बजट 2026-27 में सरकार का बड़ा दांव, चाय उद्योग को मजबूती देने के लिए टी बोर्ड का बजट बढ़ाया

चाय उद्योग पिछले कुछ समय से गंभीर आर्थिक दबाव में है. नीलामी केंद्रों पर चाय की कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे बड़े बागान मालिकों के साथ-साथ छोटे चाय उत्पादक भी परेशान हैं. भारतीय चाय संघ का कहना है कि मौजूदा कीमतें उत्पादन लागत तक नहीं निकाल पा रही हैं. इससे बागानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और मजदूरों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है.

नई दिल्ली | Published: 2 Feb, 2026 | 09:41 AM

Budget 2026 tea sector: यह साल का बजट चाय उद्योग के लिए कई मायनों में खास माना जा रहा है. खासकर उन राज्यों के लिए, जहां चाय सिर्फ एक फसल नहीं बल्कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी है. बजट 2026-27 में टी बोर्ड इंडिया को अब तक की सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है. सरकार ने चाय क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाकर 380 करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 36 प्रतिशत ज्यादा है. यह बढ़ोतरी न सिर्फ कागजों में अहम है, बल्कि जमीन पर काम करने वाले चाय बागानों, मजदूरों और छोटे उत्पादकों के लिए भी उम्मीद की नई किरण लेकर आई है.

चाय बोर्ड को मिला सबसे बड़ा बजट समर्थन

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले सभी कमोडिटी बोर्ड्स में इस बार टी बोर्ड को सबसे ज्यादा बजट मिला है. कॉफी बोर्ड के लिए जहां 285.60 करोड़ रुपये तय किए गए हैं, वहीं रबर बोर्ड को 367.52 करोड़ और मसाला बोर्ड को 156.89 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है. इन सभी के मुकाबले टी बोर्ड को 380 करोड़ रुपये मिलना यह दिखाता है कि सरकार चाय उद्योग को रणनीतिक रूप से कितना अहम मान रही है.

हालांकि, यह भी सच है कि चालू वित्त वर्ष में टी बोर्ड के लिए मूल बजट 771.55 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसके मुकाबले नया आवंटन कम है. इसके बावजूद संशोधित अनुमान के हिसाब से यह बढ़ोतरी काफी अहम मानी जा रही है.

कीमतों की मार से जूझ रहा है चाय उद्योग

चाय उद्योग पिछले कुछ समय से गंभीर आर्थिक दबाव में है. नीलामी केंद्रों पर चाय की कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे बड़े बागान मालिकों के साथ-साथ छोटे चाय उत्पादक भी परेशान हैं. भारतीय चाय संघ का कहना है कि मौजूदा कीमतें उत्पादन लागत तक नहीं निकाल पा रही हैं. इससे बागानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और मजदूरों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है.

उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार को न्यूनतम टिकाऊ मूल्य (मिनिमम सस्टेनेबल प्राइस) जैसे कदमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि चाय उत्पादन लंबे समय तक व्यवहार्य बना रहे.

टी बोर्ड का विकास और शोध पर फोकस

टी बोर्ड का मुख्य काम केवल प्रशासनिक नहीं है, बल्कि चाय उत्पादन की गुणवत्ता सुधारना, खेती का दायरा बढ़ाना, शोध और विकास को बढ़ावा देना और छोटे किसानों को तकनीकी सहायता देना भी इसकी जिम्मेदारी है. बोर्ड चाय की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत करने और निर्यात को बढ़ाने पर भी काम करता है.

नए बजट में मिले अतिरिक्त संसाधनों से उम्मीद की जा रही है कि चाय की गुणवत्ता, बागानों में नई तकनीक और उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.

चाय मजदूरों के लिए राहत: PMCSPY योजना का विस्तार

बजट की एक बड़ी खासियत यह है कि प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना (PMCSPY) को 2026-27 तक बढ़ा दिया गया है. इस योजना को पहले 1,000 करोड़ रुपये के कुल प्रावधान के साथ शुरू किया गया था. इसका मकसद खासतौर पर असम और पश्चिम बंगाल के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों, महिलाओं और बच्चों के जीवन स्तर में सुधार लाना है.

इस योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा. लंबे समय से सामाजिक उपेक्षा झेल रहे चाय मजदूरों के लिए यह योजना एक बड़ी राहत मानी जा रही है.

उत्पादन और निर्यात को लेकर सकारात्मक संकेत

चाय उद्योग को लेकर भविष्य की तस्वीर भी पूरी तरह निराशाजनक नहीं है. उद्योग जगत को उम्मीद है कि 2025 में चाय का उत्पादन और निर्यात दोनों बढ़ेंगे. खासकर ईरान, इराक और चीन जैसे देशों में भारतीय चाय की मांग बढ़ रही है.

आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वर्ष 2024 में करीब 1284.78 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन किया था, जबकि 256.17 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया गया. आने वाले समय में निर्यात में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है.

उम्मीद और चुनौतियों के बीच चाय उद्योग

बजट 2026-27 में टी बोर्ड के लिए बढ़ा हुआ आवंटन यह संकेत देता है कि सरकार चाय उद्योग की चुनौतियों को समझ रही है. हालांकि, सिर्फ बजट बढ़ाना ही काफी नहीं होगा. जरूरत इस बात की है कि यह पैसा सही जगह और सही तरीके से खर्च हो, ताकि किसानों, मजदूरों और पूरे चाय क्षेत्र को इसका वास्तविक लाभ मिल सके.

अगर कीमतों की समस्या, मजदूर कल्याण और निर्यात रणनीति पर संतुलित तरीके से काम हुआ, तो भारतीय चाय उद्योग एक बार फिर मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है.

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