FTAs से खुलेंगे नए वैश्विक बाजार, भारत को कृषि निर्यात में नंबर-1 बनाने की तैयारी: पीयूष गोयल

यूरोप के कई देशों में भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बहुत कम या लगभग शून्य हो गया है. इससे भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए वहां बड़ा बाजार खुल गया है. इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड में भी भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 10 Mar, 2026 | 02:43 PM

India agricultural exports growth: भारत धीरे-धीरे वैश्विक कृषि व्यापार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है. सरकार की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में भारत कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि हाल के वर्षों में हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते भारतीय किसानों, मछुआरों और छोटे-मध्यम उद्योगों के लिए नए अवसर लेकर आए हैं.

नई दिल्ली में आयोजित आहार अंतरराष्ट्रीय फूड एंड हॉस्पिटैलिटी मेले में बोलते हुए गोयल ने कहा कि भारत अब दुनिया के कई बड़े बाजारों तक विशेष व्यापारिक पहुंच हासिल कर चुका है. इससे भारतीय उत्पादों को विदेशों में जगह बनाने में आसानी हो रही है और विदेशी निवेशकों की नजर भी भारत पर टिकने लगी है. उनके मुताबिक, देश के कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और अब यह सालाना 55 अरब डॉलर यानी करीब 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है. यह दिखाता है कि भारतीय कृषि उत्पादों की मांग वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ रही है.

मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ा निर्यात का रास्ता

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, पीयूष गोयल ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने 9 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं. इन समझौतों के कारण भारत के लिए 38 विकसित देशों के बाजार खुल गए हैं. इससे भारतीय उत्पादों को कई देशों में कम शुल्क या लगभग शून्य शुल्क पर निर्यात करने का अवसर मिल रहा है.

इन समझौतों का फायदा यह भी है कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन रही हैं. इसका मतलब है कि भारत अब केवल अपने लिए उत्पादन नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया के अन्य देशों के साथ मिलकर व्यापार और उत्पादन में साझेदारी भी कर रहा है.

कृषि निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. आज भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कृषि निर्यातक देश बन चुका है. 2014 से 2025 के बीच कई उत्पादों के निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस दौरान प्रोसेस्ड फूड का निर्यात चार गुना बढ़ा है, जबकि दालों का निर्यात तीन गुना हो गया है. इसी तरह प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात भी चार गुना तक बढ़ा है.

फलों के निर्यात में भी तेजी देखी गई है और यह लगभग दोगुना हो चुका है. वहीं चावल के निर्यात में करीब 62 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो भारत जल्द ही वैश्विक खाद्य व्यापार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है.

दुनिया की ‘फूड बास्केट’ बनने की दिशा में कदम

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अब केवल अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहता. सरकार का लक्ष्य है कि भारत दुनिया की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए. उनका कहना है कि भारत के पास कृषि उत्पादन की बड़ी क्षमता है और यहां के किसान दुनिया के कई देशों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने में सक्षम हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और वाणिज्य मंत्रालयों के साथ मिलकर इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने पर काम कर रही है.

यूरोप और अन्य देशों में बढ़ रही मांग

गोयल ने बताया कि यूरोप के कई देशों में भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बहुत कम या लगभग शून्य हो गया है. इससे भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए वहां बड़ा बाजार खुल गया है. इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों—स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड में भी भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है.

इस साल आयोजित आहार मेले में इटली साझेदार देश के रूप में शामिल हुआ है. गोयल ने कहा कि भारत और इटली खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा.

नए व्यापार समझौतों पर भी चल रही बातचीत

सरकार आने वाले समय में और देशों के साथ व्यापार समझौते करने की दिशा में काम कर रही है. मंत्री के अनुसार कनाडा के साथ व्यापार समझौता अंतिम चरण में है, जबकि मध्य-पूर्व के गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों के साथ भी चर्चा जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये समझौते सफल होते हैं तो भारतीय कृषि और खाद्य उद्योग के लिए वैश्विक बाजार में और बड़े अवसर खुल सकते हैं.

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