कम कीमतों से बढ़ी विदेशी मांग, 2025-26 में भारत का मक्का निर्यात 24 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान
Corn Export: भारत का मक्का निर्यात 2025-26 में रिकॉर्ड 24 लाख टन तक पहुंच सकता है. बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों से बढ़ती मांग के कारण निर्यात में तेज उछाल आया है. वहीं देश में मक्का उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है.
Maize Export India: भारत में पिछले कुछ वर्षों में मक्का की खेती तेजी से बढ़ी है. अब इसका फायदा निर्यात के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है. देश में मक्का का उत्पादन बढ़ा है और कीमतें भी कम हैं, जिसके कारण पड़ोसी देशों से इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इसी वजह से विपणन वर्ष 2025-26 में भारत का मक्का निर्यात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है. अगर मौजूदा रफ्तार बनी रही, तो देश मक्का निर्यात के मामले में नया रिकॉर्ड बना सकता है. इससे किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने की संभावना है, वहीं कृषि व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा.
पड़ोसी देशों से बढ़ी भारतीय मक्का की मांग
हाल के महीनों में बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और वियतनाम जैसे देशों में भारतीय मक्का की मांग तेजी से बढ़ी है. इसकी बड़ी वजह भारत में मक्का की अपेक्षाकृत कम कीमतें और सामान पहुंचाने में कम खर्च आना है. इन देशों तक मक्का की छोटी-छोटी खेप आसानी से भेजी जा सकती हैं, जिससे व्यापारियों को भी सुविधा मिलती है. यही कारण है कि, भारतीय मक्का का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और विदेशी बाजारों में इसकी मांग मजबूत बनी हुई है.
निर्यात में तीन गुना से ज्यादा उछाल
विपणन वर्ष 2025-26 के पहले पांच महीनों में भारत से करीब 10 लाख टन मक्का विदेश भेजा जा चुका है. यह पिछले साल के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा है. इस समय हर महीने करीब 2 लाख टन मक्का दूसरे देशों को निर्यात किया जा रहा है. अगर यही रफ्तार बनी रही, तो पूरे साल में मक्का का निर्यात 24 लाख टन तक पहुंच सकता है. इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के ज्यादा मौके मिलेंगे और कृषि कारोबार को भी फायदा होने की उम्मीद है.
उत्पादन ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत में मक्का की खेती और उत्पादन दोनों लगातार बढ़ रहे हैं. अच्छी बारिश, बेहतर बीजों के इस्तेमाल और खेती का रकबा बढ़ने से मक्का की पैदावार में लगातार इजाफा हो रहा है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में देश का मक्का उत्पादन करीब 5.5 करोड़ टन तक पहुंच सकता है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा.
पिछले साल अच्छी मॉनसूनी बारिश और किसानों को मिले अच्छे दामों ने भी मक्का उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. वहीं, इस साल मॉनसून की शुरुआत भले ही थोड़ी धीमी रही हो, लेकिन किसानों का मक्का की खेती के प्रति उत्साह कम नहीं हुआ है. जून के मध्य तक मक्का की बुवाई पिछले साल के मुकाबले ज्यादा क्षेत्र में की गई है. पिछले खरीफ सीजन में मक्का की खेती रिकॉर्ड 98 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हुई थी, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है.
MSP से नीचे चल रहे हैं बाजार भाव
मक्का का उत्पादन बढ़ने और निर्यात में तेजी आने से खेती को फायदा जरूर हो रहा है, लेकिन किसानों की एक बड़ी चिंता अभी भी बनी हुई है. कई राज्यों में मक्का के बाजार भाव सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रहे हैं.
सरकार ने 2026-27 के लिए मक्का का MSP बढ़ाकर 2,410 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, लेकिन कई मंडियों में किसानों को इससे कम कीमत मिल रही है. हालांकि अच्छी बात यह है कि हाल के दिनों में विदेशों से बढ़ी मांग के कारण मक्का के दाम में कुछ सुधार देखने को मिला है. किसानों को उम्मीद है कि निर्यात बढ़ने से आगे चलकर उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा.
अगले साल घट सकता है निर्यात
चालू वर्ष में निर्यात मजबूत रहेगा, लेकिन अगले विपणन वर्ष 2026-27 में इसमें कमी आ सकती है. इसकी वजह घरेलू मांग में लगातार बढ़ोतरी और उपलब्ध स्टॉक पर दबाव माना जा रहा है. अगर देश के भीतर पशु आहार, पोल्ट्री उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मक्का की खपत बढ़ती रही, तो निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा कम हो सकती है.
मक्का की बढ़ती वैश्विक मांग भारत के किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है. निर्यात बढ़ने से भविष्य में किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बन सकती है. हालांकि बाजार भाव और उत्पादन लागत पर नजर रखना भी जरूरी होगा.