केंद्र सरकार ने कहा है कि अगर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में 10 प्रतिशत से ज्यादा बारिश की कमी होती है, तो इसका सीधा असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ता है. राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि जब पूरे देश में मॉनसून की कमी 10 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट देखने को मिलती है. उन्होंने कहा कि 1982, 1987, 2002, 2004, 2009, 2014 और 2015 जैसे बड़े सूखे और अल नीनो वाले वर्षों में देश में 12 से 22 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई थी. इन वर्षों में मॉनसून कमजोर रहने के कारण खरीफ फसलों के उत्पादन पर अलग-अलग स्तर पर असर पड़ा.
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि हाल के वर्षों में कमजोर मॉनसून का फसलों पर असर पहले की तुलना में कम हुआ है. इसकी वजह सिंचाई का दायरा बढ़ना, सूखा सहन करने वाली बेहतर किस्मों का इस्तेमाल, मौसम की अधिक सटीक भविष्यवाणी, किसानों को समय पर सलाह, बेहतर कृषि प्रबंधन, राज्यों की आकस्मिक योजनाएं और सरकार के बढ़े हुए हस्तक्षेप हैं. उन्होंने बताया कि 2026-27 खरीफ सीजन की बुवाई अभी जारी है. इसलिए इस कृषि वर्ष (जुलाई-जून) की खरीफ फसलों के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमान अभी जारी नहीं किए गए हैं.
कपास की खेती का रकबा हुआ कम
केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में कपास उत्पादन में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह कपास की खेती का रकबा कम होना है. बेहतर मुनाफा मिलने के कारण कई किसानों ने कपास छोड़कर दूसरी फसलों की खेती शुरू कर दी है.
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352.48 लाख गांठ कपास का उत्पादन
राज्यसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि 2020-21 में देश में 352.48 लाख गांठ (बेल) कपास का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में घटकर 290.91 लाख गांठ (अनंतिम) रह गया. हालांकि, इस दौरान कपास की उत्पादकता लगभग स्थिर रही और 428 से 451 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच बनी रही. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में करीब 19 फीसदी और घरेलू बाजार (एस-6 किस्म) में करीब 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. देश में जरूरत के अनुसार कपास और सूती धागे का आयात भी किया जाता है, ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे.
52,986.79 टन मसालों की प्रोसेसिंग
केंद्र सरकार ने बताया है कि देश के स्पाइस पार्कों में वर्ष 2025-26 के दौरान 52,986.79 टन मसालों की प्रोसेसिंग की गई, जिनकी कीमत करीब 579.06 करोड़ रुपये रही. राज्यसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि इसी अवधि में 12,040 टन मसाले और मसाला उत्पाद, जिनकी कीमत करीब 201.09 करोड़ रुपये थी, उनका निर्यात किया गया या उन्हें निर्यातकों को उपलब्ध कराया गया. उन्होंने कहा कि स्पाइस पार्कों के गोदामों में 16,235 टन मसालों का भंडारण भी किया गया, जिनकी अनुमानित कीमत 206.63 करोड़ रुपये है.
1.89 करोड़ किसान e-NAM प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत
मंत्री ने बताया कि स्पाइसेज बोर्ड अब तक देशभर में 8 फसल-विशिष्ट स्पाइस पार्क स्थापित कर चुका है, जहां मसालों की प्रोसेसिंग, भंडारण और निर्यात से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. केंद्र सरकार ने बताया है कि 30 जून 2026 तक देश के 1.89 करोड़ किसान और 2.78 लाख व्यापारी ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हो चुके हैं. राज्यसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ई-नाम पर अंतरराज्यीय कृषि कारोबार में लगातार बढ़ोतरी हुई है. यह कारोबार 2018-19 में 563 टन (37 लाख रुपये) से बढ़कर 2025-26 में 2,984.3 टन (14.28 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है. उन्होंने बताया कि अब तक ई-नाम के जरिए 28,566 टन कृषि उपज का अंतरराज्यीय व्यापार हुआ है, जिसकी कुल कीमत 83.95 करोड़ रुपये रही. मंत्री ने कहा कि देश के 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,656 मंडियों को ई-नाम से जोड़ा जा चुका है. इनमें जनवरी से जून 2026 के बीच 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 134 नई मंडियां भी शामिल की गई हैं.