वैज्ञानिक खेती के लिए सॉइल मोबाइल ऐप लॉन्च, कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक बनाने की घोषणा
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती में मशीनों की उपलब्धता को भी बड़ी चुनौती बताया, उन्होंने कहा कि हर किसान महंगी मशीनें खरीदने में सक्षम नहीं होता, जिससे समय पर खेती के कार्य प्रभावित होते हैं. इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने ‘मशीन बैंक’ और कस्टम हायरिंग सेंटर के मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही.
किसानों की लागत घटाने और पैदावा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार तकनीक आधारित खेती की ओर बढ़ने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन में राष्ट्रीय कृषि मेला से सॉइल मोबाइल ऐप (Soil Mobile App) लॉन्च कर दी है. इस मोबाइल ऐप के जरिए किसानों को अपने खेत की मिट्टी की सेहत का पता चल सकेगा और वह उसके अनुसार वैज्ञानिकों की संस्तुति पर फसलें कर सकेंगे. कृषि मंत्री ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में क्लीन प्लांट सेंटर बनेगा और कस्टम हायरिंग सेंटर के साथ ही मशीन बैंक भी बनेंगे, जो खेती को नई दिशा देंगे.
मध्य प्रदेश के रायसेन में राष्ट्रीय कृषि मेले के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में क्लीन प्लांट सेंटर बनेगा. उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किसानों को उच्च गुणवत्ता और रोगमुक्त पौध उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित कर रही है, जिसमें एक केंद्र मध्यप्रदेश में भी बनाया जा सकता है. इसके साथ ही नर्सरियों की स्थापना कर किसानों को प्रमाणित और परीक्षण किए हुए पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उन्हें किसी प्रकार की धोखाधड़ी या नुकसान का सामना न करना पड़े.
कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक बनेंगे
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती में मशीनों की उपलब्धता को भी बड़ी चुनौती बताया, उन्होंने कहा कि हर किसान महंगी मशीनें खरीदने में सक्षम नहीं होता, जिससे समय पर खेती के कार्य प्रभावित होते हैं. इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने ‘मशीन बैंक’ और कस्टम हायरिंग सेंटर के मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही. उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पंचायतों की ओर से मशीन बैंक स्थापित किए गए हैं, जहां से किसान उचित किराए पर मशीनें ले सकते हैं. इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी पंचायत स्तर पर मशीन बैंक स्थापित करने और हर ब्लॉक में कम से कम पांच कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू होंगे. उन्होंने सरपंचों से भी इस पहल में आगे आने की अपील की और कहा कि पंचायतें खुद मशीन बैंक स्थापित कर किसानों को सस्ती और समय पर सुविधाएं उपलब्ध करा सकती हैं.
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वैज्ञानिक खेती के लिए Soil Mobile App लॉन्च
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि केवल क्षेत्रीय स्तर की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर किसान को अपने खेत की मिट्टी की सही स्थिति जानना जरूरी है. उन्होंने कहा कि जिले और ब्लॉक स्तर पर मिट्टी की सामान्य जानकारी दी जाती है, लेकिन वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब किसान अपने खेत का मिट्टी परीक्षण कराकर सॉइल हेल्थ कार्ड बनवाएं. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस फसल के लिए कौन-से पोषक तत्व जरूरी हैं. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए एक नया मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, जिससे खेती करना और आसान हो गया है. किसान अपने मोबाइल में ऐप डाउनलोड कर खेत में खड़े होकर ही यह जान सकते हैं कि किस फसल के लिए कितनी मात्रा में खाद और उर्वरक डालना चाहिए.
अंधाधुंध खाद से खेती को नुकसान पहुंच रहा
उन्होंने कहा कि बिना जानकारी के अंधाधुंध खाद का उपयोग नुकसानदायक है. इससे न केवल किसानों की लागत बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से तय मात्रा में खाद का डालने से किसानों का नुकसान कम होगा और भूमि की उर्वरता भी बनी रहेगी. इसके लिए सॉइल हेल्थ कार्ड और नई तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करना जरूरी है.
कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस को मजबूत किया जाएगा
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को फलों और सब्जियों के नुकसान से बचाने के लिए कोल्ड चेन और पैक हाउस जैसी सुविधाओं के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि जल्दी खराब होने वाली उपज के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए मध्यप्रदेश में कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा. इसके लिए केंद्र सरकार की कृषि अवसंरचना योजनाओं का उपयोग किया जाएगा और राज्य सरकार के साथ मिलकर इसे लागू किया जाएगा. साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा.
टमाटर से सॉस और पाउडर बनाकर बिक्री से बढ़ेगी कमाई
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसान उत्पादक संगठन को मिशन मोड में मजबूत बनाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग खेती करने से किसानों को दिक्कतें आती हैं, जबकि समूह में काम करने से बेहतर मूल्य और सुविधाएं मिल सकती हैं. उन्होंने कहा कि बाजार में दाम गिरने पर किसानों को नुकसान होता है, लेकिन प्रसंस्करण के जरिए इससे बचा जा सकता है. आईसीएआर द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से टमाटर से सॉस, प्यूरी और यहां तक कि टमाटर पाउडर भी बनाया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे. उन्होंने कहा कि भोपाल और आसपास के आईसीएआर संस्थानों, कृषि महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों को जोड़कर एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाएगा, ताकि वैज्ञानिक सीधे किसानों के साथ काम करें और उन्हें निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहे.