Tamil Nadu Assembly Elections Results: तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में टीवीके की सरकार बनते दिख रही है. तमिलागा वेट्री कझगम (टीवीक) के प्रमुख विजय ने अपने चुनावी वादों में किसानों की पूरी कर्जमाफी का ऐलान किया है और कहा है था कि अगर वह सत्ता में आए तो फसल नुकसान का 100 फीसदी बीमा राशि किसानों को देंगे. जबकि, बुनकरों को 30 हजार रुपये सालाना देंगे और 10 लाख रुपये का बीमा देंगे.
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर मतगणना जारी है और रुझानों में एक्टर विजय की पार्टी तमिलागा वेट्री कझगम (टीवीके) ने 110 सीटों पर बढ़त बना ली है, बहुमत 118 सीटों पर है. जबकि, सत्ता में रही डीएमके (DMK) गठबंधन को कड़ी चुनौती मिली है और 2021 से सीएम एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) दूसरे नंबर की पार्टी बनती दिख रही है.
किसानों ने बदल दिया तमिलनाडु चुनाव का नतीजा
इस चुनावी उलटफेर से किसानों को अधिक लाभ मिलने का रास्ता साफ होने की बात कही जा रही है. क्योंकि, सत्ता की ओर बढ़ रहे टीवीके के विजय ने किसानों, ग्रामीणों के लिए कई बड़े वादे किए थे, जिन्हें सरकार बनने पर पूरा करना होगा. TVK प्रमुख विजय ने 23 अप्रैल के चुनाव जीतने के बाद सत्ता में आने पर किसानों के फसल ऋण माफ करने का आश्वासन दिया है. तिरुपूर में जनसभा में बोलते हुए विजय ने कहा कि वह किसानों के फसल ऋण माफ करेंगे.
धान का एमएसपी 3500 रुपये और गन्ना का 4500 रुपये देने का भरोसा
विजय ने कहा था कि 5 एकड़ से कम जमीन वाले छोटे किसानों के लिए फसल ऋण की पूरी तरह माफ किया जाएगा. 5 एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों के लिए 50 फीसदी माफी दी जाएगी. इसके अलावा उन्होंने धान के लिए 3,500 रुपये प्रति क्विंटल और गन्ने के लिए 4,500 रुपये प्रति टन देने का वादा किया. अभिनेता-राजनेता ने आरोप लगाया कि DMK शासन के दौरान कई MSMEs बंद हो गए और यह संख्या देश में दूसरी सबसे अधिक थी.
डीएमके के वादों के झांसे में नहीं आए किसान
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में उनकी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने विधानसभा चुनावों में फिर से जीत दर्ज करने का दावा ठोकते हुए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 3500 रुपये प्रति क्विंटल करने का वादा किया था. जबकि, 20 लाख किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त आधुनिक पंपसेट देने के साथ ही अलग से कृषि बजट लाने को प्राथमिकता देने का भरोसा दिया. इसके अलावा जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना के तहत नकद राशि देने का वादा किया. लेकिन, चुनावी रुझान बता रहे हैं कि किसानों ने एमके स्टालिन के वादों पर वोट नहीं दिया है.