Dairy Farming: पशुपालन में हरे चारे का महत्व हमेशा से रहा है, लेकिन गर्मी के मौसम में इसकी जरूरत और भी बढ़ जाती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, ज्वार से तैयार होने वाला हरा चारा, जिसे कई क्षेत्रों में चरी के नाम से जाना जाता है, दुधारू पशुओं के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. ये चारा कम लागत में तैयार हो जाता है और पशुओं को जरूरी पोषण देने के साथ उनके स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.
गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए बेहतरीन आहार
ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीनों में तापमान काफी अधिक रहता है. इस दौरान पशुओं को ऐसे आहार की जरूरत होती है जो उन्हें ऊर्जा देने के साथ शरीर को संतुलित पोषण भी प्रदान करे. विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वार का हरा चारा इस आवश्यकता को पूरा करता है. इसकी हरी पत्तियां और नरम तने आसानी से पच जाते हैं, जिससे पशुओं को भोजन से अधिक पोषण मिलता है. यह चारा तेजी से बढ़ता है और बुवाई के लगभग 40 से 50 दिनों बाद पशुओं को खिलाने के लिए तैयार हो जाता है. इसी वजह से यह किसानों और पशुपालकों के बीच काफी लोकप्रिय है.
पाचन मजबूत, स्वास्थ्य बेहतर
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, हरा ज्वार चारा पशुओं के पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है. जब पशुओं का पाचन बेहतर होता है, तो वे चारे का पूरा लाभ उठा पाते हैं. इससे उनके शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है और कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम हो जाता है. इसके नियमित सेवन से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है. स्वस्थ पशु कम बीमार पड़ते हैं, जिससे पशुपालकों का इलाज और दवा पर होने वाला खर्च भी घट सकता है.
दूध उत्पादन बढ़ाने में मददगार
दुधारू पशुओं के लिए ये चारा विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है. इसमें ऊर्जा, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो दूध उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होते हैं. पशुपालन विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित मात्रा में इस हरे चारे को खिलाने से पशुओं की भूख बढ़ती है और उनका शारीरिक विकास भी बेहतर होता है. गर्मियों में जब सूखे चारे की गुणवत्ता कम हो जाती है, तब ज्वार का हरा चारा एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आता है. इससे पशुओं को ताजा और पौष्टिक भोजन मिलता है.
कम खर्च में ज्यादा फायदा
आर्थिक दृष्टि से भी ज्वार का हरा चारा किसानों के लिए लाभकारी माना जाता है. इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम लागत आती है और सिंचाई की आवश्यकता भी ज्यादा नहीं होती. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बीजों से इसकी खेती आसानी से की जा सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह चारा बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत को कम करता है. इससे पशुपालकों की लागत घटती है और दूध उत्पादन बढ़ने के कारण आय में भी सुधार होता है. यही वजह है कि आज यह हरा चारा छोटे, मध्यम और बड़े सभी पशुपालकों की पहली पसंद बनता जा रहा है.