यूरोपीय संघ ने चीन को दिया झटका, राइस फ्लोर की खेप लौटाई.. जांच में मिले GMO तत्व
यूरोपीय संघ (EU) ने GMO मिलने पर चीन से आई राइस फ्लोर की खेप खारिज कर दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब चीन भारत के गैर-बासमती चावल की खेपों में GMO होने का दावा कर रहा है. व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में GM चावल की व्यावसायिक खेती नहीं होती, इसलिए ऐसे आरोपों पर सवाल उठ रहे हैं.
यूरोपीय संघ (EU) ने चीन से भेजी गई चावल के आटे (राइस फ्लोर) की एक खेप को खारिज कर दिया है. जांच के दौरान इसमें GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म) के तत्व पाए गए. यूरोपीय संघ की खाद्य सुरक्षा निगरानी प्रणाली RASFF के मुताबिक, यह खेप नीदरलैंड में जांच के दौरान पकड़ी गई थी और इसे अनाज व बेकरी उत्पादों के इस्तेमाल के लिए यूरोप भेजा गया था.
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब चीन भारत के गैर-बासमती चावल की कई खेपों को यह कहकर लौटा रहा है कि उनमें GMO मौजूद है. जबकि भारत में GMO चावल की व्यावसायिक खेती नहीं होती. यूरोपीय संघ के मुताबिक, नीदरलैंड में जांच के दौरान चावल के आटे की खेप में 35S प्रमोटर और T-Nos नाम के आनुवंशिक तत्व (Genetic Elements) पाए गए. ये दोनों तत्व आमतौर पर जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इसके बाद इस खेप को संभावित जोखिम मानते हुए खारिज कर दिया गया.
70 गैर-बासमती चावल की खेपों को लौटा दिया
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में चीन ने भारत से भेजी गई करीब 70 गैर-बासमती चावल की खेपों को भी यह कहते हुए लौटा दिया था कि उनमें GMO मौजूद है. खास बात यह है कि इन खेपों को भारत में मौजूद चीन की अधिकृत जांच एजेंसी पहले ही मंजूरी दे चुकी थी. इस घटना के बाद उद्योग जगत में यह आशंका जताई जा रही है कि चीन, भारत के खिलाफ व्यापारिक दबाव (ट्रेड वॉर) बनाने की कोशिश कर रहा है.
चीन के शोधकर्ताओं की एक टीम के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) पहले भी चीन से भेजे गए राइस नूडल्स और ब्लैक राइस फ्लोर की कुछ खेपों को GMO से जुड़े कारणों के चलते खारिज कर चुका है. नानजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने अपनी एक स्टडी में कहा कि चीन से यूरोप भेजे जाने वाले चावल आधारित उत्पादों को लंबे समय से तकनीकी व्यापार नियमों (Technical Trade Barriers) का सामना करना पड़ रहा है.
दुनिया में चीन के उत्पादों का निर्यात बढ़ा
अध्ययन के मुताबिक, 2001 से 2017 के बीच GMO से जुड़े मामलों के कारण यूरोपीय संघ की जांच प्रणाली (RASFF) का चीन के चावल आधारित उत्पादों के निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ा. इस दौरान दुनिया में चीन के इन उत्पादों का कुल निर्यात बढ़ा, लेकिन यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात लगातार घटता गया. रिपोर्ट के अनुसार, EU को चीन के चावल आधारित उत्पादों का निर्यात 2001 में 61.6 लाख डॉलर से घटकर 2017 में 47.7 लाख डॉलर रह गया.
GMO तत्व मिलने के कई मामले दर्ज
अध्ययन में कहा गया है कि 2006 से यूरोपीय संघ की RASFF प्रणाली चीन से निर्यात होने वाले चावल आधारित उत्पादों में बिना मंजूरी वाले GMO तत्व मिलने के कई मामले दर्ज कर चुकी है. इसी वजह से यूरोप को चीन के चावल आधारित उत्पादों के निर्यात में RASFF एक बड़ी तकनीकी बाधा बन गई है. वहीं, व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि जब चीन के अपने चावल आधारित उत्पादों में GMO मिलने के मामले सामने आ चुके हैं, तब भारत पर GMO का आरोप लगाना उचित नहीं है. उनका कहना है कि भारत में GM चावल की व्यावसायिक खेती नहीं होती, इसलिए भारतीय गैर-बासमती चावल पर ऐसे आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है.