चीनी बाजार में बड़ा उलटफेर, 4.8 फीसदी टूटा कच्ची चीनी का भाव.. भारत में आयात की जरूरत घटी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी के दाम 4.8 फीसदी तक गिर गए हैं. भारत में सरकार के स्टॉक लिमिट और शुल्क मुक्त आयात जैसे कदमों से घरेलू सप्लाई बढ़ी है. इससे ज्यादा चीनी आयात की उम्मीद कम हुई है. हालांकि, वैश्विक बाजार में चीनी की कमी का खतरा बना हुआ है. अल नीनो और यूरोप में सूखे से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है.

नोएडा | Published: 4 Sep, 2026 | 08:34 AM

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी की कीमतों में तेज गिरावट आई है. न्यूयॉर्क में चीनी वायदा भाव 4.8 फीसदी तक गिर गया. यह मई के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है. चीनी के दाम इससे पहले 17 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए थे. पिछले महीने कीमतों में 21 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई थी. भारत में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद अब बड़े पैमाने पर आयात की जरूरत को लेकर चिंता कम हुई है.

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है. आपूर्ति कम होने और अगले सीजन में वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी की आशंका के चलते पिछले महीने कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी. हालांकि, कीमतों में लगातार तेजी के कारण बाजार में चीनी की खरीदारी जरूरत से ज्यादा बढ़ने की स्थिति में पहुंच गई थी. चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे भारत का 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात  की अनुमति देना भी एक बड़ी वजह थी. हालांकि, घरेलू बाजार में चीनी के दाम कमजोर पड़ने के बाद अब विदेश से ज्यादा चीनी खरीदने की उम्मीद कम हुई है. राबोबैंक ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.

स्टॉक लिमिट सख्त होने से बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ी

चीनी की जमाखोरी रोकने और घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने इस सप्ताह कारोबारियों के पास चीनी रखने की सीमा और सख्त कर दी है. इन कदमों से बाजार में चीनी का स्टॉक बढ़ा है और ज्यादा मात्रा में चीनी बिक्री के लिए उपलब्ध हुई है. MEIR Commodities India Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर राहिल शेख के मुताबिक, भारत को करीब 5 से 6 लाख टन चीनी आयात करने की जरूरत पड़ सकती है.

स्टॉक लिमिट से चीनी की सप्लाई बढ़ी

भारत में सरकार के स्टॉक लिमिट जैसे कदमों से बाजार में जमा चीनी की सप्लाई बढ़ी है. इससे घरेलू बाजार में चीनी के दाम कुछ कमजोर हुए हैं. हालांकि, जानकारों का कहना है कि देश में अभी भी चीनी की सप्लाई को लेकर गंभीर कमी बनी हुई है. चीनी की कीमतों में हाल की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ गया है. कीमतों में तेजी इतनी ज्यादा थी कि 14 दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 70 के ऊपर पहुंच गया था. यह संकेत देता है कि कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं और अब उनमें गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है.

ब्राजील में चीनी उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

ब्राजील में भी चीनी का उत्पादन मिलों के लिए एथेनॉल  की तुलना में ज्यादा फायदेमंद हो गया है. ऐसे में मिलें गन्ने का ज्यादा हिस्सा चीनी बनाने में इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके बावजूद, वैश्विक बाजार में चीनी की बड़ी कमी की आशंका बनी हुई है.अल नीनो के कारण एशिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है. वहीं, यूरोप में सूखे की वजह से चीनी उत्पादन घटने का अनुमान है.

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