गेहूं की नरवाई जलाने पर सरकार ने लगाई रोक, दोषी पाए जाने पर किसानों पर 15 हजार जुर्माना लगेगा 

Wheat Stubble Burning Banned: मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार चौधरी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत आदेश जारी किया है. जारी आदेश के अनुसार फसल कटाई के उपरांत खेतों में बचे अवशेषों या नरवाई जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 10 Mar, 2026 | 04:36 PM

Madhya Pradesh News: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सख्ती बढ़ाने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए नियम कड़े कर दिए हैं. गेहूं कटाई करने वाले किसानों से कहा गया है कि वे नरवाई, डंठल में आग नहीं लगाएं. इस पर राज्य सरकार ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. इस संबंध में जिलाधिकारियों को नोटीफिकेशन भेजा गया है, जिसमें जिले और ब्लॉक के साथ ही गांव स्तर पर किसानों को जागरूक करने को कहा गया है. सरकार की ओर से कहा गया है कि नरवाई जलाते पाए जाने पर किसानों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 और वायु (प्रदूषण, निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 सहित अन्य प्रासंगिक अधिनियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी.

गेहूं कटाई के बाद नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा

मध्य प्रदेश सरकार ने जिलाधिकारियों को भेजे निर्देश में कहा है कि किसी भी तरह से गेहूं कटाई के बाद नरवाई जलाने के मामले सामने नहीं आने चाहिए. इसके बाद शिवपुरी जिले के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार चौधरी ने जारी बयान में कहा है कि जिले में नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा रहा है. शासन के पर्यावरण विभाग की ओर से अधिसूचना के अनुपालन में जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेष ठूंठ एवं डंठल (पराली/नरवाई) को जलाने पर रोक लगाई जाती है.

मजिस्ट्रेट ने बीएनस की धारा 163 के तहत जारी किए आदेश

शिवपुरी के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार चौधरी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत आदेश जारी किया है. जारी आदेश के अनुसार फसल कटाई के उपरांत खेतों में बचे अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण एवं आगजनी की घटनाओं की संभावना बढ़ती हैं, जिससे आमजन के स्वास्थ्य, पर्यावरण और भूमि की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिले में नरवाई जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है.

हार्वेस्टर मशीन संचालकों पर सख्ती बढ़ाई गई

जिला मजिस्ट्रेट के आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि हार्वेस्टर मशीन संचालकों को स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग करना अनिवार्य होगा, ताकि फसल अवशेषों का खेत में ही भूसे के रूप में निपटान किया जा सके. साथ ही प्रत्येक कम्बाइन हार्वेस्टर संचालक को फसल कटाई प्रारंभ करने से पूर्व कृषि विभाग में सहायक कृषि यंत्री, कृषि अभियांत्रिकी कार्यालय शिवपुरी में पंजीयन कराना होगा. इसके अलावा मशीन और ऑपरेटर से संबंधित जानकारी देनी होगी. यदि कोई कृषक स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना फसल कटाई कराने के लिए दबाव बनाता है, तो संबंधित हार्वेस्टर संचालक इसकी सूचना ग्राम पंचायत के निगरानी अधिकारी, पंचायत सचिव, संबंधित थाना, नायब तहसीलदार, तहसीलदार या अनुविभागीय दंडाधिकारी को देगा.

दोषी पाए जाने पर 15 हजार रुपये लगेगा जुर्माना

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार आदेश का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कृषकों से पर्यावरण मुआवजा वसूला जाएगा. दो एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों पर 2,500 रुपये जुर्माना लगेगा. वहीं, दो से पांच एकड़ तक भूमि वाले किसानों पर 5,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15,000 रुपये प्रति घटना पर पर्यावरण मुआवजा वसूला जाएगा. साथ ही अधीक्षण यंत्री, मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, शिवपुरी को निर्देशित किया गया है कि ट्रांसफार्मरों के आसपास संभावित आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के लिए निरीक्षण एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें.

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Published: 10 Mar, 2026 | 04:34 PM
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