महंगी हुई हरी इलायची, विदेशों से घटे ऑर्डर..कमजोर मॉनसून से उत्पादन पर भी मंडराया संकट

Green Cardamom Export: भारत से हरी इलायची के निर्यात पर बढ़ती कीमतों का असर दिखने लगा है. ऊंचे दामों के कारण विदेशी खरीदार बड़े ऑर्डर देने से बच रहे हैं और नई फसल की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं. वहीं कमजोर मॉनसून, कीटों के प्रकोप और उत्पादन में संभावित गिरावट से बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है.

नोएडा | Updated On: 3 Aug, 2026 | 02:39 PM

Cardamom Export India: भारत से निर्यात होने वाली हरी इलायची (ग्रीन कार्डमम) इन दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगी हो गई है. घरेलू बाजार में कीमतें लगातार बढ़ने का असर अब निर्यात पर भी साफ दिखाई दे रहा है. विदेशी खरीदार फिलहाल बड़े ऑर्डर देने से बच रहे हैं और नई फसल की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी ओर, कमजोर मॉनसून और कीटों के बढ़ते प्रकोप ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर मौसम में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में उत्पादन और कीमतों दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है.

ऊंची कीमतों से निर्यात की रफ्तार धीमी

इलायची निर्यात से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि, इस समय विदेशी आयातक बड़ी मात्रा में खरीदारी करने से बच रहे हैं. बोडीनायकनूर के इलायची निर्यातक एसकेएम धनवंतन ने बिजनेस लाइन को बताया कि, वे फिलहाल जरूरत के हिसाब से ही कम मात्रा में इलायची खरीद रहे हैं. आयातक यह देखना चाहते हैं कि अगस्त और आने वाले महीनों में मॉनसून कैसा रहता है और नई फसल का उत्पादन कितना होता है. अगर उत्पादन बढ़ता है तो कीमतों में कुछ कमी आ सकती है. इसी उम्मीद में कई खरीदार फिलहाल बड़े ऑर्डर रोककर बैठे हैं.

मांग बनी हुई है, लेकिन खरीदार कर रहे इंतजार

भारतीय प्रीमियम हरी इलायची की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग आज भी मजबूत है. समस्या मांग की नहीं, बल्कि ऊंची कीमतों की है. विदेशी खरीदार चाहते हैं कि कीमतें कुछ स्थिर हों, ताकि वे बड़े स्तर पर खरीदारी कर सकें. इसलिए फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल बना हुआ है.

घरेलू बाजार में भी दिख रहा असर

महंगी इलायची का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं है. देश के घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतें बढ़ने से खरीदारी का तरीका बदल गया है. पहले जहां व्यापारी और उपभोक्ता बड़ी मात्रा में खरीदारी करते थे, वहीं अब अधिकतर लोग छोटे पैक खरीदना पसंद कर रहे हैं. इस समय बाजार में हरी इलायची की कीमत 3,000 से 3,300 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है. कुछ समय पहले तक यही कीमत 2,700 से 2,900 रुपये प्रति किलो के आसपास थी.

कमजोर मॉनसून से फसल को नुकसान

इलायची उत्पादक किसानों के लिए इस बार मौसम सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है. जून और जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण नई फसल को नुकसान पहुंचा है. कई इलाकों में पौधों पर फल कम आए हैं और जो फल बने भी, उनमें से कई समय से पहले झड़ गए. किसानों के अनुसार, अब तक 20 से 25 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है. हालांकि पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन अगर अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रही तो नुकसान और बढ़ सकता है.

कीटों का बढ़ता हमला भी बना परेशानी

मौसम की मार के साथ-साथ इलायची के बागानों में कीटों का प्रकोप भी बढ़ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, रूट ग्रब और नेमाटोड जैसे मिट्टी में रहने वाले कीट पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इससे पौधों की बढ़वार और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है.

उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका

उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि, इस सीजन में देश का कुल इलायची उत्पादन करीब 33 हजार टन रह सकता है. पहले इसके 40 हजार टन तक पहुंचने की उम्मीद थी. तुलना करें तो पिछले 2025-26 सीजन में देश में करीब 37,733 टन इलायची का उत्पादन हुआ था. यानी इस बार उत्पादन में गिरावट देखने को मिल सकती है.

अल नीनो बढ़ा सकता है मुश्किलें

अल नीनो का असर इस बार मॉनसून पर पड़ सकता है. अगर आने वाले महीनों में बारिश सामान्य से कम रहती है, तो फसल को और नुकसान होगा. इसका असर अगले साल की शुरुआत तक भी देखने को मिल सकता है. उत्पादन घटने की स्थिति में इलायची की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं.

वाटेमाला में बढ़ेगा उत्पादन, फिर भी राहत की उम्मीद कम

दुनिया के प्रमुख इलायची उत्पादक देशों में शामिल ग्वाटेमाला में अगले सीजन में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. वहां उत्पादन 25 से 28 हजार टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले सीजन में यह करीब 17 हजार टन था. इसके बावजूद वैश्विक बाजार में इलायची की कुल उपलब्धता मांग से कम रहने की संभावना है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में इलायची की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है और बाजार मजबूत बना रह सकता है.

Published: 3 Aug, 2026 | 02:37 PM

Topics: