रमजान से पहले अंगूर कारोबार को झटका, दुबई जाने वाले 300 कंटेनर अटके, गिर सकते हैं अंगूर के दाम

मौजूदा हालात में हजारों टन अंगूर बंदरगाहों और कोल्ड स्टोरेज में फंसे हुए हैं. निर्यातकों और व्यापारियों के अनुसार अगर जल्द ही शिपमेंट दोबारा शुरू नहीं हुआ तो इन अंगूरों को घरेलू बाजार में बेचना पड़ सकता है, जिससे किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 5 Mar, 2026 | 08:10 AM

Maharashtra grape exports: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव के कारण खाड़ी देशों के लिए समुद्री और हवाई मार्गों में अनिश्चितता पैदा हो गई है. इसका सीधा असर महाराष्ट्र से होने वाले अंगूर के निर्यात पर पड़ा है.

मौजूदा हालात में हजारों टन अंगूर बंदरगाहों और कोल्ड स्टोरेज में फंसे हुए हैं. निर्यातकों और व्यापारियों के अनुसार अगर जल्द ही शिपमेंट दोबारा शुरू नहीं हुआ तो इन अंगूरों को घरेलू बाजार में बेचना पड़ सकता है, जिससे किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है.

300 कंटेनर अंगूर दुबई भेजने से पहले ही रुक गए

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, महाराष्ट्र से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले अंगूर का बड़ा हिस्सा नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) से निर्यात किया जाता है. लेकिन पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण यहां से होने वाले कई शिपमेंट रुक गए हैं.

जानकारी के अनुसार लगभग 300 कंटेनर, जिनमें करीब 3,900 टन अंगूर भरे हुए थे, दुबई के लिए भेजे जाने वाले थे. लेकिन अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण समुद्री और हवाई मार्गों में अनिश्चितता पैदा हो गई और इन कंटेनरों की आवाजाही रोक दी गई. इस स्थिति ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि अंगूर एक जल्दी खराब होने वाला फल है और लंबे समय तक बंदरगाह पर रखने से इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.

बंदरगाह और कोल्ड स्टोरेज में फंसे सैकड़ों कंटेनर

सिर्फ 300 कंटेनर ही नहीं, बल्कि इससे कहीं ज्यादा माल भी अभी निर्यात के इंतजार में है. व्यापारियों के अनुसार करीब 700 कंटेनर अंगूर इस समय जेएनपीए और आसपास के कोल्ड स्टोरेज में पड़े हैं. ये सभी कंटेनर शिपिंग शेड्यूल स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन जब तक खाड़ी क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था सामान्य नहीं होती, तब तक इनकी शिपमेंट शुरू होने की संभावना कम दिखाई दे रही है.

घरेलू बाजार में गिर सकते हैं दाम

निर्यातकों का कहना है कि उन्होंने किसानों से अंगूर खास तौर पर निर्यात के लिए खरीदे थे. इन अंगूरों की कीमत लगभग 120 से 170 रुपये प्रति किलो के बीच दी गई थी. अगर निर्यात जल्दी शुरू नहीं होता है तो इन अंगूरों को मजबूरन घरेलू बाजार में उतारना पड़ेगा. भारत के बाजार में अंगूर की कीमतें आमतौर पर निर्यात के मुकाबले काफी कम होती हैं. ऐसे में व्यापारियों और किसानों दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़ी मात्रा में अंगूर घरेलू बाजार में आते हैं तो आपूर्ति अचानक बढ़ जाएगी और कीमतों में गिरावट आ सकती है.

16 हजार टन अंगूर पर मंडरा रहा खतरा

महाराष्ट्र ग्रेप ग्रोअर्स एसोसिएशन के अनुसार स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो नुकसान का दायरा और बड़ा हो सकता है. संस्था के अनुमान के मुताबिक इस समय 5,000 से 6,000 टन अंगूर पहले से ही बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. वहीं करीब 10,000 टन निर्यात गुणवत्ता के अंगूर अभी भी खेतों में तैयार हैं और उनके निर्यात का इंतजार किया जा रहा है. इस तरह कुल मिलाकर लगभग 16,000 टन अंगूर प्रभावित हो सकते हैं, यदि खाड़ी देशों के लिए निर्यात लंबे समय तक बंद रहता है.

रमजान के समय बढ़ती है मांग

खाड़ी देशों में महाराष्ट्र के अंगूर की काफी मांग रहती है, खासकर रमजान के दौरान. इस समय दुबई और अन्य खाड़ी शहरों में ताजे फलों की मांग बढ़ जाती है और भारतीय निर्यातक बड़ी मात्रा में अंगूर वहां भेजते हैं. हर साल इस मौसम में हजारों टन अंगूर खाड़ी बाजारों में पहुंचते हैं. लेकिन इस बार पश्चिम एशिया के तनाव ने इस कारोबार को झटका दिया है.

किसानों और व्यापारियों की बढ़ी चिंता

निर्यात रुकने से सबसे ज्यादा चिंता किसानों और व्यापारियों को हो रही है. किसानों ने बड़ी उम्मीद के साथ अंगूर की खेती की थी और निर्यात से उन्हें बेहतर दाम मिलने की उम्मीद थी. अगर निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो न सिर्फ किसानों की कमाई घटेगी बल्कि घरेलू बाजार में कीमतों में गिरावट से पूरे अंगूर कारोबार पर असर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में यदि शिपिंग मार्ग सामान्य हो जाते हैं तो स्थिति संभल सकती है. लेकिन अगर पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ता है तो महाराष्ट्र के अंगूर निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है.

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Published: 5 Mar, 2026 | 08:10 AM

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