Vegetable prices fall: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सब्जियों का होलसेल रेट काफी कम हो गया है. गाजर और चुकंदर, जो शुक्रवार को 25 से 27 रुपये प्रति किलो बिक रहे थे, वे शनिवार को घटकर 10 से 15 रुपये प्रति किलो पर आ गए. यानी कीमतों में 24 घंटे के अंदर ही करीब 52 फीसदी की कमी आ गई. इसी तरह पपीता 10 रुपये प्रति किलो और खीरा 15 रुपये प्रति किलो में बिका, जबकि शुक्रवार को इसका दाम 42 रुपये प्रति किलो था. तोरई, कुंदरू, भिंडी और परवल जैसी सब्जियां भी, जो पहले 30 से 35 रुपये प्रति किलो तक थीं, अब घटकर 15 से 20 रुपये प्रति किलो के बीच बिकीं.
भुवनेश्वर के यूनिट-1 सब्जी बाजार में ईंधन सप्लाई में आई दिक्कत की वजह से उस दिन सब्जियों की ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई. इससे थोक व्यापारियों को मजबूरी में जल्दी खराब होने वाली सब्जियां आधे से भी कम दाम पर बेचनी पड़ी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ. व्यापारियों ने कहा कि कई खुदरा विक्रेता और दूसरे इलाकों के खरीदार बाजार तक नहीं पहुंच सके, क्योंकि कई ट्रांसपोर्टर या तो ईंधन खत्म होने की वजह से फंस गए थे या पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े रह गए थे. इसी कारण बाजार में माल की सामान्य खरीद-बिक्री प्रभावित हुई.
इन राज्यों से होती है सब्जियों की सप्लाई
ओडिशा की सब्जियों की जरूरतें काफी हद तक दूसरे राज्यों से पूरी होती हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश के साथ-साथ कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं. ये सब्जियां भुवनेश्वर के यूनिट-1 थोक बाजार में पहुंचने के बाद राज्य के अलग-अलग जिलों जैसे कटक, खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर और ढेंकनाल के खुदरा बाजारों में भेजी जाती हैं. लेकिन शनिवार सुबह बाजार में कारोबार बहुत धीमा रहा और बहुत कम गाड़ियां और व्यापारी खरीदारी के लिए पहुंचे. इसके चलते थोक व्यापारियों को मजबूरी में खराब होने से बचाने के लिए सब्जियां बहुत कम दामों पर बेचनी पड़ी.
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थोक व्यापारियों को बड़ा नुकसान
सब्जी व्यापारियों के संगठन के अध्यक्ष कबीराज स्वैन ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि इस स्थिति से थोक व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में हर सुबह अलग-अलग राज्यों से करीब 50 से 60 ट्रक, जिनमें लगभग 25 टन सब्जियां होती हैं, बाजार में पहुंचते हैं. इसके अलावा लगभग 200 छोटे वाहन और पिकअप वैन भी सब्जियों को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने के लिए आते हैं. लेकिन शनिवार को ऐसा नहीं हो सका, क्योंकि ट्रांसपोर्टरों के पास या तो ईंधन खत्म हो गया था या वे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में फंसे हुए थे.
गर्मी के मौसम में सब्जियों की शेल्फ लाइफ कम
उन्होंने यह भी बताया कि गर्मी के मौसम में सब्जियों को लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता, इसलिए व्यापारियों को मजबूरी में उन्हें आधे दाम पर बेचना पड़ा. स्वैन के अनुसार, इस पूरे हालात से सबसे ज्यादा नुकसान थोक व्यापारियों को हुआ है. व्यापारियों को आशंका है कि अगर ईंधन की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उनका नुकसान और बढ़ सकता है, क्योंकि सप्लाई चेन में रुकावट से माल की ढुलाई और खरीदारी लगातार प्रभावित हो सकती है. हालांकि, कटक के सबसे बड़े सब्जी बाजार छत्र बाजार के व्यापारियों ने बताया कि फिलहाल यहां सब्जी कारोबार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है.