भारतीय मसाला उद्योग को मिला नेदरलैंड्स‌ का साथ, क्या अब बदल जाएंगे बाजार के नियम?

स्पाइस बोर्ड किसानों को आधुनिक और सुरक्षित खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है. इसके तहत गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट और साफ-सुथरी प्रोसेसिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है. साथ ही किसानों को ट्रेनिंग देकर उनकी क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है.

नई दिल्ली | Updated On: 7 May, 2026 | 10:26 AM

India spice industry: भारत का मसाला उद्योग अब वैश्विक बाजार में नई दिशा की ओर बढ़ रहा है. दुनिया भर में भारतीय मसालों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब केवल स्वाद और गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि टिकाऊ खेती, फूड सेफ्टी और ट्रेसबिलिटी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बड़ी शर्त बनती जा रही है.

इन्हीं मुद्दों को लेकर दक्षिण भारत में नेदरलैंड्स‌ के महावाणिज्य दूतावास और विश्व मसाला संगठन (World Spice Organisation – WSO) ने मिलकर “सस्टेनेबल स्पाइस वैल्यू चेन” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया. इस कार्यक्रम में भारत और यूरोप के कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और मसाला उद्योग को भविष्य के लिए तैयार करने पर चर्चा की.

वैश्विक बाजार में बदल रही हैं मांगें

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, आज दुनिया भर के खरीदार केवल मसालों की गुणवत्ता नहीं देख रहे हैं, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि मसाले कहां और कैसे उगाए गए हैं. अब पर्यावरण सुरक्षा, किसानों की स्थिति, फूड सेफ्टी और सप्लाई चेन की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी बहुत अहम हो गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वही देश और कंपनियां आगे बढ़ेंगी जो इन मानकों को पूरा करेंगी.

नीदरलैंड ने दिया सहयोग का संदेश

दक्षिण भारत के लिए नीदरलैंड के महावाणिज्य दूत इवोट डे विट ने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए मजबूत ट्रेसबिलिटी सिस्टम, प्रमाणन और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि मसाला उद्योग में टिकाऊ विकास तभी संभव है जब छोटे किसानों, महिलाओं और किसान समूहों को भी बराबर अवसर मिलें. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार, निजी कंपनियां, रिसर्च संस्थान और अंतरराष्ट्रीय संगठन मिलकर काम करेंगे तभी टिकाऊ समाधान बड़े स्तर पर लागू हो पाएंगे.

180 से ज्यादा देशों में पहुंचते हैं भारतीय मसाले

भारतीय मसाला बोर्ड के मार्केटिंग डायरेक्टर बी.एन झा ने मीडिया को बताया कि भारत दुनिया भर में मसालों का बड़ा निर्यातक है. उन्होंने कहा कि भारत 250 से ज्यादा तरह के मसाले और वैल्यू एडेड उत्पाद 180 से अधिक देशों को निर्यात करता है. उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय बाजार में भारतीय मसालों के लिए अभी भी काफी संभावनाएं मौजूद हैं.

टिकाऊ खेती पर बढ़ रहा जोर

स्पाइस बोर्ड किसानों को आधुनिक और सुरक्षित खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है. इसके तहत गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट और साफ-सुथरी प्रोसेसिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है. साथ ही किसानों को ट्रेनिंग देकर उनकी क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है.

🇪🇺 यूरोप के नए नियम बन रहे चुनौती

यूरोप में ऐसे उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है जो टिकाऊ तरीके से तैयार किए गए हों और जिनकी पूरी ट्रेसबिलिटी उपलब्ध हो. यूरोपीय यूनियन के नए नियमों के कारण अब फूड सेफ्टी और सस्टेनेबिलिटी वैश्विक व्यापार का अहम हिस्सा बन चुके हैं.

भारत-नीदरलैंड साझेदारी होगी मजबूत

भारत में नेदरलैंड्स‌ की कृषि सलाहकार मैरियन वैन शाइक ने कहा कि आज पूरी दुनिया में टिकाऊ कृषि सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो चुकी है. उन्होंने कहा कि किसानों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत है ताकि नई तकनीकों और जानकारी का फायदा सभी तक पहुंच सके. उन्होंने यह भी बताया कि नीदरलैंड संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के तहत भारत के साथ कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है.

भविष्य में सस्टेनेबिलिटी तय करेगी बाजार

आने वाले समय में मसाला निर्यात करने वाले देशों की सफलता सस्टेनेबिलिटी पर निर्भर करेगी. अब अंतरराष्ट्रीय खरीदार केवल मसाले की क्वालिटी नहीं देख रहे, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि उत्पादन के दौरान पर्यावरण का कितना ध्यान रखा गया और मजदूरों की स्थिति कैसी है. इसके अलावा सप्लाई चेन में पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी भी बहुत जरूरी हो गई है.

डिजिटल ट्रेसबिलिटी पर बढ़ रहा फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय निर्यातकों और किसान समूहों को डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम मजबूत करना होगा. इससे खरीदारों को यह जानकारी मिल सकेगी कि मसाला किस खेत से आया, कैसे तैयार हुआ और उसकी गुणवत्ता कैसी है.

NSSP कार्यक्रम से जुड़े 35 हजार किसान

मुरलीधरा मेनन ने बताया कि नेशनल सस्टेनेबल स्पाइसेस प्रोग्राम (NSSP) की शुरुआत 2019 में की गई थी. यह कार्यक्रम इस समय मिर्च, जीरा, धनिया, हल्दी और काली मिर्च जैसी फसलों पर काम कर रहा है. देश के कई राज्यों में चल रहे इस कार्यक्रम से अब तक 35 हजार से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं. इसमें किसान उत्पादक संगठन, निर्यातक, व्यापारी और रिटेल कंपनियां भी शामिल हैं.

किसानों को कैसे होगा फायदा?

अगर टिकाऊ खेती और बेहतर फूड सेफ्टी मानकों को सही तरीके से लागू किया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा. उन्हें बेहतर कीमत, विदेशी बाजारों तक पहुंच और लंबे समय तक स्थिर आय मिल सकती है. इसके अलावा पर्यावरण को नुकसान कम होगा और खेती भी ज्यादा सुरक्षित बनेगी.

Published: 7 May, 2026 | 08:17 AM

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