पश्चिम बंगाल में आलू की ऐसी बंपर पैदावार कि भर गए कोल्ड स्टोरेज, पांच साल का टूटा रिकॉर्ड

जब राज्य में आलू के दाम बढ़े थे, तब तत्कालीन सरकार ने दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर रोक लगा दी थी. इसका फायदा उत्तर प्रदेश के व्यापारियों ने उठाया और उन्होंने ओडिशा, बिहार और झारखंड के बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ा दी. इसके बाद पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के लिए पुराने बाजार वापस पाना मुश्किल हो गया.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 May, 2026 | 07:22 AM

Potato production: पश्चिम बंगाल में इस साल आलू की बंपर पैदावार ने किसानों और व्यापारियों के बीच नई उम्मीद जगा दी है. अनुकूल मौसम और खेती के बढ़े रकबे की वजह से राज्य में आलू उत्पादन ने पिछले पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इस बार राज्य में आलू का उत्पादन 140 लाख टन के पार पहुंच गया है. यही वजह है कि कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की मात्रा भी तेजी से बढ़ी है.

राज्य के कोल्ड स्टोरेजों में इस साल करीब 74 लाख टन आलू जमा किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 14 फीसदी ज्यादा है. पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 65 लाख टन था. उत्पादन बढ़ने के साथ ही अधिकांश कोल्ड स्टोरेज लगभग पूरी तरह भर चुके हैं.

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, इस साल मौसम किसानों के पक्ष में रहा. समय पर ठंड पड़ने और फसल के दौरान अनुकूल तापमान बने रहने से आलू की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार हुआ. इसके अलावा किसानों ने पिछले साल की तुलना में थोड़े ज्यादा क्षेत्र में आलू की खेती की, जिससे उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली.

किसानों ने सबसे ज्यादा कराया भंडारण

पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ सदस्य पतित पावन डे के मुताबिक इस बार ज्यादातर किसानों ने खुद अपना आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा है. व्यापारियों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही. इसकी सबसे बड़ी वजह पिछले साल हुआ भारी आर्थिक नुकसान माना जा रहा है.

दरअसल, पिछले साल आलू की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट आ गई थी. राज्य में बड़ी मात्रा में आलू कोल्ड स्टोरेज में पड़ा रह गया था, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान झेलना पड़ा. कई किसानों को मजबूरी में बहुत कम कीमत पर अपनी फसल बेचनी पड़ी थी. इस साल हालांकि किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार की नई नीति और बाहरी राज्यों में मांग बढ़ने से उन्हें बेहतर दाम मिल सकते हैं. यही कारण है कि किसानों ने जल्दबाजी में फसल बेचने के बजाय उसे सुरक्षित रखने का फैसला किया है.

पिछले साल क्यों गिरे थे आलू के दाम

पिछले वर्ष पश्चिम बंगाल के आलू कारोबार को बड़ा झटका लगा था. राज्य के बाहर आलू की बिक्री प्रभावित होने से बाजार में अतिरिक्त स्टॉक जमा हो गया था. ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे बड़े बाजारों में पश्चिम बंगाल की पकड़ कमजोर पड़ गई थी. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश ने तेजी से अपनी पहुंच बढ़ाई और वहां के बाजारों में मजबूत पकड़ बना ली. व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कुछ समय के लिए अंतरराज्यीय व्यापार पर रोक लगाने से यह स्थिति बनी थी.

जब राज्य में आलू के दाम बढ़े थे, तब तत्कालीन सरकार ने दूसरे राज्यों में आलू भेजने पर रोक लगा दी थी. इसका फायदा उत्तर प्रदेश के व्यापारियों ने उठाया और उन्होंने ओडिशा, बिहार और झारखंड के बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ा दी. इसके बाद पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के लिए पुराने बाजार वापस पाना मुश्किल हो गया.

विरोध के बाद हटानी पड़ी थी रोक

आलू व्यापार पर लगी रोक के खिलाफ किसानों और व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था. उनका कहना था कि दूसरे राज्यों में बिक्री बंद होने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है. लगातार दबाव बढ़ने के बाद सरकार को आखिरकार यह रोक हटानी पड़ी. अब राज्य में नई सरकार बनने के बाद आलू समेत कई जरूरी कृषि उत्पादों के अंतरराज्यीय परिवहन पर लगी सभी पाबंदियां खत्म कर दी गई हैं. सरकार का कहना है कि किसानों को अपनी उपज कहीं भी बेचने की पूरी आजादी होनी चाहिए ताकि उन्हें बेहतर दाम मिल सकें.

राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि इस बार उत्पादन ज्यादा होने से कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन सरकार चाहती है कि किसानों को नुकसान न हो. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि अब पश्चिम बंगाल का आलू देशभर में बेचा जाएगा. इसको लेकर लगातार चर्चा और योजना बनाई जा रही है.

किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बार दूसरे राज्यों में मांग बनी रहती है तो किसानों को राहत मिल सकती है. उत्पादन ज्यादा होने के बावजूद अगर बाजार मजबूत रहा तो आलू के दाम स्थिर रह सकते हैं.

कोल्ड स्टोरेज में बड़े पैमाने पर भंडारण यह भी दिखाता है कि किसान फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए सही समय का इंतजार कर रहे हैं. आने वाले महीनों में अगर बाहरी राज्यों में मांग बढ़ती है तो पश्चिम बंगाल के किसानों को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है.

राज्य में रिकॉर्ड उत्पादन ने खेती से जुड़े लोगों में उत्साह जरूर बढ़ाया है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती अब किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य दिलाने की है.

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