Today’s Insights: पशुपालन से चमक जाएगी किस्मत, कम खर्च में बंपर मुनाफे के लिए बस अपनाएं ये 4 मंत्र!

पशुपालन को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए सही नस्ल का चुनाव, साफ-सुथरा आवास और संतुलित आहार सबसे जरूरी है. बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण और रिकॉर्ड रखना भी सफलता की कुंजी है. आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Feb, 2026 | 07:00 PM

Livestock Farming : आज के दौर में जब खेती के साथ-साथ कमाई के नए जरिए ढूंढना जरूरी हो गया है, तब पशुपालन एक ऐसा बिजनेस है जो कभी घाटा नहीं देता. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग इसी काम से लाखों कमा रहे हैं, जबकि कुछ सिर्फ मेहनत ही करते रह जाते हैं? फर्क सिर्फ सही जानकारी और सही तरीके का है. अगर आप भी अपने आंगन में कामधेनु को लाना चाहते हैं और चाहते हैं कि दूध की नदियां बहने के साथ-साथ आपकी जेब भी गर्म रहे, तो आपको बस कुछ बुनियादी नियमों को गांठ बांध लेना है. आइए जानते हैं वो राज, जो आपके पशुपालन के व्यवसाय को कामयाबी के शिखर पर ले जाएंगे.

सही नस्ल का चुनाव

पशुपालन की नींव है-एक बेहतरीन नस्ल. अक्सर पशुपालक भाई यहीं गलती कर देते हैं कि वे किसी भी जानवर को घर ले आते हैं. आपको अपने इलाके की आबोहवा (मौसम) को ध्यान में रखकर ही पशु चुनना चाहिए. अगर आप दूध के लिए गाय पाल  रहे हैं, तो गीर, साहीवाल या अच्छी एचएफ (HF) नस्ल चुन सकते हैं, वहीं भैंसों में मुराह सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. याद रखिए, नस्ल जितनी उन्नत होगी, आपकी मेहनत का फल उतना ही मीठा (मुनाफा) होगा.

सफाई और सुकून का मेल

जैसे हमें एक साफ-सुथरे घर में रहना पसंद है, वैसे ही पशुओं को भी साफ-सफाई और सुकून चाहिए. उनके रहने की जगह ऐसी हो जहां ताजी हवा आए और धूप का सही तालमेल हो. फर्श सूखा होना चाहिए ताकि उन्हें फिसलने या खुरों की बीमारी का डर न रहे. एक खुश और तनावमुक्त पशु हमेशा बीमार पशु की तुलना  में 20 फीसदी ज्यादा दूध देता है. इसके साथ ही, उनके पास हर वक्त पीने के लिए साफ और ताजा पानी मौजूद होना चाहिए.

पेट भरेगा तभी तो दूध बढ़ेगा

पशुओं को सिर्फ घास डाल देना काफी नहीं है. उन्हें चाहिए एक बैलेंस्ड डाइट. इसमें हरा चारा, सूखा चारा और दाने का सही मिश्रण होना चाहिए. जैसे हमारे शरीर को विटामिन्स की जरूरत होती है, वैसे ही पशुओं को मिनरल मिक्सचर  देना बहुत जरूरी है. इससे न केवल उनकी सेहत अच्छी रहती है, बल्कि दूध की गुणवत्ता और मात्रा भी बढ़ती है. खाना खिलाने का एक निश्चित समय तय करें, ताकि पशु का पाचन तंत्र सही रहे.

डॉक्टर की सलाह और रिकॉर्ड की चालाकी

पशुपालन में सबसे बड़ा घाटा तब होता है जब अचानक कोई बीमारी फैलती है. इससे बचने का एकमात्र रास्ता है-समय पर टीकाकरण  (Vaccination). खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों के टीके पहले ही लगवा लें. इसके अलावा, समय-समय पर कीड़े मारने की दवा (Deworming) देते रहें. एक सफल बिजनेसमैन वही है जो हर चीज का रिकॉर्ड रखे. किस पशु को कब टीका लगा, किसने कितना दूध दिया और कब डॉक्टर को दिखाया-इन सबका हिसाब डायरी में रखें. साथ ही, सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी और बीमा योजनाओं का लाभ उठाना बिल्कुल न भूलें.

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Published: 2 Feb, 2026 | 07:00 PM

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