कृषि मंत्री के वादों के बाद भी आंदोलन पर आमादा किसान, पढ़ें गेहूं खरीद दिक्कतों पर इनसाइड स्टोरी
Farmers protest over Wheat procurement issues: गेहूं खरीद में अव्यवस्थाओं के विरोध में किसान महापंचायत ने जोरदार आंदोलन किया है. सैकड़ों की संख्या में जुटे किसानों ने शासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समस्याएं हल नहीं हुईं तो और बड़ा आंदोलन होगा. वहीं, भारतीय किसान संघ बीते कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा है.
तमाम दावों के बावजूद गेहूं खरीद में देरी और मंडियों में अव्यवस्थाओं के साथ ही किसानों के साथ हो रही लूट के विरोध में किसान महापंचायत ने आज जोरदार आंदोलन किया है. किसान महापंचायत ने कहा है कि मध्य प्रदेश में तमाम आदेशों की अवहेलना की जा रही है. बीते दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गेहूं खरीद टारगेट बढ़ाने से लेकर समुचित व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी खरीद को लेकर सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया, लेकिन जमीन पर स्थिति पहले की ही तरह खराब बनी हुई है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते दिन मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में समीक्षा बैठक कर राज्य में गेहूं खरीद की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए और 78 लाख मीट्रिक टन की बजाय 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के निर्देश दिए हैं. खरीद केंद्रों पर बारदाना से लेकर तौल काटें समेत अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी भोपाल आवास से कई जिलों के कलेक्ट्रर के साथ वर्चुअल मीटिंग में गेहूं खरीद को लेकर व्यवस्थाएं मजबूत करने और किसानों को स्लॉट बुकिंग, खरीद समयसीमा बढ़ाने समेत कई निर्देश दिए हैं.
आदेश तो जारी हुए पर जमीन पर अमल नहीं
किसान महापंचायत के मध्य प्रदेश अध्यक्ष राजेश धाकड़ ने किसान इंडिया को बताया कि जिस तरह से केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद को लेकर आदेश जारी किए हैं, उससे लग सकता है कि गेहूं खरीद चौकस तरीके से चल रही है और किसानों को परेशानी नहीं हो रही है. लेकिन असलियत इसके उलट है. उन्होंने कहा कि 3 दिन पहले 24 अप्रैल को रायसेन जिला प्रशासन को संगठन ने ज्ञापन देकर किसानों को हो रही परेशानियों के बारे में अवगत कराया था, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है. किसानों से किए जा रहे वादे और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है.
फसल का पैसा नहीं मिलने से कर्ज और ब्याज में डूब रहे किसान
किसान नेता राजेश धाकड़ ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के किसानों को गेहूं एवं चना खरीदी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि किसानों का गेहूं सोसाइटी में और घर पर पड़ा हुआ है. फसल का पैसा न मिलने से किसान आर्थिक संकट में हैं. बैंक, साहूकार का कर्ज ओवरड्यू हो रहा है और ब्याज लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि चना खरीदी, स्लॉट बुकिंग के लिए तुरंत व्यवस्था करने समयसीमा बढ़ाने के साथ ही खरीद केन्द्रों की संख्या बढ़ाने के संबंध में प्रशासन को ज्ञापन दिया है. वहीं, सोसाइटी स्तर पर आ रही तकनीकी समस्याओं का तुरंत निराकरण कराने की मांग की गई है. इसके अलावा गेंहू की स्लॉट केवल 4 एकड़ तक के किसानों के बुक हो रहे हैं उन्हें बढ़ाने के आदेश के बाद भी जमीन पर यह अमल में नहीं लाया जा सका है.
किसानों की समस्या हल नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी
किसान महापंचायत के जिला अध्यक्ष श्याम सिंह पटेल ने कहा कि रायसेन जिले के बरेली थाना क्षेत्र में स्थित मंडी स्थल पर किसानों ने आज जोरदार प्रदर्शन किया है. पहले एसडीम और प्रशासन ने किसानों को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे रहे थे, लेकिन किसानों को अपनी बात रखने के लिए जुटना पड़ा और जोरदार नारेबाजी के साथ ही प्रशासन को गेहूं, चना, सरसों समेत अन्य खरीफ फसलों की खरीद में हो रही दिक्कतों को दूर करने के लिए ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हल नहीं निकाला जाता है तो आंदोलन बड़ा होगा.
भारतीय किसान संघ का कई दिनों से चल रहा विरोध प्रदर्शन
गौरतलब है कि रायसेन में भारतीय किसान संघ से जुड़े किसान और ग्रामीण बीते कई दिनों से गेहूं खरीद में दिक्कतों को दूर कराने के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. भारतीय किसान संघ के मालवा प्रांत प्रचार प्रमुख गोवर्धन पाटीदार ने बताया कि किसानों की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर एक एक दाना खरीदने का दंभ भरते हैं तो उसे पूरा भी करना चाहिये. इसलिये सभी पंजीकृत 19 लाख किसानों से गेहूं का एक एक दाना खरीदने की व्यवस्था की जाए. दो हेक्टेयर से ऊपर वाले किसानों की खरीदी तुरंत सरकार करे. उन्होंने कहा कि मंडियों और खरीद केंद्रों पर अव्यवस्थाएं हैं उन्हें दूर किया जाए.
गेहूं किसानों के सरकार से सवाल
- सरकार कह रही है कि गेहूं खरीदी का कोटा बढ़ाया गया लेकिन सच क्या है? 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी, जबकि उत्पादन 245 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा होता है. यानी 50% से भी कम खरीदी. जबकि बाकी राज्य जैसे पंजाब में 70% और हरियाणा में 60% खरीदी होती है. फिर मध्य प्रदेश में ज्यादा खरीद क्यों नहीं की जा रही.
- 13 दिनों में सिर्फ 9.5 लाख मीट्रिक टन खरीदी, इस रफ्तार से 100 लाख मीट्रिक टन पूरा करने में 140 दिन लगेंगे. ऐसे तो किसान को मजबूरी में औने-पौने दाम पर अपना गेहूं निजी प्लेयर्स को बेचना पड़ेगा. क्योंकि तब तक उसके पास भंडारण की व्यवस्था नहीं है और मौसम की मार वह झेल नहीं सकता.
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