50 HP से कम वाले ट्रैक्टरों पर किसानों का सबसे ज्यादा भरोसा, जानें जनवरी 2026 में ट्रैक्टर बिक्री का हाल

देश के ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं. उनके खेतों का आकार बड़ा नहीं होता और खेती का काम भी ऐसा नहीं होता, जिसमें बहुत ज्यादा ताकतवर ट्रैक्टर की जरूरत पड़े. 50 हॉर्स पावर से कम के ट्रैक्टर हल जोतने, बुवाई, निराई-गुड़ाई, ट्रॉली खींचने और रोजमर्रा के कृषि कामों के लिए पूरी तरह सक्षम होते हैं.

नई दिल्ली | Published: 6 Feb, 2026 | 10:06 AM

Tractor sales January: भारत में खेती की रीढ़ माने जाने वाले ट्रैक्टरों की बिक्री का ताजा आंकड़ा यह साफ संकेत देता है कि किसान आज भी जरूरत, बजट और जमीन के हिसाब से ही फैसले ले रहे हैं. जनवरी 2026 में खुदरा ट्रैक्टर बिक्री के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें 50 हॉर्स पावर से कम क्षमता वाले ट्रैक्टरों की जबरदस्त पकड़ देखने को मिली है. भारी और ज्यादा ताकतवर ट्रैक्टरों की तुलना में छोटे और मध्यम ट्रैक्टर किसानों की पहली पसंद बने हुए हैं.

क्यों 50 HP से कम ट्रैक्टर किसानों की पसंद बने हुए हैं

देश के ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं. उनके खेतों का आकार बड़ा नहीं होता और खेती का काम भी ऐसा नहीं होता, जिसमें बहुत ज्यादा ताकतवर ट्रैक्टर की जरूरत पड़े. 50 हॉर्स पावर से कम के ट्रैक्टर हल जोतने, बुवाई, निराई-गुड़ाई, ट्रॉली खींचने और रोजमर्रा के कृषि कामों के लिए पूरी तरह सक्षम होते हैं. यही वजह है कि जनवरी 2026 में इस सेगमेंट में कुल 1 लाख 11 हजार से ज्यादा ट्रैक्टर बिके, जो कुल बिक्री का बड़ा हिस्सा है.

इन ट्रैक्टरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनका रखरखाव आसान होता है, डीजल की खपत कम रहती है और कीमत भी अपेक्षाकृत सस्ती होती है. किसान इन्हें खेत के साथ-साथ गांव के दूसरे कामों में भी इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे निवेश का पूरा फायदा मिल पाता है.

ट्रैक्टर रिटेल बिक्री के आंकड़े (जनवरी 2026)

निर्माता 50HP से ऊपर बाज़ार हिस्सेदारी % (50HP से ऊपर) 50HP से नीचे बाज़ार हिस्सेदारी % (50HP से नीचे)
महिंद्रा 762 38.31% 25,233 22.69%
स्वराज 168 8.45% 21,743 19.55%
सोनालिका 95 4.78% 15,281 13.74%
मैसी फर्ग्यूसन 28 1.41% 13,432 12.08%
एस्कॉर्ट्स 38 1.91% 12,273 11.03%
जॉन डियर 705 35.44% 7,190 6.46%
आयशर 12 0.60% 7,802 7.01%
न्यू हॉलैंड 161 8.09% 5,175 4.65%
अन्य 5 0.25% 791 0.71%
ट्रैकस्टार 0.00% 697 0.63%
वीएसटी 399 0.36%
कैप्टन 341 0.31%
इंडो फार्म 290 0.26%
कुबोटा 184 0.17%
प्रीत 2 0.10% 153 0.14%
एसीई 1 0.05% 151 0.14%
एसडीएफ 12 0.60% 86 0.08%

कुल: 50HP से ऊपर: 1,989 (100.00%)
50HP से नीचे: 111,221 (100.00%)

बड़े ट्रैक्टरों की मांग सीमित लेकिन स्थिर

अगर 50 हॉर्स पावर से ऊपर वाले ट्रैक्टरों की बात करें, तो इस श्रेणी में जनवरी 2026 में करीब दो हजार यूनिट की बिक्री दर्ज की गई. यह संख्या भले ही कम दिखे, लेकिन इस सेगमेंट की अपनी अलग जरूरत और बाजार है. बड़े किसान, ठेके पर खेती करने वाले लोग और कमर्शियल एग्रीकल्चर से जुड़े व्यवसायी इस तरह के ट्रैक्टर खरीदते हैं.

इस श्रेणी में कुछ ब्रांड्स ने अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे यह साफ होता है कि हाई हॉर्स पावर ट्रैक्टरों की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह एक सीमित लेकिन स्थिर बाजार बना हुआ है. बड़े ट्रैक्टरों का इस्तेमाल गहरी जुताई, भारी उपकरण चलाने और बड़े खेतों में तेज काम के लिए किया जाता है.

छोटे ट्रैक्टरों में ब्रांड्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा

50 हॉर्स पावर से कम वाले ट्रैक्टर सेगमेंट में जनवरी 2026 में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली. कई बड़े ब्रांड्स के बीच बाजार हिस्सेदारी को लेकर कड़ा मुकाबला रहा. किसानों ने भरोसेमंद, मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले ट्रैक्टरों को तरजीह दी.

इस सेगमेंट में कुछ कंपनियों ने सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की, जिससे यह साफ है कि किसान आज भी उन ब्रांड्स पर भरोसा करते हैं, जिनकी सर्विस नेटवर्क मजबूत है और जिनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. ग्रामीण इलाकों में सर्विस और मरम्मत की सुविधा किसानों के लिए उतनी ही जरूरी है, जितनी ट्रैक्टर की ताकत.

खेती के बदलते तरीके और ट्रैक्टर की भूमिका

आज खेती धीरे-धीरे आधुनिक हो रही है, लेकिन इसके बावजूद भारत में खेती की बुनियादी जरूरतें ज्यादा नहीं बदली हैं. छोटे ट्रैक्टर आज भी बहुउपयोगी साबित हो रहे हैं. किसान इन्हें खेती के साथ-साथ ढुलाई, पानी के टैंकर खींचने और छोटे-मोटे निर्माण कार्यों में भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

सरकार की ओर से कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने की योजनाएं भी चल रही हैं, जिनका फायदा उठाकर किसान ट्रैक्टर खरीद रहे हैं. सब्सिडी और आसान फाइनेंस विकल्पों ने भी बिक्री को सहारा दिया है.

आगे क्या कहते हैं संकेत

जनवरी 2026 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में भी 50 हॉर्स पावर से कम क्षमता वाले ट्रैक्टरों की मांग मजबूत बनी रह सकती है. जब तक देश में छोटे और मध्यम किसानों की संख्या ज्यादा रहेगी, तब तक इस सेगमेंट का दबदबा कायम रहेगा.

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