बकरी पालने वालों के लिए बड़ी चेतावनी! 24 घंटे में बकरियों की जान ले सकती हैं ये बीमारियां, एक्सपर्ट से जानें बचाव

Bakri Palan: बकरी पालन किसानों के लिए कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाला व्यवसाय है, लेकिन कुछ खतरनाक बीमारियां जैसे एंटेरोटॉक्सिमिया, बकरी चेचक और खुरपका-मुंहपका बकरियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और सही देखभाल से इन बीमारियों से बचाव कर पशुपालक अपने पशुओं और कमाई दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 12 Mar, 2026 | 03:47 PM

Goat Farming Tips: ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन किसानों और पशुपालकों के लिए कम लागत में अच्छी आय का साधन माना जाता है. छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं, क्योंकि इसमें ज्यादा जमीन या भारी निवेश की जरूरत नहीं होती. हालांकि, अगर बकरियों की सही नस्ल का चयन किया जाए और उनकी देखभाल वैज्ञानिक तरीके से की जाए, तो यह व्यवसाय और ज्यादा लाभदायक बन सकता है.

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वाई.के. सोनी ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, किसान अगर अपनी जरूरत के अनुसार नस्ल चुनें और समय पर टीकाकरण कराते रहें, तो बकरी पालन से दूध और मांस दोनों के जरिए अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.

बकरी पालन में बीमारियों का खतरा

बकरी पालन में सबसे बड़ी चुनौती बीमारियों से बचाव है. कई बार छोटी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान करा सकती है. डॉ. सोनी के मुताबिक, कई ऐसी बीमारियां हैं जो बहुत तेजी से फैलती हैं और समय पर इलाज न मिलने पर बकरी की जान तक जा सकती है. कुछ मामलों में बीमारी इतनी गंभीर हो जाती है कि 4 से 24 घंटे के अंदर ही बकरी की मौत हो सकती है.

बकरियों के लिए खतरनाक बीमारी

  • Enterotoxemia: बकरियों में होने वाली खतरनाक बीमारियों में एंटेरोटॉक्सिमिया सबसे गंभीर मानी जाती है. आम भाषा में इसे आंतों का जहर भी कहा जाता है. यह बीमारी अचानक फैलती है और बहुत कम समय में बकरी की स्थिति गंभीर हो सकती है. इस बीमारी के कारण बकरी सुस्त हो जाती है, खाना कम कर देती है और कई मामलों में अचानक मौत भी हो जाती है.
  • Goat Pox: बकरियों में एक और आम बीमारी बकरी चेचक है. इस बीमारी में बकरी के शरीर, मुंह और खुरों पर दाने या घाव दिखाई देने लगते हैं. अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह बीमारी पूरे झुंड में फैल सकती है. इससे बकरियों में दूध उत्पादन भी कम हो जाता है.
  • FMD: खुरपका-मुंहपका भी बकरियों में होने वाली एक खतरनाक बीमारी है. इसमें बकरी के मुंह और खुरों में घाव हो जाते हैं और पशु को चलने-फिरने और खाने में दिक्कत होने लगती है. अगर किसी एक बकरी में इसके लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

समय पर टीकाकरण से होगा बचाव

डॉ. वाई.के. सोनी का कहना है कि अगर पशुपालक समय-समय पर टीकाकरण कराते रहें और साफ-सफाई का ध्यान रखें, तो इन खतरनाक बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है. इसके साथ ही बकरियों को पौष्टिक आहार देना और उनके रहने की जगह साफ रखना भी जरूरी है. अगर किसान इन जरूरी बातों का ध्यान रखते हैं, तो बकरी पालन न सिर्फ सुरक्षित रहेगा बल्कि इससे दूध और मांस उत्पादन के जरिए अच्छी आय भी हासिल की जा सकती है.

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