Iran- Israel War: 50 फीसदी गिरा प्याज का रेट, किसानों ने की ‘MIS’ योजना लागू करने की मांग.. CM को लिखा पत्र
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते महाराष्ट्र में प्याज की थोक कीमतें आधी होकर 800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं. किसानों को उत्पादन लागत भी नहीं मिल रही. किसान संगठन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से केंद्र की मार्केट इंटरवेंशन स्कीम लागू करने और तहसील स्तर पर खरीद करने की मांग की है.
Onion Mandi Rate: ईरान-इजरायल के बीच जारी जंग के चलते प्याज की थोक कीमतों में भारी गिरावट आई है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. कीमतों में गिरावट का आलम यह है कि अब प्याज का रेट लगभग आधा होकर 800 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है. महाराष्ट्र के सबसे बड़े प्याज किसानों के संगठन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से केंद्र सरकार की मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) लागू करने की मांग की है, ताकि प्याज किसानों को नुकसान से उबारा जा सके.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ ने 28 मार्च को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पिछले चार हफ्तों में युद्ध के कारण 150 से अधिक प्याज कंटेनर कई बंदरगाहों में फंसे हुए हैं, जिससे घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति हो गई और थोक कीमतें गिर गईं. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते में युद्ध शुरू होने से पहले, प्याज की कीमतें 1,500 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर थीं. लेकिन पिछले कुछ दिनों में कीमतें गिरकर 800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं. वहीं, कई जगहों पर किसानों को 300 रुपये क्विंटल भी भाव मिल रहा है. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.
प्याज का उत्पादन लागत 1000 रुपये क्विंटल से ज्यादा
उन्होंने कहा कि प्याज की उत्पादन लागत 1,000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा होती है, लेकिन कीमतें गिरने से किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया कि स्थिति गंभीर है और कीमतों में लगभग 50 फीसदी की गिरावट आई है. लेकिन इसके बावजूद किसान मजबूरी में प्याज की बिक्री कर रहे हैं. ऐसे में अब सरकार की हस्तक्षेप की जरूरत है. किसान नेताओं ने पत्र में राज्य सरकार से कहा है कि वह तुरंत केंद्र सरकार से मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) लागू करने का अनुरोध करें. उनका मानना है कि इससे प्याज की कीमतें बढ़ेंगी और किसानों को राहत मिलेगी.
पत्र में यह भी बताया गया कि प्याज किसानों को पहले से ही निर्यात नीतियों की वजह से दिक्कतें थीं और युद्ध ने संकट और बढ़ा दिया है. पिछले दो साल में निर्यात 25 लाख टन से घटकर 12 लाख टन रह गया. भरत दिघोले ने कहा कि सरकार को तहसील स्तर पर प्याज खरीदनी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके.
पाशा पटेल ने मुख्यमंत्री से की ये मांग
महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के प्रमुख पाशा पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री प्याज की कीमतों के मुद्दे पर ध्यान दे रहे हैं और वह जल्द ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से निर्यात को लेकर बात करेंगे. उन्होंने बताया कि प्याज की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों से गिर रही हैं. मुख्यमंत्री ने तीन दिन पहले ही इस पर बैठक की थी और प्रशासन को आदेश दिया है कि कृषि और वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मार्केटिंग विभाग के सचिव की कमेटी बनाई जाए, जो प्याज किसानों की मदद के लिए तत्काल उपाय सुझाए. उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि वह जल्द ही गोयल से मिलेंगे. पटेल ने कहा कि प्याज की आपूर्ति बढ़ाई गई है और बिक्री के लिए बाजार सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं.