भारतीय चावल की खेप पर बांग्लादेश ने उठाए सवाल, बचा हुआ माल वापस भेजा.. व्यापारियों में नाराजगी

भारत से बांग्लादेश भेजी गई 11,500 टन नॉन-बासमती उसना चावल की खेप पर गुणवत्ता विवाद खड़ा हो गया है. बांग्लादेश ने खेप का अधिकांश हिस्सा स्वीकार नहीं किया, जबकि भारतीय व्यापारियों ने फैसले के पीछे राजनीतिक कारण होने का दावा किया है. अब बची हुई चावल की खेप भारत वापस लौटाई जा रही है.

नोएडा | Published: 4 Aug, 2026 | 07:49 AM

Rice Export: भारत से बांग्लादेश भेजी गई 11,500 टन नॉन-बासमती उसना चावल की खेप विवादों में घिर गई है. बांग्लादेश ने गुणवत्ता का हवाला देकर पूरी खेप नहीं उतारी और सिर्फ 3,500 टन चावल ही स्वीकार किया. जबकि सरकारी जांच में इस चावल को खाने के लिए सुरक्षित बताया गया था. 23 और 24 जुलाई को चावल का कुछ हिस्सा उतारकर तेजगांव, हलिशाहर, देवानहाट और जॉयदेबपुर के सरकारी भंडारण केंद्रों में भेज दिया गया. वहीं, व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि बांग्लादेश की नई सरकार के आने के बाद इस मामले के पीछे राजनीतिक वजह भी हो सकती है.

25 जुलाई को बांग्लादेश के तेजगांव और हलिशाहर भंडारण केंद्रों के अधिकारियों ने बिजनेसलाइन को कहा कि भारत से आया चावल खराब गुणवत्ता का है और मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं है. इसके बाद इस मामले की जानकारी खाद्य मंत्रालय  के सचिव और खाद्य विभाग के महानिदेशक को दी गई. हालांकि, शिपिंग एजेंट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चावल खराब नहीं है, बल्कि उसका रंग केवल हल्का लाल है. वहीं, भारतीय व्यापारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से बांग्लादेश को चावल निर्यात कर रहे हैं. उनका आरोप है कि पहले पाकिस्तान से महंगा चावल खरीदने के बाद बांग्लादेश ने फिर भारत का रुख किया था, लेकिन अब बिना ठोस कारण भारतीय चावल पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

3,500 टन चावल ही उतारा गया

भारतीय चावल व्यापारियों का कहना है कि बांग्लादेश का यह फैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया हो सकता है. एक व्यापारी ने कहा कि ऐसी स्थिति कुछ समय तक बनी रह सकती है, लेकिन अगर अल नीनो के कारण फसल प्रभावित होती है, तो भविष्य में बांग्लादेश को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘एमवी एचटी पायनियर’ जहाज से भेजी गई 11,500 टन चावल की खेप  में से केवल 3,500 टन चावल ही उतारा गया, जबकि बाकी चावल उतारने की अनुमति नहीं दी गई. व्यापारियों के मुताबिक, अब पूरी बची हुई खेप भारत वापस भेजी जा रही है. यह चावल सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत 2025 में जारी वैश्विक टेंडर के बाद भेजा गया था. भारतीय निर्यातक ने यह चावल एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के स्टॉक से खरीदा था.

व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश

भारतीय चावल कारोबार से जुड़े एक अन्य व्यापारी का दावा है कि यह विवाद बांग्लादेश के खाद्य विभाग में चल रही अंदरूनी खींचतान का नतीजा है. उनके अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार के दौरान कुछ एजेंसियों का खाद्य विभाग में दबदबा था. अब नई सरकार आने के बाद उस व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश हो रही है और इसका असर भारतीय चावल की खेप पर पड़ा है.

13.6 लाख टन नॉन-बासमती चावल निर्यात

आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश को 13.6 लाख टन नॉन-बासमती चावल (अधिकांश उसना चावल) का निर्यात किया, जिसकी कीमत 4,741.5 करोड़ रुपये रही. इससे पहले 2024-25 में 8.09 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत 3,123.3 करोड़ रुपये थी. वहीं, अप्रैल-जून 2026 के दौरान 1.6 लाख टन चावल का निर्यात किया गया, जिसकी कीमत 712.5 करोड़ रुपये रही.

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