पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की सलाह, बकरी पालन शुरू करने के लिए मार्च-अप्रैल का महीना बेस्ट.. कम होंगे खर्च

पंजाब में बकरी पालन तेजी से लाभदायक कृषि-व्यवसाय बन रहा है. कम निवेश, जल्दी मुनाफा और मजबूत बाजार मांग के कारण छोटे किसान भी अच्छी कमाई कर रहे हैं. विशेषज्ञ मार्च-अप्रैल में शुरुआत, वैज्ञानिक शेड, संतुलित आहार और बीटल, बरबरी, जमुनापारी नस्ल अपनाने की सलाह दे रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 23 Feb, 2026 | 12:52 PM

Goat Farming: बकरी पालन से पंजाब के किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं. यही वजह है कि बकरी पालन राज्य में तेजी से उभरता हुआ कृषि-व्यवसाय मॉडल बन रहा है. इससे ग्रामीण परिवारों की आय में बढ़ोतरी हुई है. साथ ही उन्हें पोषणयुक्त आहार भी मिल रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर आप भी बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं, तो मार्च और अप्रैल का महीना सबसे बेहतर है, क्योंकि इस समय मौसम संतुलित रहता है और चारे की उपलब्धता भी अच्छी होती है, जिससे शुरुआती खर्च कम हो जाता है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) भी बकरी बालन को बढ़ावा दे रहा है, क्योंकि इसमें कम निवेश, जल्दी लाभ और अलग-अलग खेती प्रणालियों के साथ तालमेल की क्षमता है. बकरी को अक्सर ‘गरीब आदमी की गाय’ कहा जाता है, क्योंकि यह कम संसाधनों में भी आसानी से पलती है और मांस, दूध, रेशा और खाद देती है. केवीके रोपड़ की विशेषज्ञ अपर्णा गुप्ता के अनुसार, यदि वैज्ञानिक तरीके से शेड बनाकर, संतुलित आहार  और समय पर स्वास्थ्य देखभाल की जाए तो बकरी पालन पारंपरिक काम से आगे बढ़कर लाभदायक व्यवसाय बन सकता है.

बकरी पालन के लिए काफी है एक एकड़ जमीन

विशेषज्ञ किसानों को अर्ध-गहन (सेमी-इंटेंसिव) पद्धति अपनाने की सलाह दे रहे हैं, जिसमें नियंत्रित चराई और स्टॉल फीडिंग  दोनों शामिल हैं. अच्छी वेंटिलेशन वाला शेड और पर्याप्त चारे की व्यवस्था उत्पादन बनाए रखने के लिए जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि एक एकड़ जमीन पर चारे की खेती के साथ 25-30 बकरियां पाली जा सकती हैं. बीटल, बरबरी और जमुनापारी नस्लें ज्यादा प्रजनन क्षमता और अच्छे बाजार मूल्य के कारण बेहतर मानी जाती हैं. अपर्णा गुप्ता बताती हैं कि बकरियां एक साल में ही यौन परिपक्व हो जाती हैं और आमतौर पर एक बार में एक या दो बच्चे देती हैं.

50 बकरियों के साथ शुरू करें बिजनेस

करीब 150 दिन की गर्भावधि के साथ 50 बकरियों का झुंड प्रति पशु लगभग 363 रुपये मासिक लाभ दे सकता है, जिससे यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी फायदेमंद है. अच्छी नस्ल की बकरियां गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी और उसके क्षेत्रीय केंद्रों से खरीदी जा सकती हैं. 30- 35 किलो वजन की एक वयस्क बकरी की कीमत 12,000 से 17,000 रुपये तक मिलती है और बड़े यूनिट के लिए सरकारी सहायता भी उपलब्ध है. विशेषज्ञों के अनुसार, मटन की मजबूत मांग और आसान मार्केटिंग विकल्पों के कारण बकरी पालन एक समझदारी भरा निवेश है.

खेती में भी सहायक है बकरी पालन

केवीके और राज्य के फार्म एडवाइजरी सर्विस सेंटर किसानों को पारंपरिक बकरी पालन को आधुनिक कृषि-व्यवसाय  में बदलने के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं. केवीके के विशेषज्ञ सतबीर सिंह के अनुसार, बकरी पालन सिर्फ अतिरिक्त आय का साधन नहीं है, बल्कि यह खेती में स्थिरता, लचीलापन और मुश्किल हालात में भी टिके रहने की ताकत देता है. कम निवेश, जल्दी मुनाफा और तय बाजार होने के कारण बकरियां विविध खेती प्रणाली में आसानी से फिट हो जाती हैं. उनकी ज्यादा प्रजनन क्षमता और अनुकूलनशीलता के चलते छोटे और सीमांत किसान भी इससे नियमित आय कमा सकते हैं. सिंह का कहना है कि बकरी पालन से पूंजी जल्दी वापस मिलती है और लगातार नकद आय होती रहती है, इसलिए इसे छोटे किसानों के लिए ‘चलती-फिरती एटीएम’ भी कहा जाता है.

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