Rice Production: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि भारत 2025 में 1501.8 लाख टन चावल का उत्पादन करके दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया. चीन का उत्पादन 1452.8 लाख टन रहा. यह भारत की कृषि में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. मंत्री ने कहा कि पंजाब के अनुभव से उभरते हुए चावल उत्पादक राज्यों को सीख लेनी चाहिए. चौहान ने बताया कि अब हमारे गोदाम पूरी तरह भर चुके हैं और हम दूसरों पर निर्भर नहीं हैं. आज भारत दुनिया को चावल सप्लाई करने वाला देश बन गया है. उन्होंने वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों से कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाने में पूरी मेहनत करनी हमारी जिम्मेदारी है.
वहीं, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसाल ने एक विशेष इंटरव्यू में इस उपलब्धि का जश्न मनाते हुए कहा कि यह गर्व की बात है, लेकिन इसके पर्यावरणीय खर्चों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत भी है. डॉ. गोसाल ने कहा कि सरकार पंजाब की सफलता को पूर्वी भारत में दोहराने की कोशिश कर रही है और इसके लिए ‘पूर्वी भारत में हरित क्रांति’ अभियान शुरू किया गया है. इसका लक्ष्य असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओड़िशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कृषि को बढ़ावा देना है.
यह पैटर्न अन्य राज्यों में भी दोहराया जा सकता है
उन्होंने बताया कि इन राज्यों में कृषि को प्रोत्साहन, सब्सिडी और उच्च गुणवत्ता खाद के जरिए बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि चावल आधारित खेती में आने वाली चुनौतियों को दूर किया जा सके. पंजाब को ‘राष्ट्रीय कृषि प्रयोगशाला’ बताते हुए गोसाल ने चेतावनी दी कि नई तकनीक पहले पंजाब में टेस्ट होती हैं. राज्य पहले ही घटते जल स्तर और पराली जलाने जैसी समस्याओं का सामना कर चुका है और यह पैटर्न अन्य राज्यों में भी दोहराया जा सकता है.
उच्च उपज देने वाली चावल की किस्मों का इस्तेमाल
भारत में रिकॉर्ड उत्पादन का एक कारण कम अवधि में पकने वाली और उच्च उपज देने वाली चावल की किस्मों का इस्तेमाल भी है. उदाहरण के लिए, PB126 123 दिनों में पक जाती है, रोग प्रतिरोधी है और कम पानी में भी उगाई जा सकती है. PR131 और PB121 भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय हो रही हैं. इन किस्मों से उत्पादन बढ़ता है और पानी की मांग कम होती है.पंजाब कृषि विश्वविद्यालय अब बाढ़-प्रतिरोधी चावल की किस्में विकसित कर रहा है, जो पूर्वी भारत के बाढ़-प्रवण इलाकों में खेती में मदद करेंगी. डॉ. गोसाल के अनुसार, ये नवाचार उत्पादकता बनाए रखने के साथ-साथ जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने में भी मदद करेंगे.