दालों के संकट की वजह बनेगा अल नीनो? कीमतों में उछाल और स्टॉक पर सरकार का आया बयान
अल नीनो की वजह से सूखे कम मॉनसूनी बारिश का पहले ही अनुमान जताया गया है. ऐसे में दालों के उत्पादन घटने और खपत बढ़ने पर कीमतों में भारी उछाल की आशंकाएं जताई गई हैं. बीते एक माह में चने की कीमतों में भारी तेजी देखी गई है. ऐसे में दालों की कीमतों, स्टॉक को लेकर अब सरकार का बयान आया है.
अल नीनो के असर से दालों का उत्पादन कम होने और कीमतों में उछाल को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं. बीते एक महीने में चना दाल का भाव 9 फीसदी चढ़ गया है. जबकि साप्ताहिक आधार पर 2.5 फीसदी से अधिक उछाल दर्ज किया गया है. इसी तरह अन्य दालों की कीमतें भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, सरकार ने ऐसी आशंकाओं पर विराम लगाते हुए कहा है कि दालों के भरपूर बफर स्टॉक से ऐसी स्थितियों पर लगाम लगाई जाएगी और सरकार के पास स्टॉक में जरूरत से दोगुनी दालें मौजूद हैं.
दालों का रिकॉर्ड बफर स्टॉक – उपभोक्ता मामलों के सचिव
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने FICCI के एक कार्यक्रम के बाद गुरुवार को PTI से बात करते हुए कहा कि दालों का रिकॉर्ड बफर स्टॉक मौजूद है, जो अल नीनो से बचाव का काम करेगा. उन्होंने कहा कि सरकार के पास दालों का कुल 43 लाख टन का रिकॉर्ड बफर स्टॉक है, वह अल नीनो मौसम की घटना के कारण आपूर्ति में किसी भी रुकावट या कीमतों में अचानक उछाल के खिलाफ एक रणनीतिक सुरक्षा कवच का काम करेगा.
बीते दो सालों के स्टॉक से दोगुना दालें मौजूद
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि हमें अभी दालों के स्टॉक को बेचने की जरूरत नहीं है. अगर अल नीनो का असर होता है और इससे खरीफ सीजन की बुवाई प्रभावित होती है, तो दालों के इस बफर स्टॉक का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकारी आंकड़ों के अनुसार दालों का मौजूदा बफर स्टॉक मई 2025 में रखे गए 18 लाख टन से दोगुने से भी ज्यादा है. मई 2024 में दर्ज किए गए 21 लाख टन से काफी ज्यादा है. कुल 43 लाख टन का रिकॉर्ड बफर स्टॉक है.
दालों को 3 साल तक स्टोर करने की क्षमता
इस भारी बढ़ोतरी की मुख्य वजह केंद्र सरकार की सुनिश्चित खरीद नीति है. यह नीति घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने और उपभोक्ताओं को कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए शुरू की गई थी. अधिकारी ने दालों के भंडारण और निपटान को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि दालें खराब न होने वाली चीजें हैं और इन्हें दो से तीन साल तक सुरक्षित रूप से भंडारित किया जा सकता है.
कृषि उत्पादन को प्रभावित करेगा कम मॉनसूनी बारिश का अनुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) के सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया है और आने वाले महीनों में अल नीनो के विकसित होने की संभावना भी जताई है. कृषि मंत्रालय ने खरीफ (गर्मी) की फसलों पर इस घटना के असर को कम करने के लिए पहले से ही आपातकालीन योजनाएं बनाना शुरू कर दिया है.
दालों की कीमतों पर दिखेगा अल नीनो का असर
इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) ने जारी बयान में कहा है कि इस बार केंद्रीय पूल में कुल उत्पादन का 16 फीसदी अधिक सरकारी खरीद की गई है. इससे 21 लाख टन दालें बाजार से उठकर सरकारी स्टॉक में पहुंच गई हैं. ऐसे में बीते एक माह के दौरान अकेले चना दाल का भाव 9 फीसदी बढ़ गया है. जबकि, सालाना आधार पर भाव में 4 फीसदी से अधिक बढ़त दर्ज की गई है. एक्सपर्ट ने चिंता जताई है कि अगर अल नीनो का प्रभाव रहा तो इन कीमतों और उछाल देखा जा सकता है.