अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भी चमका भारतीय बासमती, 154 देशों में बढ़ी मांग, निर्यात 7.5 फीसदी बढ़ा

Indian Basmati Rice Export: दुनियाभर में व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत के बासमती चावल की विदेशों में मांग बढ़ी है. वित्त वर्ष 2025-26 में बासमती निर्यात 7.51 फीसदी बढ़कर 65.21 लाख टन पहुंच गया. हालांकि रुपये की कमजोरी के कारण निर्यात से होने वाली कुल कमाई में हल्की गिरावट दर्ज की गई.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 27 Jun, 2026 | 09:57 AM

Basmati Rice Export: दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे तनाव और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय बासमती चावल की मांग पर कोई खास असर नहीं पड़ा है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के बासमती चावल के निर्यात में मात्रा के हिसाब से 7.51% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में व्यापार प्रभावित होने के बावजूद भारतीय बासमती ने विदेशी बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी.

हालांकि रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव की वजह से निर्यात का कुल मूल्य थोड़ा कम हुआ है, लेकिन दुनिया भर में भारतीय बासमती की मांग और लोकप्रियता अब भी बरकरार है.

65 लाख टन से ज्यादा बासमती का हुआ निर्यात

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 65.21 लाख मीट्रिक टन (LMT) बासमती चावल का निर्यात किया. पिछले साल की तुलना में यह करीब 4.55 लाख मीट्रिक टन अधिक है. यानी बासमती निर्यात में मात्रा के हिसाब से 7.51 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे साफ है कि दुनिया के कई देशों में भारतीय बासमती की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है.

निर्यात मूल्य में आई मामूली गिरावट

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात की मात्रा बढ़ी लेकिन कुल कमाई में हल्की गिरावट देखने को मिली. वित्त वर्ष 2025-26 में बासमती निर्यात का कुल मूल्य 50,138.24 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 50,312 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 0.34 प्रतिशत कम है. जानकारों के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह भारतीय रुपये की एक्सचेंज रेट में आई कमजोरी और वैश्विक बाजार की परिस्थितियां रहीं.

सऊदी अरब सबसे बड़ा खरीदार

बासमती खरीदने वाले देशों में सऊदी अरब पहले स्थान पर रहा. इस दौरान उसने 10.55 लाख मीट्रिक टन बासमती खरीदा, जिसकी कीमत 8,323.97 करोड़ रुपये रही. हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले सऊदी अरब का आयात थोड़ा कम हुआ, लेकिन वह अब भी भारत का सबसे बड़ा बासमती खरीदार बना हुआ है.

ईरान ने बढ़ाई खरीद

भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद ईरान ने भारत से बासमती चावल की खरीद बढ़ाई. वित्त वर्ष 2025-26 में ईरान ने भारत से करीब 10 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल खरीदा, जिसकी कीमत 6,971.44 करोड़ रुपये रही. यह पिछले साल के मुकाबले अधिक है. वहीं, इराक भारत से बासमती खरीदने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश रहा. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने इराक को करीब 7.64 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया.

इन देशों में भी रही अच्छी मांग

  • UAE: 5.35 लाख मीट्रिक टन
  • यमन: 3.97 लाख मीट्रिक टन
  • अमेरिका: 2.83 लाख मीट्रिक टन
  • ब्रिटेन: 2.42 लाख मीट्रिक टन
  • कुवैत: 2.04 लाख मीट्रिक टन
  • जॉर्डन: 1.48 लाख मीट्रिक टन
  • ओमान: 1.43 लाख मीट्रिक टन

इन देशों में लगातार बढ़ती मांग यह दिखाती है कि भारतीय बासमती की खुशबू और गुणवत्ता आज भी दुनिया भर के उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनी हुई है.

वैश्विक बाजार में बनी रही मजबूत मौजूदगी

आंकड़े बताते हैं कि व्यापारिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद भारतीय बासमती चावल की मांग बनी हुई है. मात्रा के लिहाज से निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि भारत ने पिछले साल की तरह 154 देशों में अपनी मौजूदगी कायम रखी.

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