Tip Of The day: नींबू की खेती से कमाना चाहते हैं ज्यादा मुनाफा? किसान मार्च में जरूर अपनाएं ये टिप्स

Lemon Farming: मार्च का महीना नींबू और अन्य साइट्रस फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय पौधों में नई कोंपलें और फूल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अगर किसान इस दौरान छंटाई, सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति, सही सिंचाई और कीट नियंत्रण पर ध्यान दें, तो फल झड़ने की समस्या कम होती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 15 Mar, 2026 | 11:46 AM

Nimbu Ki Kheti: भारत में नींबू और अन्य दूसरे फसलें जैसे कागजी नींबू, संतरा, मौसमी और किन्नू किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती हैं. खासकर उत्तर भारत में मार्च का महीना इन फसलों के लिए बेहद अहम होता है. इस समय सर्दी धीरे-धीरे खत्म होती है और तापमान बढ़ने लगता है, जिससे पौधों में नई ग्रोथ और फूल बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है.

बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, अगर किसान मार्च के महीने में नींबू के बागों की वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करें तो फलधारण बेहतर होता है.

नई वृद्धि और फूलों का प्रबंधन

मार्च के महीने में नींबू के पौधों में नई कोंपलें निकलना शुरू हो जाती हैं और कई किस्मों में फूल भी आने लगते हैं. यह समय पौधों की तेज वृद्धि का होता है. इस दौरान किसानों को पौधों की हल्की छंटाई (प्रूनिंग) करनी चाहिए. सूखी और कमजोर शाखाओं को हटाने से पौधों में नई और स्वस्थ शाखाओं का विकास होता है. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और फल लगने की क्षमता भी बढ़ती है.

सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति

नींबू के पौधों में अक्सर जिंक, बोरॉन और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी देखने को मिलती है. इनकी कमी से पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और फूल कम बनते हैं.

इस समस्या से बचने के लिए किसान जिंक सल्फेट, बोरॉन और फेरस सल्फेट का लगभग 0.3 प्रतिशत घोल बनाकर पत्तियों पर छिड़काव कर सकते हैं. इससे पौधों को जरूरी पोषण मिलता है और फूलों तथा फलों की संख्या बढ़ती है.

सिंचाई का सही प्रबंधन

मार्च में तापमान बढ़ने के कारण मिट्टी की नमी तेजी से कम होने लगती है. इसलिए पौधों को समय-समय पर सिंचाई करना जरूरी होता है. अगर बारिश नहीं हो रही हो तो 10 से 15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करना बेहतर माना जाता है. हालांकि ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है. आजकल ड्रिप सिंचाई प्रणाली को काफी प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इससे पानी की बचत होती है और पौधों की जड़ों तक धीरे-धीरे नमी पहुंचती रहती है.

कीटों से बचाव जरूरी

मार्च के महीने में तापमान बढ़ने के साथ नींबू के बागों में कई प्रकार के कीट सक्रिय हो जाते हैं. इनमें सिट्रस लीफ माइनर, सिट्रस पायला और स्केल कीट प्रमुख हैं.

  • सिट्रस लीफ माइनर नई पत्तियों में सुरंग बनाकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है. इसके नियंत्रण के लिए नीम तेल या डाइमिथोएट का छिड़काव किया जा सकता है.
  • सिट्रस पायला पत्तियों से रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देता है. इसे नियंत्रित करने के लिए इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग किया जाता है.
  • स्केल कीट शाखाओं और फलों पर चिपककर नुकसान पहुंचाते हैं. इनके नियंत्रण के लिए नीम तेल या क्लोरपायरीफॉस का छिड़काव फायदेमंद होता है.

सही देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार अगर किसान मार्च महीने में पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई और कीट नियंत्रण पर ध्यान दें, तो नींबू के बागों में फलधारण बेहतर होता है. इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि फलों की गुणवत्ता भी अच्छी मिलती है. इसलिए किसानों के लिए जरूरी है कि वे इस मौसम में बागों की नियमित निगरानी करें और समय पर जरूरी कृषि कार्यों को पूरा करें.

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