शब-ए-बारात पर बेर के पत्तों से क्यों नहाते हैं? जादू-टोना, स्किन प्रॉब्लम्स या… जानें क्या है इसके पीछे का रहस्य!

Shab-e-Barat 2026: शब-ए-बारात इस्लाम में इबादत और तौबा की पवित्र रात मानी जाती है. इस दिन बेर के पत्तों से गुस्ल करने का विशेष उपाय किया जाता है. माना जाता है कि इससे जादू-टोना, बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. साथ ही, यह त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद है और शरीर में ताजगी लाता है.

नोएडा | Published: 3 Feb, 2026 | 05:15 PM

Shab-e-Barat: शब-ए-बारात इस्लाम में एक बेहद खास रात मानी जाती है. इसे इबादत, तौबा और अल्लाह से माफी मांगने की रात कहा गया है. साल 2026 में यह रात 3 फरवरी को है. इस रात को लोग बहुत ही पवित्र मानते हैं और इसके दौरान कई विशेष उपाय किए जाते हैं. इनमें से एक उपाय है बेर के पत्तों से नहाना, जिसे इस्लामिक जानकारों के अनुसार बड़े लाभकारी और शुभ माना गया है.

बेर के पत्तों की पवित्रता

इस्लाम में बेर का पेड़ बहुत खास माना गया है. कुरआन में इसका जिक्र सिद्र नाम से आता है और इसे जन्नत से जुड़े वृक्ष के रूप में बताया गया है. इसे बरकत, पाकीजगी और रहमत का प्रतीक माना जाता है. इसलिए बेर के पत्तों को बहुत ही शुद्ध और मुबारक समझा जाता है. लोग मानते हैं कि इन पत्तों के माध्यम से इंसान अपनी नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से सुरक्षित रह सकता है.

बेर के पत्तों के पानी से नहाने का तरीका

मान्यता है कि शब-ए-बारात की मगरिब की नमाज के बाद सात बेर के पत्तों को पानी में डालकर हल्का गर्म किया जाए. इसके बाद इस पानी से गुस्ल (पूर्ण स्नान) करना चाहिए. ऐसा करने से कहा जाता है कि जादू-टोना, बुरी नजर और नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं. लोग इसे अपने जीवन में सुरक्षा कवच की तरह मानते हैं.

यह गुस्ल न सिर्फ आध्यात्मिक शुद्धि देता है बल्कि इंसान के आसपास मौजूद बुरी ऊर्जा को भी दूर करता है. साथ ही, यह नहाने वाला व्यक्ति मानसिक और आध्यात्मिक रूप से ताजगी महसूस करता है.

स्किन और बालों के लिए फायदे

बेर के पत्तों के पानी से नहाने के स्वास्थ्य लाभ भी माने जाते हैं. कई इस्लामिक जानकारों के अनुसार, इसका पानी त्वचा की समस्याओं जैसे खुजली, दाने, एलर्जी और रैशेस में आराम देता है.

इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति डैंड्रफ या बालों की समस्या से परेशान है, तो इस पानी से सिर धोने पर बाल स्वस्थ और साफ रहते हैं. पानी ठंडक देने वाला होता है और त्वचा व बालों को स्वच्छ और ताजगी प्रदान करता है.

शब-ए-बारात पर यह अमल क्यों करें?

शब-ए-बारात को लोग इबादत और तौबा की रात मानते हैं. इस दौरान बेर के पत्तों के पानी से गुस्ल करना न केवल आध्यात्मिक शुद्धि देता है, बल्कि इसे करने वाले व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा भी बढ़ती है. इसे आध्यात्मिक और प्राकृतिक उपचार दोनों माना जाता है.

इस तरह, बेर के पत्तों का पानी शब-ए-बारात पर एक तरह का रखवाला उपाय है. यह न केवल जादू-टोना और बुरी नजर से बचाता है बल्कि स्वास्थ्य, त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी होता है.

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है और आम जानकारी पर आधारित है. Kisan India इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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