भूमिका कम हो जाती है.

RTI में बजट और खर्च को लेकर क्या पता चला?

RTI के तहत सामने आई जानकारी के मुताबिक, PM-KISAN के लिए हर वित्त वर्ष बजट में राशि तय की गई. हालांकि, कई वर्षों में सरकार द्वारा आवंटित पूरी रकम खर्च नहीं हो सकी. इसके पीछे लाभार्थियों की संख्या में बदलाव और किसानों के रिकॉर्ड के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को अहम वजह माना गया है. योजना में लाभ लेने के लिए किसानों का ई-केवाईसी, आधार सत्यापन और भूमि रिकॉर्ड की जांच की जाती है. जांच के दौरान अपात्र लाभार्थियों को योजना से हटाया जाता है. ऐसे में लाभार्थियों की संख्या में बदलाव होने से आवंटित बजट और वास्तविक खर्च में अंतर दिखाई देता है.

करोड़ों किसानों के खातों में पहुंचती है रकम

PM-KISAN देश की प्रमुख किसान सहायता योजनाओं  में शामिल है. इसके जरिए पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता भेजी जाती है. सरकार समय-समय पर लाभार्थियों का सत्यापन भी करती है, ताकि योजना का फायदा केवल पात्र किसानों को ही मिल सके. ई-केवाईसी और भूमि रिकॉर्ड की जांच जैसी प्रक्रियाओं का उद्देश्य योजना में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत तरीके से पैसा लेने वाले लाभार्थियों को हटाना है. इससे सरकारी राशि का इस्तेमाल सही किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलती है.

अगले 5 साल भी जारी रहेगी योजना

PM-KISAN को लेकर किसानों के लिए एक और बड़ा अपडेट है. केंद्र सरकार ने इस योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी है. इसके लिए करीब 3.15 लाख करोड़ रुपये के कुल वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दी गई है. इस फैसले से आने वाले वर्षों में भी पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता मिलती रहेगी. सरकार का उद्देश्य खेती से जुड़े खर्चों में किसानों को आर्थिक सहारा  देना और उनकी आय को मजबूत करने में मदद करना है. RTI से सामने आई फंडिंग की जानकारी यह भी दिखाती है कि योजना के बजट के साथ-साथ लाभार्थियों के सत्यापन और पात्रता जांच पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है.

Published: 13 Sep, 2026 | 06:16 PM

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