भारत की कॉफी निर्यात में 27 फीसदी उछाल, रोबस्टा ने किया कमाल, लेकिन अरेबिका क्यों पीछे छूटा?

भारत में भी कॉफी पीने का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है. खासकर शहरों में युवा पीढ़ी के बीच कॉफी का क्रेज बढ़ा है. कैफे कल्चर और इंस्टेंट कॉफी के बढ़ते उपयोग ने घरेलू खपत को भी मजबूत किया है. इससे किसानों और उद्योग को दोहरा फायदा मिल रहा है, एक तरफ निर्यात बढ़ रहा है और दूसरी तरफ देश के अंदर भी मांग मजबूत हो रही है.

नई दिल्ली | Updated On: 5 May, 2026 | 04:18 PM

coffee exports: भारत की कॉफी इंडस्ट्री साल 2026 की शुरुआत से ही बेहतर प्रदर्शन कर रही है. जनवरी से अप्रैल के बीच देश के कॉफी निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में भारत ने 1.74 लाख टन कॉफी का निर्यात किया, जो पिछले साल इसी समय 1.37 लाख टन था. यानी करीब 26.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह बढ़त बताती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कॉफी की मांग लगातार मजबूत हो रही है.

निर्यात बढ़ा तो कमाई भी हुई ज्यादा

कॉफी निर्यात में बढ़ोतरी का असर सीधे कमाई पर भी दिखा है. इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच भारत को कॉफी निर्यात से 936.57 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 757.07 करोड़ रुपये था. इसका मतलब है कि करीब  180 करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त कमाई हुई है.

इसके साथ ही प्रति टन कॉफी की कीमत में भी हल्की बढ़त देखने को मिली है. पहले जहां एक टन कॉफी की औसत कीमत 4,75,023 रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 4,94,766 रुपये प्रति टन हो गई है. इससे साफ है कि भारतीय कॉफी को वैश्विक बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं.

रोबस्टा और इंस्टेंट कॉफी ने दिखाई ताकत

इस पूरे उछाल में सबसे बड़ा योगदान रोबस्टा कॉफी का रहा है. रोबस्टा कॉफी का निर्यात जनवरी से अप्रैल के बीच 36 प्रतिशत बढ़कर 85,168 टन हो गया, जबकि पिछले साल यह 62,736 टन था. इसी तरह इंस्टेंट कॉफी की मांग भी तेजी से बढ़ी है. इस साल 20,332 टन इंस्टेंट कॉफी का निर्यात हुआ, जो पिछले साल 17,504 टन था. इतना ही नहीं, इंस्टेंट कॉफी का री-एक्सपोर्ट भी बढ़कर 38,169 टन तक पहुंच गया है, जो पहले 30,274 टन था. इससे यह समझ आता है कि दुनिया भर में रेडी-टू-ड्रिंक और इंस्टेंट प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और भारत इस ट्रेंड का फायदा उठा रहा है.

अरेबिका कॉफी में आई गिरावट

जहां एक तरफ रोबस्टा और इंस्टेंट कॉफी की मांग बढ़ी है, वहीं अरेबिका कॉफी के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है. इस साल अरेबिका का निर्यात घटकर 30,589 टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 72,479 टन था. इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव, मौसम का असर और खरीदारों की बदलती पसंद.

वैश्विक बाजार में मजबूत हो रही भारत की पहचान

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल रोबस्टा कॉफी सप्लायर नहीं रह गया है. देश अब अरेबिका, रोबस्टा और इंस्टेंट तीनों तरह की कॉफी का निर्यात कर रहा है. इससे भारत की पहचान वैश्विक कॉफी बाजार में और मजबूत हो रही है. साथ ही, भारत की कॉफी इंडस्ट्री अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां विविधता और गुणवत्ता दोनों पर जोर दिया जा रहा है.

रिकॉर्ड उत्पादन की ओर बढ़ता भारत

कॉफी बोर्ड के अनुमान के अनुसार, 2025-26 सीजन में भारत का कुल कॉफी उत्पादन रिकॉर्ड 4,03,000 टन तक पहुंच सकता है. इसमें अरेबिका का उत्पादन लगभग 1,18,000 टन और रोबस्टा का उत्पादन 2,84,000 टन से ज्यादा होने की उम्मीद है. यह बढ़ोतरी खासकर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बेहतर पैदावार और अनुकूल मौसम के कारण हो रही है.

मौसम बना बड़ी चुनौती

हालांकि, इस बढ़ती रफ्तार के बीच मौसम और जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चिंता बने हुए हैं. अगर बारिश समय पर नहीं होती या तापमान में ज्यादा बदलाव होता है, तो इसका असर सीधे कॉफी उत्पादन पर पड़ सकता है. इसलिए किसानों और उद्योग से जुड़े लोगों के लिए मौसम की अनिश्चितता एक बड़ा जोखिम बनी हुई है.

देश में भी बढ़ रही कॉफी की मांग

भारत में भी कॉफी पीने का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है. खासकर शहरों में युवा पीढ़ी के बीच कॉफी का क्रेज बढ़ा है. कैफे कल्चर और इंस्टेंट कॉफी के बढ़ते उपयोग ने घरेलू खपत को भी मजबूत किया है. इससे किसानों और उद्योग को दोहरा फायदा मिल रहा है, एक तरफ निर्यात बढ़ रहा है और दूसरी तरफ देश के अंदर भी मांग मजबूत हो रही है.

Published: 5 May, 2026 | 04:17 PM

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