Napier Grass: पौष्टिकता में बेजोड़ है ये हरी घास, गर्मी में पशुओं का बढ़ जाएगा दूध

हरा चारा पशुओं की सेहत से लेकर दूध उत्पादन के लिए फयदेमंद माना जाता है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालकों को एक योजना के तहत नेपियर घास की जड़े मुफ्त में दे रही है, साथ ही सिंचाई के लिए 4,000 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जा रही है.

किसान इंडिया डेस्क
नोएडा | Updated On: 15 May, 2026 | 08:19 PM

Napier Grass: हरा चारा पशुओं की सेहत से लेकर दूध उत्पादन के लिए फयदेमंद माना जाता है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालकों के लिए एक योजना के तहत नेपियर घास की जड़े मुफ्त में दे रही है, साथ ही सिंचाई के लिए 4,000 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जा रही है. इस योजना की खास बात यह है कि सरकार जितनी मात्रा में जड़े देती है, उसी मात्रा में वापस भी लेती है, जिससे सभी पशुपालकों को इस योजना का लाभ मिल सके.

पशुपालकों को अक्सर हरे चारे की समस्या का सामना करना पड़ता है क्योकि दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा उनकी सेहत और दूध उत्पादन का आधार माना जाता है. अगर पौष्टक हरा चारा न दिया जाए तो पशु कमजोर पड़ जाते है और दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार नेपियर घास (हाथी घास) को बढ़ावा दे रही है, ताकि पशुपालकों को सालभर उच्च गुणवत्ता वाला चारा मिल सके और पशु स्वस्थ रहें जिससे उत्पादन बेहतर हो सके.

कैसे पाएं योजना का लाभ

एक्सपर्ट्स के अनुसार जिले में शुरुआती चरण में 10 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा, जिनकी जमीन पर नेपियर घास की खेती कराई जाएगी. योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक पशुपालक के पास कम से कम 0.2 हेक्टेयर सिंचित भूमि होना अनिवार्य है. राज्य भर में चल रही योजना के तहत पशुपालकों को मुफ्त में नेपियर घास की जड़ें उपलब्ध कराई जाएंगी, साथ ही सिंचाई के लिए 4,000 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी. सरकार द्वारा दी गई जड़ों की समान मात्रा एक वर्ष बाद वापस ले ली जाएगी, ताकि यह योजना अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके.

हाथी घास की विशेषता

नेपियर घास को हाथी घास भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी ऊंचाई लगभग 8 फीट तक होती है और घनी इतनी ज्यादा कि इसमें बड़े जानवर तक छिप सकते हैं. इस घास में लगभग 5 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जो दुधारू पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक माना जाता है. एक बार लगाने पर यह घास लगातार 5 वर्षों तक चारा देती रहती है, जिससे पशुपालकों के चारे पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है.

सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को नई दिशा देगी, चारा संकट खत्म होगा और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी होगी. महिला लाभार्थियों को भी योजना में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वे पशुपालन में आत्मनिर्भर बन सकें.

आवेदन प्रक्रिया

योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालकों को अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होगा. चयनित लाभार्थियों को जड़ें उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेती की तकनीकी सहायता भी दी जाएगी. यह योजना न सिर्फ हरियाली बढाएंगी, बल्कि पशुओं को बेहतर पोषण भी प्रदान करती है. नेपियर घास योजना किसानों की आर्थिक मजबूती का भी बड़ा साधन बनकर उभर रही है.

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Published: 15 May, 2026 | 03:18 PM
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