भारत के लिए खतरे की घंटी! प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल नीनो, IOD भी बदल सकता है करवट
El Nino 2026: प्रशांत महासागर में अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और सितंबर से नवंबर के बीच समुद्र का तापमान और बढ़ने का अनुमान है. 30 अगस्त तक Nino 3.4 इंडेक्स +2.45 डिग्री सेल्सियस रहा, जो तय सीमा से काफी ऊपर है. इसका असर मार्च 2027 तक रह सकता है.
El Nino Alert: प्रशांत महासागर में अल नीनो का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग (BoM) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर की सतह का तापमान आने वाले समय में और बढ़ सकता है. सितंबर से नवंबर के बीच दक्षिणी हिस्से में वसंत ऋतु में अल नीनो की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है. इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है. भारत में भी मौसम वैज्ञानिक अल नीनो पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसके बदलाव का असर देश के मौसम और बारिश पर पड़ सकता है. इसके साथ ही हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है.
अल नीनो का इंडेक्स सामान्य सीमा से काफी ऊपर
30 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में नीनो 3.4 इंडेक्स का मान +2.45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. यह अल नीनो की तय सीमा +0.80 डिग्री सेल्सियस से काफी ज्यादा है. इससे पता चलता है कि इस समय प्रशांत महासागर में अल नीनो काफी मजबूत स्थिति में है. मौसम मॉडल के मुताबिक, सितंबर से नवंबर के बीच दक्षिणी हिस्से में आने वाली वसंत ऋतु के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान और बढ़ सकता है. इसका सबसे ज्यादा असर वसंत ऋतु के आखिरी समय या गर्मियों की शुरुआत में देखने को मिल सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो की मौजूदा ताकत और इसके सामान्य चक्र को देखते हुए इसका असर मार्च 2027 तक बना रह सकता है. इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है. भारत में भी मौसम वैज्ञानिक अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
क्या होता है IOD और क्यों है इसकी चर्चा?
इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD हिंद महासागर में समुद्र के तापमान और हवा के बदलाव से जुड़ी मौसम की स्थिति है. जब IOD पॉजिटिव फेज में होता है तो हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में पानी गर्म और पूर्वी हिस्से में ठंडा होने लगता है. नेगेटिव फेज में इसका उल्टा पैटर्न देखने को मिलता है. 30 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में IOD इंडेक्स +0.22 डिग्री सेल्सियस रहा. यह लगातार तीन हफ्तों से न्यूट्रल स्थिति में है. इससे पहले तीन हफ्तों तक यह पॉजिटिव IOD की सीमा यानी +0.4 डिग्री सेल्सियस से ऊपर था. मौसम मॉडल अभी भी सितंबर से नवंबर के बीच पॉजिटिव IOD बनने की संभावना जता रहे हैं, हालांकि हालिया अनुमान में इसकी ताकत पहले के मुकाबले कुछ कम बताई गई है.
भारत के लिए क्यों अहम है IOD?
IOD और अल नीनो दोनों ही भारत के मानसून और मौसम को प्रभावित करने वाले बड़े समुद्री पैटर्न हैं. हालांकि किसी एक पैटर्न के आधार पर पूरे मौसम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, लेकिन इनकी स्थिति बारिश के वितरण और मौसम के मिजाज पर असर डाल सकती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के मुताबिक फिलहाल हिंद महासागर में IOD न्यूट्रल है और उसके मॉडल सितंबर 2026 तक इसके न्यूट्रल बने रहने का अनुमान लगा रहे हैं. हालांकि अंतरराष्ट्रीय मौसम केंद्रों के कुछ अनुमान सितंबर से इसके पॉजिटिव IOD में बदलने की संभावना जता रहे हैं.
दुनिया भर में समुद्र का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर
रिपोर्ट में वैश्विक समुद्री तापमान को लेकर भी चिंता जताई गई है. अगस्त में 60 डिग्री दक्षिण से 60 डिग्री उत्तर अक्षांश के बीच समुद्र की सतह का दैनिक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर रहा. यह 2024 में बने पिछले दैनिक रिकॉर्ड से भी ऊपर चला गया. ऑस्ट्रेलिया के आसपास भी कई इलाकों में समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक रहा. न्यू साउथ वेल्स के दक्षिणी तट और तस्मानिया के पूर्वी तथा दक्षिणी तट के पास पानी का तापमान सामान्य से करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा.
कुल मिलाकर, मजबूत अल नीनो, IOD की संभावित दिशा और बढ़ते समुद्री तापमान ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. आने वाले महीनों में इन समुद्री परिस्थितियों का भारत समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर क्या असर पड़ता है, इस पर लगातार नजर रखी जाएगी.