भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौता किया है और इसे अगले महीने से लागू किया जाएगा. इस समझौते पर बीते 27 अप्रैल को दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के बाद दोनों देश एक-दूसरे को 100 फीसदी ड्यूटी फ्री उत्पादों की आयात निर्यात कर सकेंगे. केंद्र सरकार ने कहा है कि इस समझौते से डेयरी और कृषि सेक्टर को बाहर रखा गया है. लेकिन, किसान संगठनों ने इस समझौते के किसानों के लिए बर्बादी की वजह बनने वाला बताया है. अखिल भारतीय किसान सभा, किसान मजदूर मोर्चा ने सभी तरह के फ्री ट्रेड डील को रद्द करने की मांग की है.
27 अप्रैल को साइन हुआ FTA, अगले महीने से लागू होगा
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अगले महीने से लागू होगा. विदेश व्यापार मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से पीटीआई ने कहा बृहस्पतिवार को बताया कि वस्तुओं एवं सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के साथ ही निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दोनों देशों ने 27 अप्रैल को मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने कहा कि अगले महीने से इसे लागू किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने समझौता लागू किए जाने की तारीख नहीं बताई है.
सरकार ने बताया कौन से उत्पाद समझौते से बाहर रखे गए
भारत न्यूजीलैंड समझौते के अनुसार कृषि उत्पादकता साझेदारी के जरिए एफटीए किसानों के साथ मिलकर उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने का काम करता है. न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते से कुछ उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है, जैसे कि दुग्ध उत्पाद दूध, क्रीम, मट्ठा, दही, पनीर आदि, पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर), वनस्पति उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी, कृत्रिम शहद, पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीव वसा और तेल, हथियार और गोला-बारूद, रत्न और आभूषण, तांबा और उससे बनी वस्तुएं (कैथोड, कारतूस, छड़, बार, कॉइल आदि), एल्युमिनियम और उससे बनी वस्तुएं (पिंड, बिलेट, तार की छड़ें) आदि.
किसान संगठनों ने मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करे
अखिल भारतीय किसान महासभा (AIKS) का आरोप है कि समझौते के तहत डेयरी और उससे जुड़े कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म होने से भारत के छोटे और सीमांत डेयरी किसानों के हितों को नुकसान पहुंच सकता है. किसान मजदूर मोर्चा ने मुक्त व्यापार समझौतों से किसानों का भविष्य संकट में पड़ने की आशंका जताई है. संगठन ने कहा है कि केंद्र सरकार सभी तरह के मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करे. वहीं, सेब बागवानों को डर है कि न्यूज़ीलैंड से आने वाले सस्ते सेबों के कारण घरेलू बाजार पर असर पड़ेगा और उनकी आमदनी घटेगी. वहीं, भेड़ के मांस का आयात को ड्यूटी फ्री किया जा रहा है. इससे घरेलू भेड़ पालकों और मीट कारोबार को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है.