नई कपास की आवक शुरू, कई राज्यों में MSP से ऊपर भाव.. आगे भी तेजी की उम्मीद

Cotton MSP: भारत में नई कपास की आवक शुरू हो गई है और कर्नाटक, गुजरात समेत कई राज्यों में भाव MSP से ऊपर चल रहे हैं. रायचूर की मंडियों में कच्चे कपास का भाव 9,200-9,500 रुपये प्रति क्विंटल तक है. 2026-27 सीजन के लिए मध्यम रेशे वाली कपास का MSP 8,267 रुपये और लंबे रेशे वाली कपास का MSP 8,667 रुपये है.

नोएडा | Published: 5 Sep, 2026 | 10:25 AM

Cotton Price: दुनियाभर के बाजार में कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत में नई खरीफ कपास की आवक शुरू हो गई है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ इलाकों में किसान नई फसल लेकर मंडियों में पहुंचने लगे हैं. शुरुआती दौर में कई जगह कच्चे कपास के भाव सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर बने हुए हैं. इससे कपास किसानों को इस सीजन की शुरुआत में अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है.

रायचूर समेत इन मंडियों में 9,200-9,500 रुपये क्विंटल भाव

कर्नाटक के रायचूर, बेल्लारी, आदोनी और येम्मिगनूर जैसे प्रमुख बाजारों में नई कपास की कीमत करीब 9,200 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही है. कपास की कीमत उसकी नमी के हिसाब से तय की जा रही है. यानी जिस कपास में नमी कम और क्वालिटी बेहतर होगी, उसे अच्छा भाव मिलने की संभावना है. जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के मौजूदा रुझान को देखते हुए कपास के दाम आगे भी MSP से ऊपर रह सकते हैं. हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने से किसानों को बिक्री का फैसला सोच-समझकर करना होगा.

सरकार ने कितना तय किया है MSP?

केंद्र सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए कपास का MSP तय कर रखा है. मध्यम रेशे वाली कपास का MSP 8,267 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाली कपास का MSP 8,667 रुपये प्रति क्विंटल है. इसके मुकाबले रायचूर की मंडियों में मिल रहा भाव फिलहाल काफी ऊपर है. अगर बाजार में मांग बनी रहती है तो किसानों को MSP से बेहतर कीमत मिलने का फायदा हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के भाव गिरे

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में कुछ कमजोरी देखने को मिली है. ICE कॉटन फ्यूचर्स करीब 87 सेंट प्रति पाउंड पर चल रहा है, जबकि मंगलवार को यह करीब 93 सेंट था. अंतरराष्ट्रीय भाव में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है. बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कपास खरीद भाव में करीब 2,000 रुपये प्रति कैंडी यानी 356 किलो की कमी की है. हालांकि भारतीय कपास निगम (CCI) ने अपने भाव में कोई बदलाव नहीं किया है.

सूत की मांग कमजोर, मिलें खरीदारी से बच रहीं

कपास बाजार में इस समय एक बड़ी चिंता यार्न यानी सूत की कमजोर मांग है. ऊंचे भाव पर सूत खरीदने वाले ग्राहक कम हैं. इसके अलावा कई कपड़ा मिलों के पास पहले से ही कपास का स्टॉक मौजूद है. इसी वजह से मिलें फिलहाल बड़ी मात्रा में नई कपास खरीदने के बजाय बाजार की दिशा पर नजर रख रही हैं. अगर आने वाले दिनों में यार्न की मांग बढ़ती है, तो इसका सीधा फायदा कपास की खरीदारी और कीमतों पर पड़ सकता है.

गुजरात में भी शुरू हुई नई फसल की आवक

गुजरात के कुछ हिस्सों में भी नई कपास की आवक छोटी मात्रा में शुरू हो गई है. राजकोट में कपास का भाव करीब 1,900 से 2,000 रुपये प्रति मन यानी 20 किलो के आसपास बताया जा रहा है. इस साल कपास की बुवाई में देरी हुई है. इसका असर नई फसल की आवक पर भी पड़ा है और आवक करीब एक महीने पीछे चल रही है. अभी देशभर में नई कपास की साप्ताहिक आवक करीब 50,000 गांठ है. एक गांठ का वजन करीब 170 किलो होता है. अगले दो हफ्तों में आवक बढ़कर करीब 1 लाख गांठ प्रति सप्ताह होने की उम्मीद है.

कपास की फसल के लिए बारिश जरूरी

इस समय कपास की फसल के लिए बारिश काफी अहम है. अगर आने वाले दिनों में एक-दो दौर की अच्छी बारिश होती है, तो इससे फसल की बढ़वार और पैदावार को फायदा मिल सकता है. कृषि मंत्रालय के 4 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 109.17 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है. पिछले साल इसी समय यह रकबा 109.87 लाख हेक्टेयर था. यानी इस साल कपास का बुवाई क्षेत्र थोड़ा कम है. फिलहाल किसानों के लिए अच्छी बात यह है कि शुरुआती आवक में कई मंडियों में भाव MSP से ऊपर बने हुए हैं. आने वाले दिनों में नई फसल की आवक और सूत की मांग बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.

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