रेट में गिरावट से कोको किसानों को नुकसान, उड़द-मूंग की खरीदी के लिए तैयारी शुरू.. मौजूदा भाव MSP से कम

एलुरु जिले में मूंग और उड़द किसानों के लिए प्राइस सपोर्ट स्कीम से राहत आई है, एमएसपी के तहत फसल खरीद शुरू होगी. वहीं, कोको किसानों को बाजार में कीमत गिरने और बढ़ती लागत के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. अधिकारियों ने किसानों को गुणवत्ता मानक के अनुसार फसल तैयार करने की सलाह दी है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 11 Mar, 2026 | 02:09 PM

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में कोको किसानों को कीमत में गिरावट आने से जहां आर्थिक नुकसान का समना करना पड़ रहा है, वहीं मूंग और उड़द किसानों को सरकार ने बहुत बड़ी खुशखबरी दी है. प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत जिले में मूंग और उड़द की खरीद के लिए एजेंसियों और तय एफएक्यू (फेयर एवरेज क्वालिटी) मानकों को अंतिम रूप दिया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले मूंग की खेती 16,933 एकड़ में होती है और इसमें 7,128 किसान शामिल हैं. औसत पैदावार 478.57 किलोग्राम प्रति एकड़ है, जिससे कुल अनुमानित उत्पादन 81,035 क्विंटल है. अभी लगभग 1,230 मीट्रिक टन की खरीद का लक्ष्य तय किया गया है. एमएसपी 8,768 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि स्थानीय बाजार में कीमत लगभग 7,500 रुपये प्रति क्विंटल है. कुल मिलाकर पांच खरीद एजेंसियां इस योजना में शामिल हैं.

वहीं, उड़द की खेती 23,813 एकड़ में होती है और इसमें 16,777 किसान शामिल हैं. औसत पैदावार 462.2 किलोग्राम प्रति एकड़ है, जिससे कुल अनुमानित उत्पादन 1,10,064 क्विंटल है. खरीद का अनुमानित लक्ष्य 12,777 मीट्रिक टन तय किया गया है. एमएसपी 7,400 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि स्थानीय बाजार में कीमत 8,500 रुपये प्रति क्विंटल है. उड़द की खरीद  के लिए आठ एजेंसियों को चुना गया है.

दलहन खरीदी को लेकर क्या है मानक

अधिकारियों ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि खरीद पूरी तरह से एफएक्यू (FAQ) ग्रेड मानकों के अनुसार की जाएगी. अधिकतम स्वीकार्य मानक इस प्रकार हैं: 2 फीसदी विदेशी पदार्थ, 3 फीसदी मिश्रण, 3 फीसदी क्षतिग्रस्त दाल, 4 फीसदी हल्का क्षतिग्रस्त दाल, 3 फीसदी अधपका और सिकुड़ा हुआ दाल, 4 फीसदी कीट प्रभावित दाल और 12 फीसदी नमी. अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल को खरीद  केंद्रों पर लाने से पहले तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयार करें, ताकि फसल अस्वीकृत न हो.

पंजीकृत कराएं और खरीद सुविधा का लाभ उठाएं

पेडापाडु, एलुरु, डेंदुलुरु, मुदिनेपल्ली, मंडवली, कैकालुरु और कालिदिंडी मंडलों में फसल दर्ज कराने वाले किसानों से कहा गया है कि वे गुरुवार से अपने नजदीकी रथु सेवा केंद्रों में CMAPP के माध्यम से अपना नाम पंजीकृत कराएं और खरीद सुविधा का लाभ उठाएं. एलुरु जिले के संयुक्त कलेक्टर अभिषेक गौड़ ने कहा कि नमी का स्तर 12 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए और किसानों को सुनिश्चित करना होगा कि उनकी फसल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार हो. उन्होंने किसानों से अपील की कि इस अवसर का फायदा उठाएं और जिले में स्थापित खरीद केंद्रों पर अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेचें.

आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है

अगर बात कोको  की करें तो एलुरु जिले में कीमतों में तेज गिरावट के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. कभी लाभकारी मानी जाने वाली कोको की खेती अब चिंता का कारण बन गई है, क्योंकि बाजार में कीमतें इतनी गिर गई हैं कि उत्पादन लागत निकलना भी किसानों के लिए मुश्किल हो गया है. कई मंडलों के किसान सालों से नारियल और अन्य फसलों के साथ कोको को इंटरक्रॉप के रूप में उगाते रहे हैं. पहले खरीदारों और चॉकलेट निर्माताओं द्वारा आकर्षक कीमतें मिलने के कारण कई किसानों ने अपनी खेती बढ़ाई थी, ताकि स्थिर आय मिल सके. लेकिन अचानक कीमतों में आई गिरावट ने उन्हें निवेश की पूर्ति करने में मुश्किल में डाल दिया है और वे अब कोको की खेती जारी रखने की संभावना पर सवाल उठा रहे हैं.

कीमतों के कारण खेती का खर्च काफी बढ़ गया है

किसानों का कहना है कि उर्वरक और मजदूरी की बढ़ी कीमतों के कारण खेती का खर्च काफी बढ़ गया है. इतने खर्च के बावजूद, कोको बीन्स की वर्तमान बाजार कीमत उनकी लागत भी पूरी नहीं कर पा रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. इसके अलावा, किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि कीट, रोग और असमान मौसम की वजह से फसल भी खराब हो रही है. मौसम के बदलाव, अनियोजित बारिश और अत्यधिक गर्मी ने कई इलाकों में कोको बीन्स की पैदावार और गुणवत्ता दोनों को कम कर दिया है. खराब फसल और गिरती कीमतों ने कई किसानों की स्थिति और भी कमजोर कर दी है.

 

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Published: 11 Mar, 2026 | 02:03 PM
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