करनाल धान घोटाले में बड़ा खुलासा, इस तरह हुआ फर्जीवाड़ा का खेल.. 5 अधिकारी बर्खास्त
हरियाणा के करनाल में करोड़ों रुपये के धान खरीद घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में फर्जी खरीद, नकली गेट पास, गायब स्टॉक और फर्जी GPS रिकॉर्ड सामने आए हैं. मामले में पांच अधिकारियों को बर्खास्त किया गया, जबकि 40 से ज्यादा लोग जांच के घेरे में हैं.
Haryana Paddy Scam: हरियाणा के करनाल जिले में पिछले खरीफ सीजन के दौरान हुए करोड़ों रुपये के धान खरीद घोटाले की विभागीय जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में पता चला कि यह एक संगठित ‘फर्जी खरीद’ रैकेट था, जिसमें खरीद एजेंसियों के अधिकारी, हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (HSAMB), राइस मिलर, आढ़ती और अन्य लोग शामिल थे. जांच में धान की खरीद, भंडारण, परिवहन और सत्यापन में भारी गड़बड़ियां सामने आईं. रिकॉर्ड में जो धान का स्टॉक दिखाया गया था, वह जमीन पर मौजूद ही नहीं मिला. इसके अलावा फर्जी गेट पास, नकली स्टॉक एंट्री, संदिग्ध GPS रिकॉर्ड और सिर्फ कागजों में दिखाई गई धान खरीद जैसी अनियमितताएं भी सामने आईं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ. वहीं, 5 अधिकारियों का बर्खास्त भी कर दिया गया है.
जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक ने पांच अधिकारियों- इंस्पेक्टर लोकेश, संदीप शर्मा, यशवीर सिंह, समीर वशिष्ठ और सब-इंस्पेक्टर रामफल को बर्खास्त कर दिया है. विभागीय जांच में करनाल अनाज मंडी के इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ को करोड़ों रुपये के नुकसान के लिए जिम्मेदार माना गया. भिवानी के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) की जांच में सामने आया कि अक्टूबर 2025 में भौतिक सत्यापन के दौरान मेसर्स बाटन फूड्स राइस मिल में 12,500 क्विंटल से ज्यादा धान की कमी पाई गई.
अनाज मंडी से जुड़े परिवहन रिकॉर्ड में अंतर मिला
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह भी पता चला कि समीर वशिष्ठ ने गेट पास जारी करने से पहले ट्रकों की सही जांच नहीं की. साथ ही, धान ढुलाई से जुड़े वेटब्रिज स्लिप भी पेश नहीं कर सके. GPS रिकॉर्ड में कई ट्रकों की यात्रा ‘शून्य किलोमीटर’ दिखाई गई, जबकि रिकॉर्ड में दावा किया गया था कि धान मंडियों से राइस मिल तक पहुंचाया गया. इंस्पेक्टर यशवीर सिंह को भी बर्खास्त कर दिया गया. जांच में M/s Batan Foods Rice Mill से जुड़ी धान खरीद और उठान प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां सामने आईं. अधिकारियों को घरौंडा अनाज मंडी से जुड़े परिवहन रिकॉर्ड में अंतर मिला और धान का स्टॉक भी गायब पाया गया. जांच में यह भी सामने आया कि जरूरी अनुमति और गेट पास दस्तावेज मौजूद नहीं थे.
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इसी तरह निसिंग अनाज मंडी के इंस्पेक्टर लोकेश के खिलाफ भी समान अनियमितताएं मिलीं. जांच में पता चला कि धान का स्टॉक गायब था और परिवहन रिकॉर्ड फर्जी थे. कई गेट पास बिना वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी के जारी किए गए थे. वहीं GPS रिकॉर्ड में ट्रकों की दूरी फिर से ‘शून्य किलोमीटर’ दिखाई गई, जिससे फर्जी ढुलाई का शक और मजबूत हो गया.
खरीद नियमों का पालन नहीं किया
जुंडला अनाज मंडी के इंस्पेक्टर संदीप शर्मा को भी बर्खास्त कर दिया गया. जांच में पाया गया कि उन्होंने खरीद नियमों का पालन नहीं किया और बिना अनुमति के उसी राइस मिल के लिए गेट पास जारी किए. विभाग के अनुसार, उनकी कार्यप्रणाली से खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता प्रभावित हुई और सरकार को राजस्व नुकसान उठाना पड़ा. वहीं, सब-इंस्पेक्टर रामफल को धान का स्टॉक गायब होने और भंडारण में अनियमितताओं के मामले में सेवा से हटाया गया. जांच में उन पर अनिवार्य भौतिक सत्यापन नहीं करने और बिना मंजूरी के राइस मिल परिसर के बाहर धान भंडारित करने की अनुमति देने का आरोप लगा.
अलग-अलग थानों में 6 एफआईआर दर्ज
अब तक करनाल पुलिस ने अलग-अलग थानों में छह एफआईआर दर्ज की हैं. इस मामले में 40 से ज्यादा अधिकारी, राइस मिलर और आढ़ती गिरफ्तार किए जा चुके हैं या जांच में शामिल हुए हैं. पुलिस को शक है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से लाए गए धान और चावल को फर्जी तरीके से हरियाणा का उत्पादन दिखाकर सरकार को कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के रूप में सप्लाई किया गया.