PM Kisan: MP के किन किसानों को नहीं मिलेगी, पीएम किसान सम्मान निधि
मध्य प्रदेश सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्यवाही करने का निर्णय लिया है. अगर कोई किसान अपने खेत में पराली जलता है, तो उसे पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि 1 साल तक नहीं दी जाएगी, साथ ही किसानों की उपज एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर भी नहीं खरीदी जाएगी.
PM किसान सम्मान निधि: मध्य प्रदेश सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्यवाही करने का निर्णय लिया है. सरकार ने साफ कहा है कि अगर कोई किसान अपने खेत में पराली जलता है, तो उसे पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि 1 साल तक नहीं दी जाएगी, साथ ही किसानों की उपज एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर भी नहीं खरीदी जाएगी.
इन दिनों धान की कटाई जोरों शोरों से चल रही है. धान की कटाई के बाद एक समस्या आती है परली निपटारे की. इस समस्या के निपटारे के लिए किसान भाई पराली को खेतों में ही जला देते हैं. इसे देखते हुए प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए किसानों से अपील की है कि वह पराली न जलाएं. सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया गया कि पराली जलाने वाली किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के तहत दी जाने वाली ₹6000 की वार्षिक धनराशि रोक दी जाएगी.
पराली जलाने पर नहीं प्राप्त होगा सरकार की योजनाओं का लाभ
मध्य प्रदेश में लगभग 95 लाख किसानों को पीएम किसान योजना के तहत ₹6,000 और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत ₹6,000 – कुल मिलाकर 12,000 रुपए मिलते हैं. यह राशि तीन किस्तों में 2- 2 हजार रूपए में दी जाती है.
पराली जलाने से होने वाले नुकसान
धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली के निपटारे के लिए किसान भाई लोग उसे खेतों में ही जला देते हैं जिसके कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है. पराली जलाने से पर्यावरण संबंधी गंभीर खतरे सामने आते हैं. मिट्टी को उर्वरक बना बनाने वाले पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की उर्वरक क्षमता घट जाती है.
किसानों को करना पड़ेगा नुकसान का सामना
धान की कटाई के बाद बची पराली को जलाने से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ता है. इसलिए वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया कि अगर कोई किसान परली जलाता है तो उसे 1 साल की सहायता राशि नहीं दी जाएगी और उनकी फसल समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जाएगी.