पहली बार सिंगापुर पहुंचीं कश्मीर की प्रीमियम चेरी और प्लम, किसानों की कमाई 50 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद

Kashmir Cherry Export: जम्मू-कश्मीर की अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम (आलूबुखारा) की पहली खेप सिंगापुर निर्यात की गई है. एपीडा की पहल से शोपियां और पुलवामा के किसानों के फल अब UAE के बाद सिंगापुर के बाजार तक पहुंच गए हैं. इस पहल से किसानों को पारंपरिक बाजारों की तुलना में करीब 50 फीसदी अधिक कीमत मिलने की उम्मीद है.

नोएडा | Published: 19 Jul, 2026 | 08:01 AM

Indian Fruit Export: कश्मीर की वादियां सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि स्वादिष्ट फलों के लिए भी दुनियाभर में मशहूर हैं. अब यहां के बेहतरीन फल विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. पहली बार जम्मू-कश्मीर की अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम (आलूबुखारा) की खेप सिंगापुर भेजी गई है. इससे पहले ये फल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बाजारों में भी सफलतापूर्वक पहुंच चुके हैं. इस उपलब्धि से उम्मीद है कि, कश्मीर के बागवानी उत्पादों को दुनिया के बाजारों में नई पहचान मिलेगी और किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम भी मिल सकेगा.

APEDA की मदद से सिंगापुर पहुंची पहली खेप

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की पहल पर शोपियां और पुलवामा जिले के किसानों की उगाई गई प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप सिंगापुर के लिए रवाना की गई. इस अवसर पर Osum Food Solutions LLP और Fruit Master Agro Fresh Private Limited, पुलवामा के सहयोग से फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया. यह कदम जम्मू-कश्मीर के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है.

UAE के बाद अब सिंगापुर के बाजार में मिली जगह

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, हाल ही में कश्मीर से ताजा चेरी और प्लम का सफल निर्यात अबू धाबी और दुबई किया गया था. वहां इन फलों को अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब सिंगापुर के बाजार में भी इनकी एंट्री हो गई है. इससे साफ है कि कश्मीर के प्रीमियम फलों की मांग लगातार बढ़ रही है और दुनिया के बड़े बाजारों में भारतीय बागवानी उत्पाद अपनी जगह बना रहे हैं.

वैज्ञानिक तरीके से हुई तुड़ाई और पैकिंग

निर्यात के लिए फलों की तुड़ाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की गई. इसके बाद इन्हें अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और फाइटोसैनिटरी मानकों के अनुसार कोल्ड चेन के जरिए सिंगापुर भेजा गया. इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह था कि फल विदेश पहुंचने तक पूरी तरह ताजे रहें और उनकी क्वालिटी बनी रहे. बेहतर पैकिंग और तेज परिवहन से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक कम किया गया.

किसानों की आय में होगा बड़ा फायदा

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ जम्मू-कश्मीर के बागवानों को मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीधे पहुंचने से किसानों को पारंपरिक मंडियों की तुलना में करीब 50 प्रतिशत तक अधिक कीमत मिल सकती है. बेहतर दाम मिलने से किसान वैज्ञानिक खेती, आधुनिक पैकिंग और फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित होंगे. इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और बागवानी क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी.

कश्मीर के फलों को मिलेगी वैश्विक पहचान

वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि, एपीडा लगातार भारतीय फलों और कृषि उत्पादों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है. बेहतर लॉजिस्टिक्स, निर्यात सुविधाओं और बाजारों के विस्तार से जम्मू-कश्मीर के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा. अगर इसी तरह नए देशों में निर्यात बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर दुनिया के भरोसेमंद प्रीमियम फल उत्पादक क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि भारत के बागवानी निर्यात को भी नई रफ्तार मिलेगी.

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