अब मशीनें करेंगी नारियल छीलने का काम, सहकारी संस्था ने किसानों को राहत और उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू की नई पहल

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने वाला है. संस्था का कहना है कि उनका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है. नई तकनीक के जरिए उत्पादन लागत कम होगी और काम तेजी से होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 26 Mar, 2026 | 09:10 AM

केरल से एक बड़ी और नई पहल सामने आई है, जो नारियल उद्योग की तस्वीर बदल सकती है. अब तक नारियल छीलना (देहस्किंग) सबसे कठिन और समय लेने वाला काम माना जाता था, लेकिन अब यह काम मशीनों की मदद से आसान बनने जा रहा है. इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मजदूरी लागत भी कम होगी और किसानों को बेहतर फायदा मिल सकेगा.

मशीन से होगा नारियल छिलने का काम

तिरुवनंतपुरम के पास पोथेनकोड इलाके में एक सहकारी संस्था द्वारा ऑटोमैटिक नारियल डीहस्किंग प्लांट लगाया जा रहा है. इस प्लांट में मशीनों की मदद से बड़ी मात्रा में नारियल का छिलका हटाया जाएगा और उसके अंदर का हिस्सा सुखाया जाएगा. अब तक यह काम पूरी तरह हाथों से होता था, जिसमें काफी समय और मेहनत लगती थी. लेकिन नई तकनीक आने से यह प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी.

उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

इस नई तकनीक का मुख्य उद्देश्य नारियल तेल के उत्पादन को बढ़ाना है. सहकारी संस्था द्वारा बनाए जा रहे ‘Golden Hill’ ब्रांड के नारियल तेल के उत्पादन को इस प्लांट के जरिए तेजी मिलेगी. इस उत्पाद की मार्केटिंग KCCS Farmers Producers Limited कंपनी करेगी, जिसे साल 2020 में स्थापित किया गया था.

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने वाला है. संस्था का कहना है कि उनका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है. नई तकनीक के जरिए उत्पादन लागत कम होगी और काम तेजी से होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.

महिलाओं को मिलेगा रोजगार

इस योजना की एक खास बात यह भी है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है. संस्था में काम करने वाले लोगों में करीब आधी संख्या महिलाओं की है. ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी यह पहल अहम मानी जा रही है.

कई क्षेत्रों में काम कर रही है संस्था

यह सहकारी संस्था सिर्फ नारियल तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी काम कर रही है.

  • उपभोक्ता स्टोर
  • खाद निर्माण इकाइयां
  • स्वास्थ्य सेवाएं
  • डेयरी प्लांट (जहां रोजाना करीब 5000 लीटर दूध का उत्पादन होता है)

इससे यह साफ है कि संस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है.

सरकारी मान्यता का इंतजार

हालांकि संस्था ने कई अच्छे प्रयास किए हैं, लेकिन अभी तक उसे किसान उत्पादक संगठन (FPO) के रूप में पूरी मान्यता नहीं मिली है. संस्था का कहना है कि अगर उन्हें यह मान्यता मिलती है, तो वे सरकार की योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे और अपने काम को और बड़े स्तर पर ले जा सकेंगे.

उद्योग में बदलाव की उम्मीद

नारियल छीलने की यह नई तकनीक आने वाले समय में पूरे उद्योग के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. इससे उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में सुधार होगा.

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Published: 26 Mar, 2026 | 09:09 AM
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