हो जाएं तैयार! कमजोर मॉनसून बढ़ाएगा खाद्य महंगाई, आपकी जेब पर बढ़ सकता है बोझ

कमजोर मॉनसून, अल नीनो और सब्जियों की बढ़ती कीमतों से देश में खाद्य महंगाई फिर बढ़ने की आशंका है. अक्यूट रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक प्याज के दाम जून-जुलाई में 25 फीसदी बढ़े हैं. कम बारिश, महंगी खाद्य वस्तुएं और बढ़ती लागत के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है.

नोएडा | Published: 25 Jul, 2026 | 02:14 PM

देश में एक बार फिर खाद्य महंगाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. कमजोर मॉनसून, मौसम की मार और सब्जियों की बढ़ती कीमतों, खासकर प्याज के महंगे होने से आने वाले महीनों में लोगों की रसोई का बजट बिगड़ सकता है. अक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च की जुलाई 2026 की रिपोर्ट में खाद्य महंगाई के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो, भीषण गर्मी और सामान्य से कम बारिश के कारण पिछले दो महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. थोक खाद्य महंगाई खुदरा महंगाई की तुलना में तेजी से बढ़ रही है. इसका मतलब है कि उत्पादन और सप्लाई की बढ़ी लागत आने वाले समय में उपभोक्ताओं तक पहुंच सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जून-जुलाई 2026 के दौरान प्याज की कीमतों  में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. खराब मौसम के कारण सप्लाई प्रभावित होने से यह तेजी आई है. प्याज के अलावा दूसरी सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं, जिससे खाद्य महंगाई पर और दबाव बढ़ने की आशंका है. अक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक पड़ी गर्मी और कमजोर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वजह से फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है. इससे सब्जियों और अन्य खाद्य वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है और थोक बाजार में कीमतें बढ़ने लगी हैं.

बारिश करीब 10 फीसदी कम रह सकती है

रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉनसून की कमी भारत में महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई है. 20 जुलाई तक देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश सामान्य से 23 फीसदी कम रही. वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि पूरे मॉनसून सीजन  में बारिश करीब 10 फीसदी कम रह सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी सबसे ज्यादा है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. इसके अलावा, देश के करीब 60 फीसदी जिलों में अब तक सामान्य से कम या बहुत कम बारिश हुई है. इससे साफ है कि खेती पर संकट केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बड़े हिस्से में फसलों पर असर पड़ सकता है.

खरीफ फसलों की बुवाई में सुधार हुआ

अक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में खरीफ फसलों की बुवाई  में सुधार हुआ है. जुलाई के मध्य तक बुवाई का अंतर पिछले साल के मुकाबले करीब 16 फीसदी से घटकर 6 फीसदी रह गया है. हालांकि, जलाशयों में पानी का स्तर कुछ बढ़ने के बावजूद अभी भी पिछले कई वर्षों के मुकाबले काफी कम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बुवाई में सुधार और जलाशयों में बढ़ा पानी कुछ राहत जरूर देता है, लेकिन इससे फसल उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को लेकर बनी चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.

2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान

इन्हीं जोखिमों को देखते हुए अक्यूट ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 5.1 फीसदी पर बरकरार रखा है. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मॉनसून, खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी से आयात महंगा होने जैसे कारणों से आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है.

 

Topics: