Crop Diversification: प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PJTSAU) ने सरकार को एक पॉलिसी पेपर सौंपा है, जिसमें खेती में बदलाव के लिए पांच साल की चरणबद्ध योजना सुझाई गई है. इस योजना का मकसद धान पर निर्भरता कम कर अन्य फसलों को बढ़ावा देना है. इस प्रस्ताव के अनुसार, जो किसान तय क्षेत्रों में धान की जगह दूसरी स्वीकृत फसलें उगाएंगे, उन्हें प्रति एकड़ 8,000 रुपये की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सहायता दी जाएगी. इसका उद्देश्य किसानों की आय के जोखिम को कम करना और उन्हें फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है. खास बात यह है कि इस पॉलिसी का लक्ष्य अगले पांच साल में धान के तहत आने वाले करीब 25 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण करना है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिफारिशें यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर एलदास जनैया और प्रोफेसर समरेंदु मोहंती ने तैयार की हैं, जिन्हें जल्द ही कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है. यूनिवर्सिटी अधिकारियों का कहना है कि यह एक स्वतंत्र फ्रेमवर्क है, जिससे सरकार अपने फैसले ले सकेगी. इस योजना में धान के विकल्प के तौर पर अरहर, सोयाबीन, मूंग, उड़द, ज्वार, बाजरा और चना जैसी फसलों को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है. साथ ही, रणनीति में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि किसानों को बेहतर समर्थन मिल सके.
25 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण
इन संस्थाओं के जरिए किसानों को गैर-धान फसलों के लिए स्थानीय और शहरी बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी और छोटे स्तर पर वैल्यू एडिशन (प्रसंस्करण) को भी बढ़ावा मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि यह संयुक्त रणनीति किसानों को कम समय में आर्थिक सहारा देने के साथ-साथ लंबे समय में टिकाऊ बाजार व्यवस्था बनाने पर केंद्रित है. इस नीति का लक्ष्य अगले पांच साल में धान के तहत आने वाले करीब 25 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण करना है.
चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा
इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जो बाजार की तैयारी और संस्थागत क्षमता के अनुसार आगे बढ़ेगा. पहले साल कुछ चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा, जिसमें 5 से 10 लाख एकड़ क्षेत्र शामिल होगा. दूसरे साल इसे बढ़ाकर करीब 10 लाख एकड़ तक किया जाएगा. तीसरे साल विस्तार के साथ 10 से 20 लाख एकड़ क्षेत्र कवर किया जाएगा, जबकि चौथे साल में इसे मजबूत करते हुए 20 लाख एकड़ तक पहुंचाया जाएगा. पांचवें साल तक यह योजना पूरी तरह लागू होकर 25 लाख एकड़ क्षेत्र तक पहुंचने की उम्मीद है.
धान का रकबा करीब तीन गुना बढ़ गया
अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह धीरे-धीरे विस्तार करने से सीखने, संस्थाओं को मजबूत करने और बाजार को समय के साथ ढालने में मदद मिलेगी. पॉलिसी पेपर में बताया गया है कि तेलंगाना में हाल के वर्षों में धान की खेती तेजी से बढ़ी है. 2016-17 से 2024-25 के बीच धान का रकबा करीब तीन गुना बढ़कर 41.6 लाख एकड़ से 118.8 लाख एकड़ हो गया. इसी दौरान कुल फसली क्षेत्र में धान की हिस्सेदारी 32 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंच गई. खास बात यह है कि धान के रकबे में हुई बढ़ोतरी (77 लाख एकड़) कुल फसली क्षेत्र की बढ़ोतरी (69 लाख एकड़) से भी ज्यादा रही. यानी पिछले 10 साल में खेती का लगभग पूरा विस्तार धान के लिए ही हुआ है, और करीब 8 लाख एकड़ जमीन अन्य फसलों, खासकर दलहन और तिलहन से हटकर धान की खेती में चली गई है.