अवैध तस्करी ने तोड़ी तंबाकू किसानों की कमर, टैक्स राहत की उठी मांग

घरेलू समस्याओं के साथ-साथ भारतीय तंबाकू निर्यात भी दबाव में है. जिम्बाब्वे, तंजानिया, जाम्बिया, मोजाम्बिक और मलावी जैसे अफ्रीकी देश कम श्रम लागत और आक्रामक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं.

नई दिल्ली | Published: 14 Jan, 2026 | 10:22 AM

Tobacco Farmers Crisis: देश के कई हिस्सों में तंबाकू की खेती करने वाले किसान इन दिनों गहरी चिंता में हैं. एक ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं, तो दूसरी ओर देश के भीतर अवैध और तस्करी वाले सिगरेट की बाढ़ ने उनकी आमदनी पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है. किसान संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो तंबाकू खेती से जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है.

टैक्स बढ़ा, वैध सिगरेट महंगी हुई

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स में लगातार बढ़ोतरी हुई है. GST के बाद भी उत्पाद शुल्क और नेशनल कैलैमिटी कंटिन्जेंट ड्यूटी (NCCD) को लागू रखा गया, जिससे वैध सिगरेट की कीमतें तेजी से बढ़ीं. वर्तमान में सिगरेट पर टैक्स की दर उसकी लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक पहुंच चुकी है. इसका नतीजा यह हुआ कि बाजार में एक वैध सिगरेट पैक करीब 300 से 340 रुपये तक बिक रहा है, जबकि तस्करी से आने वाला सिगरेट पैक 50 रुपये में आसानी से उपलब्ध है.

तस्करी को मिल रहा बढ़ावा

किसानों और उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि टैक्स का यह असंतुलन तस्करी को बढ़ावा दे रहा है. भारत पहले ही दुनिया के चौथे सबसे बड़े अवैध सिगरेट बाजारों में शामिल हो चुका है. अनुमान है कि देश में कुल सिगरेट खपत का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा अवैध सिगरेट का है. इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा.

किसानों की आवाज तंबाकू बोर्ड तक पहुंची

तंबाकू बोर्ड के चेयरमैन यशवंत कुमार चिडिपोथु ने बताया कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों से किसानों के कई ज्ञापन उन्हें मिले हैं. किसानों की मांग है कि कच्चे तंबाकू पत्ते पर टैक्स राहत बहाल की जाए और सिगरेट पर टैक्स को राजस्व-तटस्थ स्तर पर लाया जाए. बोर्ड ने यह मुद्दा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के सामने भी रखा है और बजट से पहले किसानों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली ले जाने की तैयारी है.

निर्यात मोर्चे पर भी दबाव

घरेलू समस्याओं के साथ-साथ भारतीय तंबाकू निर्यात भी दबाव में है. जिम्बाब्वे, तंजानिया, जाम्बिया, मोजाम्बिक और मलावी जैसे अफ्रीकी देश कम श्रम लागत और आक्रामक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं. यदि भारत में टैक्स की वजह से तंबाकू महंगा होता गया, तो वैश्विक बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धा और कमजोर पड़ सकती है.

किसान संगठनों की चेतावनी

ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस फेडरेशन (FAIFA) ने चेताया है कि हालिया टैक्स नीति किसानों की आय को नुकसान पहुंचा सकती है. संगठन के अध्यक्ष मुरली बाबू का कहना है कि सरकार ने पहले टैक्स सुधार को राजस्व-तटस्थ रखने का भरोसा दिया था, लेकिन अब अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी ने किसानों की उम्मीद तोड़ दी है. FAIFA के मुताबिक फ्ल्यू-क्योरड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू पर टैक्स का बोझ बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू की तुलना में कई गुना ज्यादा है, जिससे असमानता बढ़ रही है.

खेती और रोजगार पर असर

आंकड़े बताते हैं कि बीते एक दशक में FCV तंबाकू की खेती का रकबा काफी घटा है. 2013-14 में जहां खेती का क्षेत्रफल 2.21 लाख हेक्टेयर था, वहीं 2020-21 में यह घटकर 1.22 लाख हेक्टेयर रह गया. इससे ग्रामीण इलाकों में करीब 3.5 करोड़ लोगों का रोजगार खत्म होने का अनुमान है. बढ़ती खाद और मजदूरी लागत ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है.

सरकार से राहत की उम्मीद

किसानों का कहना है कि तंबाकू सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की रोजी-रोटी है. यदि टैक्स नीति में संतुलन नहीं लाया गया और तस्करी पर सख्ती नहीं हुई, तो इसका असर खेती, निर्यात और सरकारी राजस्व तीनों पर पड़ेगा. किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले बजट में सरकार उनकी मुश्किलों को समझेगी और राहत के ठोस कदम उठाएगी.

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