पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते पैदा हुए उर्वरक संकट पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में चिंता जताई है. इस संकट से निपटने के लिए केवल तुरंत उठाए जाने वाले कदम ही नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान और देशों के बीच सहयोग भी जरूरी है. वहीं, केंद्रीय उर्वरक विभाग ने कहा है कि सरकार के प्रभावी प्रयासों से देश में घरेलू उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है. देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जिससे किसानों को किफायती दरों पर उर्वरक आसानी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं और एमआरपी में बढ़ोत्तरी नहीं की जाएगी.
यूएन में उर्वरक संकट पर भारत ने रखा पक्ष
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष बैठक में पश्चिम एशिया के संघर्ष से पैदा हुए ऊर्जा और उर्वरक संकट पर अपना पक्ष रखा. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए केवल तुरंत उठाए जाने वाले कदम ही नहीं, बल्कि लंबे समय के समाधान और देशों के बीच सहयोग भी जरूरी है.
भारत ने साफ कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमला करना, जहाजों के कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डालना और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही रोकना बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता. भारत ने यह भी कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए और ऊर्जा तथा सप्लाई चेन की सुरक्षा बनाए रखना पूरी दुनिया की प्राथमिकता होनी चाहिए.
उर्वरकों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग ने खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों का रिकॉर्ड स्टॉक करने का दावा किया है. कहा गया है कि मांग के मुकाबले 51 फीसदी भंडार सुरक्षित कर लिया गया है और कीमतें नहीं बढ़ेंगी. कहा गया है कि किसानों को राहत देने के लिए उर्वरकों की MRP में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पीक सीजन के लिए सरकार ने कमर कस ली है.
बंदरगाह पहुंची 7 लाख टन एनपीके उर्वरक
उर्वरक विभाग ने कहा है कि भारत ने मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के लिए स्टॉक ऑन-हैंड (SOH) से लगभग 7 लाख टन एनपीके (NPKs) भी सुरक्षित कर लिया है. उर्वरक विभाग नियमित रूप से कंपनियों द्वारा उठाए गए सब्सिडी बिलों का साप्ताहिक आधार पर भुगतान कर रहा है. उपलब्धता की चुनौतियों से निपटने के लिए सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (EGoS) की अब तक 8 बैठकें हो चुकी हैं.
विदेशों से उर्वरक आयात के लिए टेंडर जारी
पीक सीजन के दौरान पर्याप्त उपलब्धता पक्की करने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने 12 लाख टन डीएपी, 4 लाख टन टीएसपी और 3 लाख टन अमोनियम सल्फेट की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर जारी कर दिए हैं. इसके अलावा उर्वरक उत्पादन के कच्चे माल के लिए 5.36 लाख टन अमोनिया और 5.94 लाख टन सल्फर की टेंडर भी जारी किए जा रहे हैं.