लसलगांव मंडी में ग्रीष्मकालीन प्याज की आवक शुरू, 1320 रुपये क्विंटल रेट.. किसानों को हो रहा नुकसान

Agmarknet के अनुसार, 17 मार्च को लसलगांव मंडी में स्थानीय किस्म के प्याज की कीमतें 651 रुपये से 1,417 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं. इस दिन प्याज का मॉडल प्राइस 1,275 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. जबकि इसके अगले दिन कीमतों में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई.

नोएडा | Updated On: 19 Mar, 2026 | 05:05 PM

Mandi Rate: महाराष्ट्र स्थित एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लसलगांव में ग्रीष्मकालीन प्याज की आवक शुरू हो गई है. हालांकि, नई उपज की कीमत भी ज्यादा नहीं है. किसानों को 1,320 रुपये क्विंटल ही रेट मिल रहा है. ऐसे में किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है. खास बात यह है कि मंडी में ग्रीष्मकालीन प्याज आने से खरीफ प्याज का रेट कम हो गया है. जो खरीफ प्याज पहले 1,500 रुपये क्विंटल बिक रहा था, अब उसका भाव गिरकर 900 रुपये पर पहुंच गया है. खरीफ किसानों का कहना है कि वे उपनी उपज की उत्पाद लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.

Agmarknet के आंकड़ों के अनुसार, लसलगांव मंडी में प्याज की आवक  में बढ़ोतरी हो रही है. 14 मार्च को मंडी में 960.20 मीट्रिक टन प्याज मंडी पहुंची थी. जबकि, 7 मार्च को आवक बढ़कर 1,657.60 मीट्रिक टन हो गई. वहीं, 18 मार्च को लसलगांव मंडी में प्याज की 1,713.20 मीट्रिक टन आवक हुई. यानी ग्रीष्मकालीन प्याज की कटाई शुरू होते ही मार्केट में प्याज की आवक में इजाफा हुआ है, जो समय के साथ-साथ बढ़ रही है.

लसलगांव मंडी प्याज का क्या है ताजा रेट

अगर रेट की बात करें तो Agmarknet के अनुसार, 17 मार्च को  लसलगांव मंडी  में स्थानीय किस्म के प्याज की कीमतें 651 रुपये से 1,417 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं. इस दिन प्याज का मॉडल प्राइस 1,275 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. जबकि इसके अगले दिन कीमतों में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई. लसलगांव मंडी में 18 मार्च को स्थानीय किस्म के प्याज की कीमत न्यूनतम 801 रुपये प्रति क्विंटल और अधिकतम 1,421 रुपये प्रति क्विंटल रही. इस दिन प्याज का मॉडल प्राइस 1,320 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.

प्याज की उत्पादन लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल आती है

वहीं, किसानों का कहना है कि मंडी में प्याज का रेट उत्पादन लागत से भी कम है. ऐसे प्याज की उत्पादन लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल आती है और इससे कम कीमत मिलने पर किसान भारी नुकसान झेलते हैं. महाराष्ट्र स्टेट प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा अभी बाजार में लेट खरीफ प्याज की आपूर्ति गर्मियों की प्याज की तुलना में ज्यादा है. पिछले एक महीने में लेट खरीफ प्याज की थोक कीमत में लगभग 40 फीसदी की गिरावट आई है. यही वजह है कि किसान अपनी प्याज उत्पादन लागत से कम कीमत पर बेच रहे हैं और भारी नुकसान झेल रहे हैं.

किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान देने की उठी मांग

इसलिए भरत दिघोले ने सरकार से मांग की है कि राज्य सरकार उन किसानों को पिछले छह महीनों में उत्पादन लागत  से कम में प्याज बेचने पर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की अनुदान राशि दे. गर्मियों की प्याज की शेल्फ लाइफ लंबी होने के कारण किसान इसे स्टोर करके बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद रखते हैं और जरूरत और बाजार की दर के अनुसार ही बेचते हैं. इसके विपरीत, खारिफ और लेट खरीफ प्याज की शेल्फ लाइफ 25 दिन से भी कम होती है, इसलिए किसानों के पास इसे तुरंत बाजार दर पर बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता. बुधवार को लसलगांव एपीएमसी में कुल 14,498 क्विंटल लेट खरीफ प्याज की नीलामी की गई, जबकि गर्मियों की प्याज की सिर्फ 2,634 क्विंटल ही नीलामी हुई.

 

 

 

Published: 19 Mar, 2026 | 04:58 PM

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