West Bengal Assembly Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में जाते हुए दिख रहे हैं. बीजेपी सुबह आठ बजे से ही लगातार बढ़त बनाए हुए है. अभी वह 194 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि टीएमसी 90 सीटों पर आगे है. शुरुआती रुझान राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत दे रहे हैं. अगर, शुरुआती रुझान रिजल्ट में बदल जाते हैं, तो मुख्यमंत्री बनता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत हो जाएगा. हालांकि, बीजेपी ने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक खुद चुनावी मैदान में डटे रहे हैं. इससे जनता में विश्वास जागा और लोगों ने बीजेपी के पक्ष में घरों से निकलकर वोट किया.
हालांकि, जानकारों का कहना है कि महिला मतदाताओं ने भी इस बार बीजेपी को वोट किया है. ऐसे महिला वोटर्स लंबे समय से टीएमसी की चुनावी जीत की बड़ी ताकत रही हैं. पिछले एक दशक में ममता बनर्जी ने महिलाओं पर खास ध्यान देते हुए कई योजनाएं शुरू कीं, जैसे लक्ष्मीर भंडार के तहत सीधा पैसा देना और कन्याश्री योजना के जरिए लड़कियों को समर्थन देना. वहीं 2026 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी ने भी महिलाओं को ध्यान में रखकर अपने वादे और योजनाएं पेश कीं. आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस भी चुनाव में बड़ा मुद्दा बना, जिस पर बीजेपी ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर टीएमसी को घेरा. बीजेपी ने इस मामले में पीड़िता की मां को पनिहाटी सीट से उम्मीदवार भी बनाया. इससे राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर माहौल बना और टीएमसी को नुकसान उठाना पड़ा.
बीजेपी ने बनाई अचूक रणनीति
करीब 15 साल पहले ममता बनर्जी ने ‘मा, माटी, मानुष’ के नारे के दम पर पश्चिम बंगाल में 34 साल पुरानी वाम सरकार को खत्म किया था. इसके बाद यही नारा टीएमसी की लगातार तीन जीतों की बड़ी वजह बना. लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में यह रणनीति कमजोर पड़ गई. इस बार पांच नए मुद्दे- मुस्लिम वोटर, महिला वोटर, प्रवासी, मतुआ समुदाय और बीजेपी की मजबूत चुनावी मशीनरी ममता बनर्जी की जीत की राह को चुनौती देते दिख रहे हैं.
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टीएमसी की संभावित हार के पीछे कई वजहें
वहीं, कई सियासी पंडित पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों में टीएमसी की संभावित हार के पीछे कई वजहें मान रहे हैं. इनमें बीजेपी का मजबूत संगठन और आक्रामक प्रचार, सत्ता के खिलाफ नाराजगी (एंटी-इंकम्बेंसी) और पार्टी के अंदर की खींचतान शामिल हैं. इसके अलावा विकास के मुद्दों पर लोगों की असंतुष्टि, केंद्रीय बलों की मौजूदगी और विपक्ष के तौर पर बीजेपी का वोटरों को एकजुट करना भी अहम कारण माना जा रहा है.
इस बार मतदान का टूट गया रिकॉर्ड
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं, जिन पर मतदान हुआ था. पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हुई थी, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान हुआ. एक सीट पर दोबारा मतदान होना है, इसलिए आज 293 सीटों के नतीजे घोषित किए जा रहे हैं. खास बात यह है कि इस चुनाव के दोनों चरणों में कुल 92.47 फीसदी मतदान हुआ, जो पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान है. हालांकि यहां पहले भी अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा वोटिंग होती रही है, लेकिन शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में 90 फीसदी से अधिक मतदान होना एक रिकॉर्ड है. इससे पहले सबसे ज्यादा मतदान 2011 के विधानसभा चुनाव में 84.72 फीसदी दर्ज हुआ था, लेकिन इस बार वह रिकॉर्ड भी टूट गया है.