चीनी की कीमतों में एक सप्ताह के दौरान गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन पिछले माह की तुलना में खुदरा कीमत अभी भी 27 फीसदी अधिक बनी हुई है. उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार 3 सितंबर को चीनी का खुदरा भाव मुंबई में 62 रुपये और रांची में 68 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया है. एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार के तमाम प्रयासों के बाद अब भी बाजार में खुदरा चीनी का भाव और नीचे जाने में 10 दिन का समय और लग सकता है. क्योंकि, स्टॉकिस्ट पुराने स्टॉक की बिक्री करने पर जोर दे रहे हैं और उसके बाद मौजूदा स्टॉक बिक्री शुरू की जाएगी.
एक सप्ताह में चीनी का भाव 3 फीसदी लुढ़का
केंद्र सरकार की ओर से चीनी के आयात की अनुमति दिए जाने और थोक उपभोक्ताओं तथा कारोबारियों के लिए भंडारण के नियम सख्त किए जाने के बाद देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत एक सप्ताह में 3.85 फीसदी घटकर 62.57 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है. चीनी का औसत खुदरा मूल्य एक सप्ताह पहले 65.08 रुपये प्रति किलोग्राम था. हालांकि, कीमतें अब भी पिछले महीने के 49.33 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से करीब 27 फीसदी अधिक हैं.
दिल्ली, कोलकात समेत बड़े शहरों में चीनी का दाम
उपभोक्ता मामले विभाग की मूल्य निगरानी समिति के 3 सितंबर के खाद्य वस्तुओं के जारी मूल्य सूची के अनुसार दिल्ली में चीना का खुदरा मूल्य 59 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. मुंबई में चीनी का खुदरा मूल्य 60 रुपये प्रति किलो, कोलकाता में 62 रुपये और चेन्नई में 59 रुपये भाव दर्ज किया गया है. सर्वाधिक चीनी का मूल्य रांची में 68 रुपये है. वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर अधिकतम खुदरा मूल्य 72 रुपये बना हुआ है, जो बीते सप्ताह के 75 रुपये से 3 रुपये लुढ़का है.
- PM Kisan Yojana के लाभार्थियों को एडवांस में मिलेंगे 2000 रुपये, जानिए किस्त जारी करने के लिए मंत्रालय ने क्या कहा
- हल्दी, करौंदा की खेती पर सरकार दे रही 10 हजार रुपये, स्प्रिंकलर लगवाने पर 90 फीसदी सब्सिडी पाएं किसान
- यमुना और हिंडन की बाढ़ में अभी भी डूबे दर्जनों गांव, गन्ना में बीमारी लग रही.. गेहूं बुवाई में देरी की चिंता
चीनी का थोक मूल्य एक सप्ताह में 3 रुपये नीचे आया
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चीनी का औसत थोक मूल्य भी दो सितंबर को घटकर 57.62 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जो एक सप्ताह पहले 60.39 रुपये प्रति किलोग्राम था. एक्सपर्ट के अनुसार थोक कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में कुछ समय लगता है. इसकी वजह यह है कि खुदरा विक्रेताओं ने पहले ऊंची कीमतों पर चीनी का भंडारण किया था. ऐसे में वे पुराने भंडारण को घाटे में बेचने के बजाय मौजूदा कीमतों पर ही बेचते हैं.
खुदरा कीमतें और नीचे आने में लग सकता है 10 दिन का समय
आमतौर पर एक खुदरा विक्रेता के पास चीनी की 50-50 किलोग्राम की 10 से 15 बोरियां होती हैं. नया भंडारण कम कीमत पर खरीदे जाने के बाद ही खुदरा कीमतों में गिरावट का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि खुदरा कीमत में बदलाव का असर सामने आने में कम से कम 10 दिन लगते हैं.
चीनी उत्पादन अनुमान घटाकर 306 लाख टन किया
चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं. इनमें 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति देना और थोक उपयोगकर्ताओं तथा कारोबारियों के लिए भंडारण रखने के नियम सख्त करना शामिल है. केंद्र सरकार ने चीनी मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है. हालांकि, 2025-26 विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी उत्पादन अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. देश में वार्षिक चीनी की मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है.