DAP खाद की सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता, भारत करने जा रहा रिकॉर्ड आयात

हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है. रिपोर्ट के अनुसार ईरान संघर्ष और वैश्विक तनाव के कारण खाद आपूर्ति पर असर पड़ा है. इसी वजह से भारत सरकार पहले से ज्यादा मात्रा में खाद खरीदकर स्टॉक मजबूत करना चाहती है.

नई दिल्ली | Published: 13 May, 2026 | 11:23 AM

DAP import: भारत सरकार ने DAP खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए भारत अब एक ही टेंडर में रिकॉर्ड मात्रा में DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद आयात करने जा रहा है. जानकारी के मुताबिक देश करीब 13.5 लाख मीट्रिक टन DAP खरीदने की तैयारी में है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा सिंगल टेंडर आयात माना जा रहा है.

क्यों बढ़ी DAP की चिंता?

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक आयातकों में शामिल है. देश में खेती के लिए बड़ी मात्रा में DAP खाद की जरूरत पड़ती है. धान, गेहूं, मक्का, गन्ना और कई दूसरी फसलों में इसका इस्तेमाल होता है.

हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है. रिपोर्ट के अनुसार ईरान संघर्ष और वैश्विक तनाव के कारण खाद आपूर्ति पर असर पड़ा है. इसी वजह से भारत सरकार पहले से ज्यादा मात्रा में खाद खरीदकर स्टॉक मजबूत करना चाहती है.

रिकॉर्ड मात्रा में होगी खरीद

खबर के मुताबिक Indian Potash Limited (IPL) ने DAP खरीद के लिए बड़ा टेंडर जारी किया था. शुरुआत में कंपनी ने 12 लाख टन DAP खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर करीब 13.5 लाख टन कर दिया गया. बताया जा रहा है कि इस टेंडर में करीब 23 लाख टन DAP के ऑफर मिले थे. अलग-अलग सप्लायर्स ने 930 डॉलर प्रति टन से लेकर 1100 डॉलर प्रति टन तक के भाव दिए. आखिरकार सबसे कम बोली से मेल खाने वाले कई सप्लायर्स के साथ समझौता किया गया.

कितनी कीमत पर होगी खरीद?

जानकारी के मुताबिक भारत पश्चिमी तट के लिए करीब 7 लाख 65 हजार टन DAP 930 डॉलर प्रति टन की दर से खरीदेगा. वहीं पूर्वी तट के लिए लगभग 5 लाख 81 हजार 500 टन DAP 935 डॉलर प्रति टन की कीमत पर खरीदा जाएगा. यह खरीद ‘कॉस्ट एंड फ्रेट’ यानी CFR आधार पर की जाएगी, जिसमें माल की ढुलाई लागत भी शामिल रहती है.

किन देशों से आएगी DAP खाद?

भारत के लिए DAP की आपूर्ति मुख्य रूप से सऊदी अरब, रूस, मिस्र (Egypt) और मोरक्को से की जा सकती है. इन देशों को दुनिया के प्रमुख उर्वरक निर्यातकों में गिना जाता है. बताया जा रहा है कि खरीदी गई खाद की खेप 15 अगस्त तक लोडिंग पोर्ट से रवाना हो जाएगी.

वैश्विक बाजार पर भी पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इतनी बड़ी खरीद का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है. क्योंकि यह मात्रा भारत के सालाना DAP आयात का लगभग एक चौथाई हिस्सा मानी जा रही है. ऐसे में वैश्विक स्तर पर DAP की सप्लाई और ज्यादा कड़ी हो सकती है. साथ ही कीमतों में भी और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

किसानों के लिए क्यों जरूरी है DAP?

DAP खाद खेती में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में शामिल है. इसमें फास्फोरस और नाइट्रोजन जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो फसलों की शुरुआती बढ़वार के लिए बेहद अहम माने जाते हैं. खासकर खरीफ सीजन में धान, मक्का और दलहन फसलों के लिए DAP की मांग काफी बढ़ जाती है. अगर समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो, तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसी वजह से सरकार पहले से स्टॉक तैयार रखने पर जोर दे रही है.

पहले यूरिया खरीद में भी बना था रिकॉर्ड

दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने भी भारत ने यूरिया खरीद में रिकॉर्ड बनाया था. उस समय देश ने एक ही टेंडर में करीब 25 लाख टन यूरिया खरीदने का समझौता किया था. हालांकि उस खरीद में कीमतें दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई थीं. इससे साफ है कि वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है.

खरीफ सीजन से पहले सरकार की तैयारी

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार इस बार खरीफ सीजन से पहले किसी भी तरह की खाद कमी का जोखिम नहीं लेना चाहती. मानसून के दौरान खेती का काम तेजी से शुरू होता है और इसी समय DAP की मांग सबसे ज्यादा रहती है. अगर खाद की उपलब्धता बनी रहती है, तो किसानों को समय पर खेती करने में आसानी होगी और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.

आने वाले समय में बढ़ सकती है चुनौती

वैश्विक हालात, ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन की समस्याओं को देखते हुए आने वाले महीनों में उर्वरक बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इसी वजह से भारत सरकार लगातार खाद स्टॉक और आयात रणनीति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो.

Topics: