गांव का बिजनेस आज भी विश्वास पर चलता है. हमने उसपर विश्वास किया, क्योंकि उसे हमारी कंपनी को चलाने का जिम्मा दिया गया था, लेकिन उसी ने हमारे फर्जी हस्ताक्षर किए, हमारे विश्वास का फायदा उठाया. आज हमारे कंपनी का अकाउंट खाली है, बिजनेस करने के लिए एक पैसा नहीं है, ऊपर से 15 लाख का लोन चुकाने के लिए नोटिस मिल गया है. यह बताते हुए कुमारी बिजोला की आखें भर आईं. उनके मन में एक ही सवाल था कि बाकी महिला किसानों को क्या समझाएंगी और अपने घर में क्या जवाब देंगी. क्योंकि यह ठगी सिर्फ एक महिला से नहीं हुई है बल्कि कई महिलाओं से हुई है जो खुद का बिजनेस करके आगे बढ़ने की सोच रहे थे.
दरअसल देश के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए, उनके उत्पाद को बेहतर बाजार दिलाने के लिए और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से पूरे देश में 10,000 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) बनाने को घोषणा की गई थी. इसके तहत झारखंड समेत देश के कई राज्यों में एफपीओ बनाए गए और किसानों को उससे जोड़ा गया. झारखंड के किसानों को इससे उम्मीद थी एफपीओ से जुड़ने के बाद उनका जीवन खुशहाल होगा और तरक्की होगी, लेकिन यहां मामला उलटा पड़ गया है. दरअसल, बोकारो जिले के एक एफपीओ के सदस्य किसानों की शिकायत है कि उनके साथ धोखा हुआ है और एफपीओ को लोन दिलाने के नाम पर उनके साथ ठगी हुई है. इस ठगी का आरोप किसान उत्पादक संगठन के सीइओ पर ही लगाया जा रहा है. फिलहाल सीइओ फरार बताया जा रहा है.
कैसे काम करता है एफपीओ
धोखाधड़ी के इस खेल को समझने के लिए पहले यह समझना पड़ेगा की एफपीओ काम कैसे करता है. क्योंकि अगर आप एफपीओ के बारे में जानकारी रखते हैं तो आप कहेंगे की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्यों में तो गांव की किसान महिलाएं ही रहती हैं फिर यह कैसे हुआ. तो पहले पूरा प्रोसेस समझिए. पीआईबी और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक झारखंड में फिलहाल 335 से 355 एफपीओ बने हुए हैं. इन एफपीओ की देखरेख का जिम्मा कलस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन सीबीबीओ (CBBO) के तहत किया जाता है. सीबीबीओ (CBBO) को यह अधिकार नाबार्ड (NABARD) एसएफएसी (SFAC), और एनसीडीसी (NCDC) की तरफ से दिया जाता है. इस कार्य के लिए सीबीबीओ किसी सक्षम एनजीओ का चयन करती है. चूंकि एफपीओ के सभी सदस्य किसान होते हैं, उन्हें बिजनेस के संचालन का अनुभव नहीं होता है इसलिए एनजीओ अपना एक प्रतिनिधि सीइओ के तौर पर नियुक्त करती है जो एफपीओ का पूरा प्रबंधन देखता है.
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महिला किसानों के साथ हुआ धोखा
बोकारो जिले के नरेकरा पंचायत में स्थित एफपीओ की भी यही कहानी है. इस एफपीओ का नाम नरकेरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड है. जीटी भारत नाम की एक संस्था इस एफपीओ के कार्यों का देखरेख करती है और उसी संस्था के प्रतिनिधि एलेन अनुकुल सोरेन यहां पर बतौर सीइओ कार्यरत थे. उत्पादक कंपनी के 526 महिला किसान सदस्य हैं. 1100 रुपये का अंशदान देकर महिला किसान इस एफपीओ से जुड़ी हैं. महिला किसान इस उम्मीद से एफपीओ से जुड़ीं थीं कि उनका जीवन खुशहाल होगा लेकिन आज वही एफपीओ इनके लिए परेशानी का सबब बन गया है. इसके चलते हर रोज उनके घरों में झगड़े हो रहे हैं. क्योंकि उनके अनुभव की कमी और जानकारी के अभाव में उनके साथ धोखा हो गया है. उनके साथ वित्तीय धोखाधड़ी हुई है जिसकी भरपाई करने के लिए बैंक अब उनपर दबवा बना रहा है.

नरकेरा किसान उत्पादक कंपनी से जुड़ी महिलाएं और संस्था के लोग.
निकाल ली गई 15 लाख की राशि
पर यह नौबत आई कैसे? नरकेरा किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का गठन साल 2023 में हुआ. जीटी भारत संस्था के एक प्रतिनिधि बतौर सीइओ यहां नियुक्त किए गए. साल 2024 में एफपीओ में कुछ सामानों की जरूरत और बैंक में काम बताकर उनसे पेपर पर सिग्नेचर कराए गए और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बोकारो शाखा से 15 लाख रुपये लोन के लिए अप्लाई किया गया. बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्यों ने इसमें हस्ताक्षर किया. चूंकि एफपीओ की तरफ से आवेदन दिया गया था इसलिए यह लोन जल्दी पास हो गया. इसके बाद शुरू हुआ निकासी का खेल. बोर्ड ऑफ सदस्यों को कुछ-कुछ सामानों की खरीद और पेंमेंट करने का बहाना बनाकर चेक में हस्ताक्षर कराए गए. इसके बाद धीरे-धीरे करके लोन की पूरी राशि 15 लाख रुपये निकाल ली गई. बोर्ड से सदस्यों का कहना है कि उन्हें जानकारी ही नहीं थी कि एफपीओ के नाम पर लोन लिया गया और पैसे भी निकाल लिए गए.

बैंक की तरफ से एफपीओ को भेजा गया नोटिस
बोर्ड के सदस्यों को इस बात की थोड़ी सी भी जानकारी नहीं थी कि उनके साथ धोखा हो गया है. उन्हें तो यह भी नहीं पता था कि उनके एफपीओ के नाम पर लोन लिया गया है. इसके बाद बैंक ने लोन नहीं चुकाने पर एफपीओ को नोटिस दिया. तब जाकर मामला सामने आया. मामला सामने आने के बाद नरकेरा किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का सीइओ फरार बताया जा रहा है. वह ऑफिस नहीं आ रहा है. अब बैंक एफपीओ से लोन के पैसे चुकाने के लिए दबाव बना रहा है जबकि महिलाओं को उस पैसे के निकासी की जानकारी ही नहीं है. इस मामले को लेकर बालीडीह थाने में जाकर एक सनहा दर्ज कराया गया है. हालांकि थाना में मामला दर्ज कराने गई महिलाओं को कहा गया कि यह साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है इसलिए वो मामला दर्ज नहीं कर सकते हैं. इधर एफपीओ की सदस्यों का कहना है कि बैंक का नोटिस आने के बाद वो काफी परेशान हैं.
कार्रवाई करेगी झारखंड किसान महासभा
मामले को लेकर पीड़ित किसानों ने झारखंड किसान महासभा से संपर्क किया. किसान महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष पंकज रॉय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक पंचायत का आयोजन किया, जहां पर संबंधित एफपीओ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, महिला किसान और जन प्रतिनिधि उपस्थित हुए. पंकज राय ने कहा कि घंटों की बातचीत और उपलब्ध कागजातों के आधार पर यह तय किया गया है कि इस मामले को लेकर संगठन कानूनी सलाह लेगी और दोबारा जल्द एक और पंचायत लगाई जाएगी, जिसमें इस एफपीओ के काम काज को देख रही संस्था जीटी भारत के प्रतिनिधि को भी उपलब्ध रहने के लिए कहा जाएगा. इसके बाद विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. संगठन के पास राज्य में संचालित और भी एफपीओ से इस प्रकार की शिकायत आ रही है.
अब कंपनी का अकाउंट है खाली
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्य कुमारी बिजोला हेंब्रम ने इस धोखाधड़ी का आरोप कंपनी के सीइओ एलेन अनुकूल सोरेन पर लगाते हुए कहा कि हम लोगों ने उसपर विश्वास किया लेकिन वो हमें ही ठग कर चला गया. उन्होंने आगे बताया कि सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर करके बैंक से लोन निकाला गया. बैंक के लोग भी जब लोन सैंक्शन करने से पहले कंपनी के ऑफिस में आए तब भी उन्होंने किसी भी सदस्य से लोन के बारे में नहीं पूछा. इसके बाद लोन पास हो गया और कुछ-कुछ खरीदने का बहाना और बिज़नेस करने का बहाना बनाकर चेक में साइन कराया गया और पैसे निकाले गए. लेकिन तब भी किसी को जानकारी नहीं मिली कि बैंक से लोन लिया गया है. इसके बाद जब बैंक से किश्त जमा करने के लिए फोन आया तब उन्हें मालूम चला कि उनकी कंपनी के नाम से लोन लिया गया है. इसके बाद जब उन्होंने जब इस बारे में एलेन से बात की तो उसने फोन उठाना बंद कर दिया और फरार हो गया. बोकारो में स्थित जीटी भारत कंपनी का ऑफिस में बंद पाया गया. अब FPO के सदस्यों के पास कोई उपाय नहीं नजर आ रहा है. कंपनी का अकाउंट खाली हो गया. अब कंपनी चलाने के पैसे नहीं है.