मध्य प्रदेश के 86 किसानों पर प्रशासन के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की गई है और 2.20 लाख रुपये से अधिक राशि का जुर्माना लगाया है. इससे पहले 29 किसानों पर 42 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था और एफआईआर भी की गई थी. राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि यह किसान गेहूं की पराली जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद खेतों में फसल अवशेष जलाते पाए गए हैं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है.
पराली जलाने में मध्य प्रदेश के आंकड़े निराशाजनक
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में गेहूं की पराली या अन्य रबी फसलों की पराली जलाने पर रोक लगा रखी है. इसके बावजूद राज्य में सर्वाधिक पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए हैं. इस सीजन अब तक पराली जलाने के मामलों में मध्य प्रदेश सबसे आगे निकल गया है. बीते रविवार को देशभर में दर्ज 1,815 मामलों में से अकेले 1,058 मामले मध्य प्रदेश से सामने आए. इसके साथ ही इस सीजन में राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 18,376 हो गई है. वहीं, 19 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार देशभर में पराली जलाने के कुल 25,976 मामले सामने आए हैं.
कलेक्टर ने बताया 86 किसानों पर कार्रवाई
प्रतिबंध के बाद भी पराली जलाने के मामले सामने आने पर जिला स्तर पर किसानों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है. गुना जिले के कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बयान में कहा कि सेटेलाईट मॉनिटरिंग के बाद करीब 86 किसानों को दोषी पाया गया है. इन किसानों के खिलाफ विधिक कार्रवाई के लिए एफआईआर दर्ज कराई गई है और 2.20 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है. उन्होंने कहा कि पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए ब्लॉक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
3 ब्लॉक को गांवों में नरवाई जलाने पर 2.20 लाख का जुर्माना
जिला प्रशासन के अनुसार विकासखण्ड-बमौरी के नरवाई जलाने वाले 59 किसानों के पंचनामा तैयार कर राशि 1,52,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. वहीं, विकासखण्ड आरोन में 27 किसानों पर 67,500 रुपये का जुर्माना की संस्तुति अधिकारी राजस्व को भेजी गई है. इसी क्रम में विकासखण्ड गुना के ग्राम-पगारा में नरवाई जलने की घटना के आधार पर कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया है और नरवाई में आग लगी पाई जाने के कारण कुछ अज्ञात लोगों पर भी एफआईआर दर्ज कराई गई.
पहले भी इन जिलों के किसानों पर हुई कार्रवाई
इससे पहले देवास, नर्मदापुरम में उल्लंघन करने वाले 14 किसानों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इसके अलावा 15 किसानों पर 42 हजार रुपये से ज्यादा रकम का जुर्माना लगाया गया है. बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं की नरवाई (पराली) या फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. राज्य सरकार ने नरवाई जलाने पर प्रति घटना 15 हजार रुपये तक का किसानों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. बावजूद कई जिलों में गेहूं कटाई के बाद नरवाई (गेहूं का बचा डंठल) जलाने के मामले सामने आ रहे हैं.
नरवाई जलाने से खेती को भयंकर नुकसान
सरकारी आदेश में कहा गया है कि खेतों में फसल अवशेष या गेहूं की नरवाई जलाने से मिट्टी के लाभदायक सूक्ष्म जीव और जैविक कार्बन नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है. इसके साथ ही पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. किसानों से अपील की गई है कि वे नरवाई न जलाकर उसका उपयोग मल्चिंग, स्ट्रा रीपर से भूसा बनाने, पशु आहार या भूसे की बिक्री के जरिए अतिरिक्त कमाई हासिल करें