बांग्लादेश ने बदला रुख, अब भारत नहीं बल्कि ब्राजील और अमेरिका से आयात कर रहा मक्का, जानें वजह

बांग्लादेश में मक्का की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसका मुख्य कारण वहां का बढ़ता पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन उद्योग है. इन सभी क्षेत्रों में मक्का एक जरूरी पशु आहार के रूप में इस्तेमाल होता है. देश को हर साल लगभग 70 लाख टन मक्का की जरूरत होती है, जिसमें से करीब 15 लाख टन आयात के जरिए पूरा किया जाता है.

नई दिल्ली | Published: 24 Apr, 2026 | 10:37 AM

बांग्लादेश के मक्का (कॉर्न) आयात में हाल के वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पहले जहां भारत इस देश का प्रमुख सप्लायर हुआ करता था, अब धीरे-धीरे उसकी जगह ब्राजील और अमेरिका ले रहे हैं. हाल ही में यूएसडीए की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश अब भारत की बजाय ब्राज़ील और अमेरिका से ज्यादा मक्का खरीद रहा है. यह बदलाव सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कृषि, उद्योग और वैश्विक बाजार की कई वजहें जुड़ी हुई हैं.

भारत से घटा मक्का आयात

लंबे समय तक भारत बांग्लादेश के लिए सबसे आसान और सस्ता विकल्प था. दूरी कम होने के कारण माल जल्दी पहुंचता था और ढुलाई का खर्च भी कम आता था. लेकिन पिछले कुछ समय में भारत में मक्का की मांग तेजी से बढ़ी है, खासकर जैव ईंधन (बायोफ्यूल) के लिए.
इस वजह से भारत के पास निर्यात के लिए मक्का की उपलब्धता कम हो गई और बांग्लादेश को नए विकल्प तलाशने पड़े.

ब्राजील बना सबसे बड़ा सप्लायर

यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केटिंग वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों में बांग्लादेश ने करीब 15 लाख टन मक्का आयात किया.
इसमें से 78 प्रतिशत हिस्सा ब्राजील से आया, जो इसे सबसे बड़ा सप्लायर बनाता है. वहीं अमेरिका और भारत दोनों की हिस्सेदारी करीब 11-11 प्रतिशत रही.

अमेरिका से फिर शुरू हुआ आयात

एक खास बात यह भी है कि बांग्लादेश ने 2018 के बाद पहली बार अमेरिका से मक्का आयात किया है. इस दौरान करीब 1.6 लाख टन मक्का अमेरिका से खरीदा गया. इस बदलाव के पीछे दोनों देशों के बीच हुआ व्यापार समझौता भी अहम भूमिका निभाता है, जिसके तहत बांग्लादेश ने अमेरिकी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ाने पर सहमति दी है.

बढ़ती मांग ने बढ़ाया आयात

बांग्लादेश में मक्का की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसका मुख्य कारण वहां का बढ़ता पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन उद्योग है. इन सभी क्षेत्रों में मक्का एक जरूरी पशु आहार के रूप में इस्तेमाल होता है. देश को हर साल लगभग 70 लाख टन मक्का की जरूरत होती है, जिसमें से करीब 15 लाख टन आयात के जरिए पूरा किया जाता है.

सस्ती कीमतों का असर

वैश्विक बाजार में मक्का की कीमतों में गिरावट भी आयात बढ़ने की एक बड़ी वजह है. कम कीमत का फायदा उठाकर व्यापारी और फीड बनाने वाली कंपनियां ज्यादा मात्रा में मक्का खरीद रही हैं और उसका भंडारण कर रही हैं. इससे आयात में और तेजी आई है.

घरेलू उत्पादन में भी बढ़ोतरी

बांग्लादेश में किसान अब मक्का की खेती की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. इसकी वजह बेहतर कीमत और ज्यादा मुनाफा है. अनुमान है कि अगले साल देश में करीब 59 लाख टन मक्का का उत्पादन हो सकता है, जो पिछले साल से 1.7 प्रतिशत ज्यादा है. किसान मक्का इसलिए भी उगा रहे हैं क्योंकि इसमें लागत कम आती है और मुनाफा अच्छा मिलता है, खासकर धान और सब्जियों के मुकाबले.

बदलता कृषि व्यापार

यह पूरा बदलाव दिखाता है कि अब कृषि व्यापार सिर्फ पड़ोसी देशों पर निर्भर नहीं रहा. वैश्विक बाजार, कीमतें और नीतियां अब ज्यादा प्रभाव डाल रही हैं.बांग्लादेश का ब्राजील और अमेरिका की ओर झुकाव इसी बदलते रुझान का हिस्सा है.

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