प्याज किसानों को बड़ा झटका, लागत से आधा मिला भाव.. MSP तय करने की उठी मांग
महाराष्ट्र में किसानों को मार्च से मई 2026 के दौरान प्याज का भाव सिर्फ 900-1,150 रुपये प्रति क्विंटल मिला, जबकि लागत इससे कहीं अधिक बताई जा रही है. किसान MSP या 3,000 रुपये प्रति क्विंटल खरीद की मांग कर रहे हैं. सरकार ने PSF के तहत खरीद, निर्यात और बफर स्टॉक की स्थिति भी लोकसभा में बताई.
Onion Mandi Rate: महाराष्ट्र के किसानों को इस साल मार्च से मई 2026 के दौरान प्याज की कीमत काफी कम मिली. केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि इस अवधि में किसानों को 900 से 1,150 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला. किसान संगठनों का कहना है कि यह कीमत प्याज की उत्पादन लागत से भी कम है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. वहीं, अब किसानों की ओर से प्याज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की मांग की गई है.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले के अनुसार, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, कटाई, पैकिंग और ढुलाई समेत 100 किलो प्याज उगाने की लागत 1,800 से 2,200 रुपये तक आती है. उन्होंने कहा कि 900 से 1,150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर प्याज बेचने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. इसलिए किसान संगठन सरकार से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद या फिर बाजार भाव और लागत के बीच का अंतर भरने के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
महाराष्ट्र में 1.51 करोड़ टन प्याज उत्पादन
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है. अकेले राज्य की हिस्सेदारी देश के कुल प्याज उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक है. कृषि मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में देश में 3.07 करोड़ टन प्याज उत्पादन का अनुमान है, जिसमें से 1.51 करोड़ टन उत्पादन अकेले महाराष्ट्र से होने की उम्मीद है.
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प्याज पर MSP लागू करने की मांग
किसानों की ओर से प्याज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है. लोकसभा में दिए जवाब में कृषि मंत्रालय ने कहा कि जिन फसलों पर MSP नहीं होता, उनके लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) लागू की जा सकती है. यह योजना तब लागू होती है, जब बाजार भाव सामान्य वर्ष की तुलना में कम से कम 10 फीसदी गिर जाए और कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे चली जाएं.
हालांकि, इस योजना के तहत खरीद तभी की जाती है, जब राज्य सरकार इसकी मांग करे और खरीद में होने वाले नुकसान का 50 फीसदी हिस्सा वहन करने के लिए तैयार हो. सरकार ने यह भी बताया कि प्याज की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत बफर स्टॉक भी बनाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में प्याज की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके.
2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने बताया कि 2025-26 में प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत 2.87 लाख टन प्याज की खरीद की गई थी. वहीं, 2026-27 सीजन के लिए सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है. इसमें से अब तक 37 हजार टन प्याज की खरीद हो चुकी है. लोकसभा में सरकार ने यह भी साफ किया कि 1 अप्रैल 2025 से प्याज के निर्यात पर कोई निर्यात शुल्क (Export Duty), न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) या अन्य प्रतिबंध लागू नहीं है. सरकार के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में प्याज का निर्यात बढ़ा है. 2025-26 में भारत ने 15.5 लाख टन प्याज का निर्यात किया, जबकि 2024-25 में यह 11.5 लाख टन था. हालांकि, यह आंकड़ा 2022-23 के 25.3 लाख टन के रिकॉर्ड निर्यात से अभी भी काफी कम है.